नई दिल्ली / अयोध्या सुनवाई 20वां दिन: मुस्लिम पक्ष ने भी माना अखाड़ा 1855 से मौजूद

Live Hindustan : Sep 06, 2019, 07:32 AM

अयोध्या में राम जन्मभूमि मामले में 20वें दिन की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा 1734 से अस्तित्व का दावा कर रहा है। लेकिन अखाड़ा 1885 में बाहरी आंगन में था और राम चबूतरा बाहरी आंगन में है जिसे राम जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है और मस्जिद को विवादित स्थल माना जाता है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के समक्ष धवन ने निर्मोही अखाड़े के गवाहों के दर्ज बयानों पर जिरह करते हुए महंत भास्कर दास के बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने माना कि मूर्तियों को दिसंबर 1949 में विवादित ढांचे के बीच वाले गुंबद के नीचे रखा गया था। 

पीठ के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इन विरोधाभासों के बावजूद आप यह मान रहे हैं कि उन्होंने (निर्मोही अखाड़ा) अपनी सेवत के अधिकार स्थापित कर लिए हैं। धवन ने कहा कि मैं उनको झूठा नहीं कह रहा हूं लेकिन सवाल यह है कि वे खुद को सेवत बता रहे हैं लेकिन उनको नहीं पता कि यह सेवत वे कब से कर रहे हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर आप निर्मोही अखाड़े के अस्तित्व को मान रहे हैं तो उनके सभी साक्ष्य स्वीकार किए जाएंगे। धवन ने कहा कि कुछ लोग अखाड़ा 700 साल पहले का मानते हैं, लेकिन मैं निर्मोही अखाड़े की उपस्थिति सन 1855 से मानता हूं। 1885 में महंत रघुबर दास ने मुकदमा दायर किया। 

धवन बोले, रामलला के अंतरंग सखा को सिर्फ पूजा का अधिकार है जमीन पर हक के दावे का अधिकार नहीं। जिस पर जस्टिस नजीर ने धवन से पूछा कि कल तो आपने सहअस्तित्व की बात की थी आज आप कुछ और बोल रहे हैं। धवन ने कहा कि मैं बदलाव नहीं भूमि पर स्वामित्व की बात कर रहा हूं। सेवा उपासना और मिल्कियत अलग-अलग मामले हैं। आपने इस संपत्ति के लिए बिलांग शब्द कहा, लेकिन इसका मतलब मालिकाना हक नहीं है। 

आज सुनवाई नहीं होगी 

अयोध्या मंदिर विवाद मामले की सुनवाई अब आगामी बुधवार को होगी। धवन को आराम देने के लिए शुक्रवार को सुनवाई नहीं रखी गई है। धवन ने कहा था कि उम्र होने के कारण वह पांच दिन लगातार बहस नहीं कर सकते। इस मामले में  20 दिन सुनवाई हो चुकी है। न्यायालय मामले की लगातार सुनवाई कर रहा है।