ओवैसी का केंद्र पर निशाना: मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर जताई चिंता

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मेघालय, संभल और जम्मू-कश्मीर की घटनाओं का हवाला देते हुए मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती नफरत पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों के सम्मान की मांग की।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के विभिन्न हिस्सों में मुसलमानों के खिलाफ नफरत और हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में आयोजित 'जलसा यौम-उल-कुरान' को संबोधित करते हुए ओवैसी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में हो रही घटनाएं भारतीय संविधान द्वारा प्रदान की गई समानता, न्याय और भाईचारे की भावना को प्रभावित कर रही हैं।

मेघालय और संभल की घटनाओं पर उठाए सवाल

अपने संबोधन के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने मेघालय में हुई हालिया हिंसा का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मेघालय में चुनाव लड़ रहे दो मुस्लिम व्यक्तियों की हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उन पर बंगाली भाषी मुसलमान होने का संदेह था। ओवैसी के अनुसार, राजनीतिक लाभ के लिए समुदायों के बीच नफरत और संदेह का माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश के संभल जिले की स्थिति पर भी चर्चा की और उन्होंने आरोप लगाया कि वहां पुलिस प्रशासन द्वारा नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, जैसे ईरान विवाद, पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने से रोकने की चेतावनी दी गई है। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे में कानून के दायरे में रहकर विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

फारूक अब्दुल्ला और उनाज खान मामले पर प्रतिक्रिया

सांसद ओवैसी ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ हुई हालिया घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ हिंसा या धमकी के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए और इसके साथ ही, उन्होंने 13 वर्षीय किशोर उनाज खान की मृत्यु पर भी दुख व्यक्त किया। रिपोर्टों के अनुसार, उनाज की मौत उसके एक मित्र द्वारा चलाई गई गोली से हुई थी। ओवैसी ने इस घटना को समाज में बढ़ती संवेदनहीनता और जागरूकता की कमी का परिणाम बताया। उन्होंने प्रशासन से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

समान नागरिक संहिता (UCC) पर कड़ा विरोध

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मुद्दे पर ओवैसी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस्लाम में विवाह केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि एक कानूनी अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) है। उन्होंने तर्क दिया कि निकाह इस्लामी धर्म का एक अनिवार्य हिस्सा है और इसे व्यक्तिगत कानूनों के तहत ही संचालित किया जाना चाहिए। ओवैसी ने कहा कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है जहां हर धर्म के अपने व्यक्तिगत कानून और परंपराएं हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता के माध्यम से किसी एक समुदाय के कानूनों को दूसरों पर थोपा नहीं जा सकता। उन्होंने मांग की कि एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और कूटनीति पर भारत का रुख

ओवैसी ने अपने भाषण में अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक स्थितियों पर भी चर्चा की। उन्होंने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र को दूसरे देश पर हमला करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री और भारत सरकार से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट रूप से संवाद और कूटनीति का समर्थन करें और ओवैसी ने बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि सैन्य हमलों से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है, जिसका प्रभाव वैश्विक शांति पर पड़ेगा। उन्होंने भारत की विदेश नीति में शांतिपूर्ण समाधानों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।