परमाणु डील पर ईरान का बड़ा फैसला: अमेरिका को 440 किलो यूरेनियम सौंपने को तैयार

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु तनाव कम होने के बड़े संकेत मिले हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अपने 440 किलो संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अमेरिका को सौंपने के लिए राजी हो गया है, जिसे एक बड़े कूटनीतिक सरेंडर के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी लंबे समय के परमाणु गतिरोध में एक ऐतिहासिक मोड़ आता दिख रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को छोड़ने के लिए सहमत हो गया है। इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ईरान के बड़े सरेंडर के रूप में देखा जा रहा है। तेहरान अब अपने 440 किलो संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है, और माना जा रहा है कि इस संबंध में किसी भी समय आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। यह कदम दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी टकराव को खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

समझौते की शर्तें और यूरेनियम का मुद्दा

ईरान के पास मौजूद 440 किलो संवर्धित यूरेनियम लंबे समय से विवाद की मुख्य जड़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने अब संकेत दिए हैं कि वह इस भंडार के मुद्दे पर समझौता करने के लिए तैयार है। हालांकि, यूरेनियम को किस तरह से और किस प्रक्रिया के तहत सौंपा जाएगा, इसके सटीक तंत्र को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ही इन तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। वॉशिंगटन की प्रमुख मांगों में यूरेनियम का मुद्दा हमेशा से शीर्ष पर रहा है। शुरुआत में ईरान इस विषय को बातचीत के पहले चरण में शामिल करने के खिलाफ था, लेकिन अमेरिकी वार्ताकारों के कड़े रुख के बाद उसे झुकना पड़ा।

सैन्य कार्रवाई का दबाव और इस्फहान पर हमले की योजना

अमेरिकी वार्ताकारों ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर तेहरान इस मुद्दे पर शुरुआती प्रतिबद्धता नहीं दिखाता, तो अमेरिका बातचीत छोड़कर दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने हाल के दिनों में ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के कई विकल्प तैयार कर लिए थे। इनमें इस्फहान स्थित भूमिगत परमाणु केंद्र पर बंकर बस्टर हमले और अमेरिका-इजराइल के संयुक्त कमांडो ऑपरेशन जैसे विकल्प शामिल थे। हालांकि इन योजनाओं को अंतिम मंजूरी नहीं मिली, लेकिन इसने ईरान पर भारी दबाव बनाया। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुमान के मुताबिक ईरान के पास करीब 970 पाउंड ऐसा यूरेनियम मौजूद है जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है। इजराइल का दावा है कि अगर इस यूरेनियम को और अधिक संवर्धित किया जाए तो इससे कई परमाणु हथियार तैयार किए जा सकते हैं।

ट्रंप का दावा और भविष्य की रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में दावा किया कि संघर्ष समाप्त करने को लेकर समझौता लगभग तय हो चुका है और उन्होंने कहा कि अब केवल अंतिम शर्तों और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा बाकी है। ट्रंप ने प्रस्तावित व्यवस्था को शांति से जुड़ा समझौता ज्ञापन बताया है। सूत्रों के मुताबिक, मसौदा समझौते में युद्ध समाप्ति की औपचारिक घोषणा, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और अगले 30 से 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई वार्ता शुरू करना शामिल हो सकता है। बातचीत में एक प्रस्ताव यह भी है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को रूस को सौंप सकता है, जैसा कि 2015 के परमाणु समझौते के दौरान किया गया था।

तनाव का इतिहास और ईरान की मांगें

फरवरी में अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए हमलों के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव 28 फरवरी से काफी बढ़ गया था। हालांकि अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं और अगर यह बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने की आशंका है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता का असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। ईरान ने किसी भी व्यापक समझौते के लिए प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों तक पहुंच की मांग भी दोहराई है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह समझौता कब आधिकारिक रूप लेता है।