गैजेट / ऑनलाइन पेमेंट फ्रॉड से बचना है तो आपका अलर्ट रहना सबसे जरूरी |

Dainik Bhaskar

Jul 24, 2019, 03:13 PM

गैजेट डेस्क. फीडेलिटी नेशनल इंफॉर्मेशन सर्विस यानी एफआईएस की एक स्टडी के मुताबिक, देश में ऑनलाइन फ्रॉड की संख्या में दोगुना उछाल आया है और यह संख्या पिछले वर्ष 18% से बढ़कर 37% तक पहुंच गई। इस फ्रॉड का शिकार होने वालों में सबसे ज्यादा मिलेनियल जेनरेशन यानी 27 से 37 साल के लोग हैं। एफआईएस की पांचवीं एनुअल पेस (PACE) रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने वालों में 96% से ज्यादा लोगों ने पिछले वर्षों में पेमेंट्स के लिए मोबाइल एप्स का इस्तेमाल बढ़ा दिया था। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2016 से अब तक ऑनलाइन पेमेंट फ्रॉड्स में 6 गुना तक वृद्धि दर्ज हुई है। इसमें फ्रॉड के 46 फीसदी से ज्यादा मामले बैंकिंग में, 21 फीसदी मोबाइल फोन्स के जरिए, 18 फीसदी ईमेल आईडी हैंकिंग से और 12 फीसदी आईवीआर कॉल्स के जरिए अंजाम दिए गए हैं।

पेमेंट ऐप कोई भी हो, ये सावधानियां जरूर बरतें

पासवर्ड्स और पिन शेयर न करें

यह सभी जानते हैं कि पासवर्ड शेयर नहीं करना चाहिए लेकिन कई बार हम इन्हें याद रखने के लिए किसी कागज के टुकड़े पर लिखकर रख लेते हैं या किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ इसे कई लोगों के बीच शेयर करते हैं। ऐसा न करें। पासवर्ड याद रखने के लिए आप सिक्योर ब्राउजर्स या डिवाइस पर पासवर्ड सेवर का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

पब्लिक वाई-फाई पर पेमेंट न करें

प्राइवेट नेटवर्क की तुलना में पब्लिक वाई-फाई पर सुरक्षा उपाय कम होते हैं, जिसके कारण हैकर्स इन्हें इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को अपना निशाना बनाते हैं। ऐसे में ध्यान रखें कि आप अपने मोबाइल फोन नेटवर्क के जरिए ही इंटरनेट बैंकिंग करें। अगर पब्लिक वाई-फाई से ऑनलाइन लेन-देन करना ही पड़े, तो उसके तुरंत बाद पासवर्ड बदल दें। 

अपने ट्रांजैक्शंस का ट्रैक रखें

बार-बार ऑनलाइन पेमेंट करते हैं तो उनका ट्रैक रखना आसान नहीं होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपीआई में मर्चेंट्स को कस्टमर्स को कलेक्ट रिक्वेस्ट भेजने की सुविधा मिलती है। यहां अगर आपको ऐसी कोई रिक्वेस्ट दिखाई दे जिसके लिए आपने कुछ खरीदा ही न हो या भेजने वाला परिचित न हो तो उसे कैंसिल कर दें। 

लेटेस्ट सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर

इंटरनेट पर रोज नए मैलवेयर, स्पैमवेयर या स्पाइवेयर आ सकते हैं। अगर आपके पीसी या फोन में फायरवॉल या एंटीवायरस ऐप नहीं हैं, तो इनके लेटेस्ट वर्जन खरीदकर इंस्टॉल करें। एंटीवायरस को ऑटो अपडेट पर रखें। एड-ब्लॉकिंग सॉफ्टवेयर और स्पाइवेयर डिटेक्शन प्रोग्राम को इस्तेमाल करने से भी ऑनलाइन फ्रॉड से बच सकते हैं। 

देखें कस्टमर केयर नंबर सही हो

अपने डिजिटल पेमेंट से जुड़ी किसी समस्या के लिए अगर आपको कस्टमर केयर को कॉन्टैक्ट करना पड़े तो इस बात का खास ध्यान रखें कि आप जिस नंबर पर कॉल लगा रहे हों वह आपके पेमेंट ऐप के ऑफिशियल सोशल मीडिया चैनल या वेबसाइट से ही लिया गया हो। कहीं और से लिया गया नंबर फेक हो सकता है। 

पेमेंट के बाद लॉग आउट कर दें

ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के दौरान पेमेंट फ्रॉड का शिकार होने से बचने के लिए ध्यान रखें कि पेमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हमेशा अपने बैंक, क्रेडिट-डेबिट कार्ड और मर्चेंट साइट्स को लॉग आउट करें। इतना ही नहीं अपने कम्प्यूटर पर किसी भी तरह के फाइनेंशियल पासवर्ड्स कभी सेव न करें। 

27 से 37 की उम्र वाले सबसे ज्यादा शिकार क्यों?

मिलेनियल्स के बीच मोबाइल पेमेंट्स के प्रति रुचि बढ़ती जा रही है क्योंकि ये तरीका उन्हें ज्यादा यूजर-फ्रेंडली अनुभव देता है। वे अब ऑनलाइन पेमेंट्स के मामले में सबसे बड़ी ऑडियंस होने के अलावा रोजाना डिजिटल लेन-देन करते हैं। लेकिन, इसी उत्साह में ये ऑनलाइन ब्राउजिंग के दौरान अनजाने में कोई अनसिक्योर्ड वेबसाइट खोल देते हैं, जो इनकी सेंसिटिव इंफो चुरा सकती है। 

सबसे कॉमन फ्रॉड्स

भारत में सबसे ज्यादा ऑनलाइन फ्रॉड्स होते हैं फिशिंग और पेजजैकिंग के जरिए।

फिशिंग : फिशिंग एक साइबर क्राइम है जिसमें कस्टमर्स की सेंसिटिव इंफॉर्मेशन (बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड डिटेल्स और पासवर्ड से संबंधित) हासिल करने के लिए टार्गेट को किसी वैध संस्थान या बैंक की ओर से असली लगने वाले ईमेल, फोन या टेक्स्ट मैसेज के जरिए संपर्क किया जाता है। ये अटैकर्स कस्टमर्स के कम्प्यूटर के डिफेंस को तोड़ने की कोशिश के बजाए फिशिंग ईमेल या मैसेज पर कोई मैलिशियस लिंक देकर या अटैचमेंट डिस्ट्रीब्यूट करके उन्हें आसानी से फंसा सकते हैं। 

पेजजैकिंग : इसके जरिए हैकर्स ऑनलाइन स्टोर्स या रेप्यूटेड वेबसाइट्स के लोकप्रिय पेजेज में मौजूद कंटेंट का कुछ हिस्सा (एक्चुअल एचटीएमल कोड शामिल) कॉपी या हाइजैक करके उसे री-रूट करते हुए विजिटर्स को किसी अलग वेबसाइट पर ले जाते हैं, जिसमें उस कंटेंट को आमतौर से सोर्स कोड जैसा पेश किया जाता है।