बिजनेस / मारुति सुज़ुकी की बिक्री सितंबर में 24% घटी

The Financial Express : Oct 01, 2019, 05:15 PM

Auto Sales in September 2019: ऑटो सेक्‍टर में सुस्‍ती का दौर बना हुआ है. देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी और भारतीय बाजार में सबसे अधिक, 50 फीसदी से अधिक, बाजार हिस्‍सेदारी रखने वाली कंपनी मारु‍ति सुजुकी (Maruti Suzuki) की बिक्री सितंबर 2019 में भी नहीं सुधरी. कंपनी की ओर से मंगलवार को जारी सेल्‍स आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने मारुति की कुल बिक्री 24.4 फीसदी गिरकर 1,22,640 यूनिट रह गई. जबकि सितंबर 2018 में यह आंकड़ा 1,62,290 यूनिट था.

मारुति सुजुकी की घरेलू सेल्‍स 26.7 फीसदी गिरकर 1,12,500 रह गई, जबकि कंपनी ने पिछले साल सितंबर के दौरान घरेलू बाजार में 1,53,550 कारें बेची थीं. निर्यात के मोर्चे पर भी मारुति के हाथ निराशा लगी है. कंपनी का पिछले महीने निर्यात 17.8 फीसदी गिरकर 7,188 रह गया. जबकि सितंबर 2018 में कंपनी ने 8,740 कारों का निर्यात किया था.

हर सेगमेंट में घटी कारों की बिक्री

मारुति सुजुकी के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर में कंपनी की किसी भी सेगमेंट में बिक्री नहीं बढ़ी है. मारुति की मिनी सेगमेंट की बिक्री 42.6 फीसदी गिरकर 20,085 यूनिट रह गया. सितंबर 2018 में इस सेगमेंट में कंपनी ने 34,971 कारें बेची थीं. मिनी सेगमेंट में ऑल्‍टो, एसप्रेसो, पुरानी वेगनआर शामिल है. एसप्रेसो हालांकि सितंबर में ही लॉन्‍च हुई है.

इसी तरह, कॉम्‍पैक्‍ट सेगमेंट में भी मारुति की बिक्री 22.7 फीसदी गिरकर 57,179 यूनिट दर्ज की गई. पिछले साल सितंबर में इस सेगमेंट में 74,011 कारें बिकी थीं. इस सेगमेंट में नई वेगनऑर, सेलेरियो, इग्निश, स्विफ्ट, बलेनो, डिजायर मॉडल शामिल हैं.

मिड साइज सेगमेंट कंपनी के इकलौते मॉडल सिआज की बिक्री भी पिछले महीने 72.5 फीसदी लुढ़ककर 1,715 रह गई. जबकि सितंबर 2018 में मारुति ने 6,246 सिआज बेची थी.

यूटिलिटी व्‍हीकल्‍स सेगमेंट में हालांकि कंपनी की बिक्री लगभग बराबर रही. पिछले महीने इस सेगमेंट में कंपनी की बिक्री 0.5 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 21,526 रही. इस सेगमेंट में जिप्‍सी, अर्टिगा, एक्‍सएल 6, विटारा ब्रिजा, एस-क्रॉस मॉडल शामिल हैं. बता दें एक्‍सएल 6 की लॉन्चिंग अगस्‍त 2019 में हुई है.

वैन्‍स की कैटेगरी में कंपनी के दो मॉडल ओमिनी और इको की बिक्री भी 32.1 फीसदी गिरकर 9,946 यूनिट रह गई, जोकि सितंबर 2018 में 14,645 थी.

सरकार ने दी थी राहत

ऑटो इंडस्‍ट्री की डिमांड को बूस्‍ट देने के लिए हाल के महीनों में सरकार ने कई तरह की राहत देने की कोशिश की है.

सुस्ती से जूझ रहे ऑटोमोबाइल सेक्टर को राहत देने के लिए सरकार ने पिछले दिनों ताबड़तोड़ कई बड़े एलान किए. इसके तहत मार्च 2020 तक BS-IV वाहन खरीदने, सरकारी विभागों को नई गाड़ियां खरीदने पर बैन हटाने और वाहनों पर अतिरिक्त 15 फीसदी डिप्रिसिएशन देने जैसे कुछ अहम फैसले किए गए.

BS-IV वाहनों को अब मार्च 2020 तक खरीदा जा सकेगा और यह रजिस्ट्रेशन की पूरी अवधि तक चलाए जा सकेंगे. डिमांड बढ़ाने के लिए एक बड़े फैसले के तहत सरकार ने सरकारी विभागों की तरफ से पुराने वाहनों को बदलने के नई वाहनों की खरीद पर लगाए गए बैन को हटा लिया है.

सरकार जल्द स्क्रैपेज पॉलिसी भी लाएगी. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और इंटरनल कम्ब्युशन व्हीकल्स (ICV) का भी ​रजिस्ट्रेशन भी जारी रहेगा.

ऑटो सेक्टर के लिए सरकार ने एक और बड़े एलान के तहत 15 फीसदी अतिरिक्त डिप्रिसिएशन को मंजूरी दे दी. यानी अब यह 30 फीसदी हो गया. सभी वाहनों पर यह मार्च 2020 तक लागू होगा. इसके अलावा सरकार ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस में बढ़ोतरी का फैसला जून 2020 तक के लिए टाल दिया है.

सरकार ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला करते हुए कॉरपोरेट टैक्स में बड़ी कटौती की. नए प्रावधान के तहत घरेलू कंपनियों को 22 फीसदी की दर से इनकम टैक्स का भुगतान करना होगा. इसमें शर्त यह होगी उस कंपनी को कोई छूट या इन्सेंटिव का लाभ नहीं मिलेगा. इस तरह अब घरेलू कंपनियों पर प्रभावी टैक्स रेट सभी सरचार्ज और सेस मिलाकर 25.17 फीसदी होगा. मौजूदा कॉरपोरेट टैक्स रेट 30 फीसदी है जोकि अब 22 फीसदी हो जाएगा.

इसी तरह, 1 अक्टूबर 2019 के बाद मैन्युफैक्चरिंग कंपनी स्थापित करने वालों को 15 फीसदी की दर से इनकम टैक्स देना होगा. नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर सेस और सरचार्ज मिलाकर प्रभावी टैक्स रेट 17.01 फीसदी होगा. इन कंपनियों का प्रोडक्टशन 31 मार्च 2023 से पहले लागू होना चाहिए.