देश / शशि थरूर बोले- राहुल गांधी अध्यक्ष बनें या फिर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव

News18 : Aug 12, 2020, 03:20 PM
नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) का कार्यकाल 10 अगस्त को पूरा हो गया। इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने लोगों में कांग्रेस के लक्ष्यहीन और दिशाहीन होने की बढ़ती धारणा को खत्म करने के लिए पूर्णकालिक अध्यक्ष (Congress New President) ढूंढने की मांग की है। थरूर ने यह भी कहा कि उन्हें निश्चित रूप से ऐसा लगता है कि पार्टी का एक बार फिर से नेतृत्व करने के लिए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के पास ‘साहस, क्षमता और योग्यता' है, लेकिन अगर इसके बाद भी वह ऐसा करना नहीं चाहते हैं, तो पार्टी को एक नया अध्यक्ष चुनने के लिए वोटिंग प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए।

केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने News18 से एक बातचीत में ये बयान दिया। उन्होंने कहा, 'मेरा निश्चित तौर पर मानना है कि हमें अपने नेतृत्व के आगे बढ़ने के बारे में स्पष्ट होना चाहिए। मैंने पिछले साल अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सोनिया जी की नियुक्ति का स्वागत किया था, लेकिन मेरा मानना है कि उनसे अनिश्चितकाल तक इस जिम्मेदारी को उठाने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा

लगभग सभी का कहना है कि कांग्रेस के साथ समस्या यह है कि वह नेतृत्वविहीन और लक्ष्यहीन है। क्या कांग्रेस अध्यक्ष के मुद्दे में देरी करके गलती कर रही है?

जैसा कि मैंने कई मौकों पर कहा कि चुनौती ये है कि अलग-अलग मीडिया जैसे चीजों को दिखाती है, उससे लोगों की धारणा बनती और बिगड़ती है। कई बार इसे खारिज भी कर दिया जाता है। जैसा कि आपका सवाल है कि कांग्रेस नेतृत्वहीन और लक्ष्यहीन है। चुनौती लेने में असमर्थ है।।। हमें लोगों में बढ़ती और उपेक्षा करने वाली मीडिया द्वारा तूल दी जा रही यह धारणा भी खत्म करनी होगी कि कांग्रेस लक्ष्यहीन और दिशाहीन है, कांग्रेस विश्वसनीय राष्ट्रीय विपक्ष की भूमिका निभा पाने में अक्षम है। क्योंकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हमें एक पूर्णकालिक, पूर्ण अवधि के अध्यक्ष को खोजने की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है।एक बार ऐसा हो जाने के बाद हम फिर अन्य क्षेत्रों के समाधानों की पहचान करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। जैसे कि संगठनात्मक चुनौतियां।।। विशेष रूप से उन राज्यों में पार्टी को फिर से ज़िंदा करना, जहां हम अभी कमजोर होते जा रहे हैं। इसके साथ ही हमें अपनी सदस्यता की रैंक को और एक्टिव करना होगा। कैडर में ऊर्जा और जोश भरना होगा। आज के वक्त में कांग्रेस भाजपा के लिए एकमात्र विश्वसनीय राष्ट्रीय विकल्प बनी हुई है। हमें उस पर खरा उतरने की जरूरत है।

क्या कांग्रेस गांधी परिवार से आगे नहीं बढ़ सकती है?

मुझे लगता है कि यह सवाल बहुत आसानी से इस तथ्य को नजरअंदाज कर देता है कि नेहरू-गांधी परिवार कांग्रेस पार्टी के सदस्यों के दिल में एक विशेष स्थान रखता है। इसके अच्छे कारण भी हैं। इस शानदार विरासत के अलावा भी कांग्रेस में बहुत कुछ है। कांग्रेस लगातार विभिन्न समूहों, विचारधाराओं, भौगोलिक और समुदायों को एक साथ लेकर आई है, जो सामूहिक रूप से कांग्रेस पार्टी का निर्माण करते हैं।इसके साथ ही नेहरू-गांधी परिवार के पास सफल नेतृत्व करने और राजनीतिक अनुभव का एक स्पष्ट रिकॉर्ड भी है। बुरे वक्त में भी कांग्रेस नेतृत्व पुरुषों और महिलाओं को एक साथ लाने में कामयाब रही है। हमें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि उन्होंने पार्टी के लिए क्या किया है।या परिवार के दो पूर्व अध्यक्षों द्वारा दिए गए अंतिम बलिदान को भी हमें याद रखना होगा।उदाहरण के लिए, अगर राहुल गांधी नेतृत्व को फिर से संभालने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें सिर्फ अपना इस्तीफा वापस लेना होगा। उन्हें दिसंबर 2022 तक के लिए कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। ऐसे में वह फिर से बागडोर अपने हाथ में ले सकते हैं। यह पार्टी के रैंक और फ़ाइल के बीच एक लोकप्रिय परिणाम होगा। लेकिन अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो हमें एक और उपाय खोजना होगा। आखिर में वोटिंग का ही रास्ता बचता है।

आपने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने की बात कही है। आपको क्या लगता है कि ये संभव है? क्या कोई चुनाव लड़ने के लिए भी खड़ा होगा?

उन परिस्थितियों में अगर पिछले के अध्यक्ष दोबारा जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हैं, तो अंतरिम अध्यक्ष से अनिश्चित काल तक जिम्मेदारी अपेक्षा करना अनुचित है। तब मेरे विचार से यही उचित होगा कि अध्यक्ष पद के लिए चुनाव और सीडब्ल्यूसी की निर्वाचित सीटों पर भी चुनाव हो, ये कई लाभकारी परिणाम होंगे।एक सहभागी लोकतांत्रिक प्रक्रिया आने वाले नेतृत्व की विश्वसनीयता और वैधता में महत्वपूर्ण रूप से जोड़ देगी, जो कि कांग्रेस को फिर से सक्रिय करेगी। मैं बहुत व्यक्तिगत रूप से चिंतित नहीं हूं कि कौन चुनाव लड़ेगा और कौन जीतेगा। क्योंकि तर्क किसी व्यक्ति के बारे में नहीं है, लेकिन एक प्रक्रिया या एक प्रणाली की वकालत मैं जरूर करूंगा। क्योंकि हमारा लक्ष्य कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर फिर से उभारना है और उसे आगे ले जाना है। यह मेरा एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण है। आखिर में सबकुछ पार्टी पर निर्भर करता है कि वो अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी या नहीं।

कांग्रेस में सचिन पायलट की वापसी की शुरुआत राहुल गांधी ने की थी। क्या उन्हें दूसरों को वापस लेने की कोशिश करनी चाहिए? और क्या यह मजबूत नेतृत्व था?

सचिन की क्या परेशानी थी ये अब समझ में आ गयी हैं और राजस्थान में कांग्रेस की समस्या का समाधान हो गया है। सचिन को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पार्टी के नियम कानून का विरोध किया। इस तरह के नेताओं के भविष्य के बारे में पार्टी को अब सोचना चाहिए।हां कुछ मामलों को लेकर पार्टी में दिक्कतें हैं और मेरे लिए भी परेशानी है। जिसके बारे में पार्टी को सोचना चाहिए। भाजपा का विरोध करना छोड़कर अब हमें पार्टी और देश के बारे में सोचना होगा तभी हम बेहतर कर पाएंगे।मुझे लगता है कि हर मामला अपने आप में अलग होता है। सचिन और सिंधिया का केस अलग था। जो सिंधिया पर लागू होता है, वो सचिन पर लागू नहीं होता। मुझे उसकी नाराजगी पर खराब जरूर लगा, क्योंकि मैं उसे हमारी सबसे अच्छी और चमकदार युवा संपत्ति में से एक के रूप में देखता हूं। मुझे खुशी है कि उन्होंने पार्टी में बने रहने और बेहतर भारत के लिए हमारे साथ लड़ने का विकल्प चुना है।

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