पश्चिम बंगाल / वो रेलवे स्टेशन जहां आत्माओं का है बसेरा, रात में नहीं रुकती कोई भी ट्रेन

News18 : Jan 13, 2020, 12:22 PM

देश में रेलवे स्टेशनों की शुरुआत को लगभग 200 साल हो चुका है।  बड़ी आबादी दूर-पास के सफर के लिए आज भी रेल सुविधा पर भी भरोसा करती है।  ऐसे में किसी ट्रेन स्टेशन का हॉन्टेड यानी भुतहा कहलाना हैरानी की ही बात है।  हालांकि बेगुनकोडोर (Begunkodor) ऐसा एक रेलवे स्टेशन है जिसे लगभग 42 सालो से “ghost station” माना जाता है।  यहां लगातार अजीबो गरीब हादसे हुए, जिनके पीछे रहस्यमयी ताकतों का हाथ बताया जाता है। 

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में बेगुनकोडोर रेलवे स्टेशन देश का सबसे हॉन्टेड स्टेशन कहा जाता रहा।  इस स्टेशन का उद्घाटन 1960 में हुआ था।  कहा जाता है कि एक संथाल रानी ने इसे खुलवाने में अहम भूमिका निभाई थी।  स्टेशन की शुरुआत में तो सब ठीक चलता रहा लेकिन अचानक 7 सालों बाद रहस्यमयी हादसे होने लगे।  

1967 में स्टेशन मास्टर ने रात में रेलवे ट्रैक पर सफेद कपड़े पहने एक युवती को घूमते देखा।  उसे शक था कि युवती ने ट्रेन के सामने कटकर खुदकुशी की होगी या फिर ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई होगी।  स्टेशन मास्टर ने अपने स्टाफ और परिवार के लोगों से इस बारे में बात की लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया।  

युवती को देखने के दावे के कुछ रोज बाद ही स्टेशन मास्टर ने आत्महत्या कर ली।  उसके साथ ही उसका परिवार भी रेलवे के अपने मकान में मृत मिला।  हत्या, आत्महत्या ऐसे किसी भी प्रमाण तक पुलिस नहीं पहुंच सकी।  परिवार की मौत के बाद आसपास के लोगों में डर बैठ गया।  वे मानने लगे कि उसी भुतहा युवती ने सबको मारा होगा।  इसके बाद से तरह-तरह की बातें सामने आने लगीं। 

स्थानीय लोग अक्सर सफेद साड़ी पहने युवती को ट्रैक पर घूमता देखने का दावा करने लगे।  वे यह भी कहते कि युवती रेल के आने पर पटरियों पर साथ-साथ चलती है और कई बार ट्रेन के सामने भी आ जाती है।  धीरे-धीरे खौफ बढ़ने लगा और हालत ये हो गई कि यहां पर काम करने से रेलवे के लोग इनकार करने लगे और स्टेशन पर ताला लग गया।   

सालों तक यहां कोई भी ट्रेन नहीं रुकी थी।  ट्रेनें गुजरती भीं तो इस रूट पर लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार तेज कर देते ताकि भुतहा ताकतें हमला न कर दें।  इस जगह से ट्रेन की बुकिंग बंद हो चुकी थी।  यहां तक कि रेल मंत्रालय के पास भी खबर जा चुकी थी और बेगुनकोडोर को कुछ हॉन्टेड स्टेशनों में रखा जाने लगा था।

साल 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बैनर्जी ने बेगुनकोडोर स्टेशन को एक बार फिर चालू करवाया।  अब यहां पर 10 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं लेकिन रात में न कोई ट्रेन रुकती है और न ही कोई मुसाफिर इंतजार करता है।  लगभग 40 साल तक इस स्टेशन में घूमने-फिरने के लिए विदेशी सैलानी आते रहे, जिन्हें हॉन्टेड टूरिज्म में दिलचस्पी थी।  वैसे ये बात और है कि स्टेशन के दोबारा शुरू होने के बाद यहां पर किसी भी तरह की रहस्यमयी एक्टिविटी नहीं देखी गई।