Coronavirus India / बच्चों के लिए कितनी खतरनाक होगी कोरोना वायरस की तीसरी लहर? जानें

Zoom News : Jun 12, 2021, 09:03 PM
Coronavirus India | कोरोना वायरस की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक साबित होगी या नहीं इसको लेकर अभी तक स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हुई है। अब इस संबंध में चिकित्सा विज्ञान क्षेत्र की प्रतिष्ठित पत्रिका लैनसेट की एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात के अब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि कोविड-19 महामारी की तीसरी संभावित लहर में बच्चों के गंभीर रूप से संक्रमित होने की आशंका है। 

लैंसेट कोविड-19 कमीशन इंडिया टास्क फोर्स ने भारत में 'बाल रोग कोविड-19' के विषय के अध्ययन के लिए देश के प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञों के एक विशेषज्ञ समूह के साथ चर्चा करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित बच्चों में उसी प्रकार के लक्षण पाए गए हैं, जैसा कि दुनिया के अन्य देशों में देखने को मिले हैं।     

मृत्यु दर 2.4 प्रतिशत

आंकड़ों के मुताबिक 10 साल से कम उम्र के बच्चों में कोविड-19 के कारण मृत्यु दर 2.4 प्रतिशत दर्ज की गई। संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले करीब 40 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित भी थे। लैनसेट की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए 10 साल से कम उम्र के नौ प्रतिशत बच्चों में बीमारी के गंभीर लक्षण देखे गए।

इतने प्रतिशत बच्चों को भर्ती होने की जरुरत पड़ सकती है

महामारी की दोनों लहरों के दौरान ऐसा देखा गया। देश के टॉप अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में बाल रोग विशेषज्ञ शेफाली गुलाटी, सुशील के काबरा और राकेश लोढ़ा जैसे चिकित्सकों ने लैनसेट की ओर से किए गए इस अध्ययन में हिस्सा लिया। काबरा ने महामारी की तीसरी संभावित लहर को लेकर कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले पांच प्रतिशत से भी कम बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ेगी, जिनमें मृत्यु दर दो प्रतिशत तक हो सकती है। 

500 में से 2 प्रतिशत बच्चों की मौत

काबरा ने पीटीआई-भाषा से कहा, हम कह सकते हैं कि एक लाख संक्रमित बच्चों में से केवल 500 बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ी और उसमें से दो प्रतिशत बच्चों की मृत्यु हुई है। बच्चों में बीमारी के गंभीर लक्षण होने की आशंका बेहद कम है। संक्रमित होने वाले कुछ बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ती है। 

जिनको गंभीर बीमारी उनको डर

संक्रमित होने वाले केवल उन्ही बच्चों की मृत्यु हुई जो पहले से ही मधुमेह, कैंसर और कुपोषण जैसी अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। सामान्य बच्चों में इसके कारण मृत्यु होने की आशंका बहुत ही कम है। लैनसेट की यह रिपोर्ट मार्च 2020 से दिसंबर 2020 के बीच तथा जनवरी 2021 से अप्रैल 2021 के बीच दोनों लहरों के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। 

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