विधान सभा / कर्नाटक विधानसभा स्पीकर ने कांग्रेस-जेडीएस के 14 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया

Twitter : Jul 28, 2019, 12:50 PM

बेंगलुरु. कर्नाटक में विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने रविवार को कांग्रेस-जेडीएस के 11 और बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया। बीते चार दिनों में स्पीकर अब तक 14 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता पर फैसला ले चुके हैं। उन्होंने गुरुवार को तीन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की थी। कर्नाटक में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद येदियुरप्पा को 29 जुलाई को बहुमत साबित करना है। स्पीकर ने कहा कि मौजूदा हालात में उन पर बेहद दबाव है। मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी देखरेख में विश्वास मत प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कहा है।

रमेश कुमार ने कहा, ‘‘येदियुरप्पा ने मुझसे कहा है कि सोमवार को अपनी देखरेख में विश्वास मत कराएं। फाइनेंस बिल भी 31 जुलाई को पास होना है, इसलिए मैं सभी विधायकों से विश्वास मत प्रस्ताव के दौरान मौजूद रहने की अपील करता हूं। हम कहां पहुंच चुके हैं? स्पीकर के नाते मौजूदा हालात में मुझ पर काफी दबाव है। इन सब चीजों ने मुझे तनाव के समंदर में धकेल दिया है।’’

जेडीएस विपक्ष की भूमिका में ही रहेगी

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि रमेश कुमार को पद छोड़ने के लिए कह दिया गया है, जो पारंपरिक रूप से सत्तारूढ़ दल के किसी सदस्य के पास होता है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। दूसरी ओर जेडीएस ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को समर्थन देने से इनकार कर दिया। जेडीएस ने कहा है कि वह विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में ही रहेगी। कर्नाटक में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद येदियुरप्पा 29 जुलाई को बहुमत साबित करेंगे।

भाजपा ने कहा- स्पीकर के फैसले का इंतजार कर रहे

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘हमारा पहला एजेंडा विश्वास मत साबित करना है। इसके बाद सोमवार को वित्तीय बिल पास कराया जाएगा। हम सिर्फ स्पीकर के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। विपक्ष का स्पीकर अभी तक नहीं हुआ है। यह परंपरा में नहीं है। रमेश कुमार को पद से इस्तीफा देना होगा।’’

अयोग्य घोषित विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

स्पीकर ने तीन बागी विधायकों को गुरुवार को अयोग्य घोषित किया था। यह तीनों कांग्रेस विधायक रमेश एल जारकिहोली, महेश कुमाथल्ली और निर्दलीय विधायक आर शंकर ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। स्पीकर ने कहा कि 23 मई 2023 तक उनकी सदस्यता खत्म रहेगी। साथ ही उनके उपचुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई थी।

ऐसे बढ़ गई सरकार की मुश्किलें

चार दिन चली चर्चा के बाद 23 जुलाई की शाम को कुमारस्वामी सरकार फ्लोर टेस्ट में फेल हो गई थी। विश्वास मत के दौरान स्पीकर को हटाकर सदन में विधायकों की संख्या 204 थी। बहुमत के लिए 103 का आंकड़ा जरूरी था। कांग्रेस-जेडीएस के पक्ष में 99 वोट पड़े, जबकि विरोध में 105 वोट पड़े। कुमारस्वामी 14 महीने से 116 विधायकों के साथ सरकार चला रहे थे, लेकिन इसी महीने 15 विधायक बागी हो गए। यहीं से सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ गई थीं।