धर्म / 22 करोड़ की लागत से तैयार हुई गणपति की अनूठी प्रतिमाएँ

Zoom News : Nov 08, 2019, 03:20 PM

जयपुर | किसी भी देवी-देवता के स्वरूप को समझ कर उस स्वरूप के अनुरूप ही देवता की आराधना की जाए तो शीघ्र ही मनोवांछित इच्छा की पूर्ति होती है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए देश की सुप्रसिद्ध ज्योतिषी, वैदिक देव एवं  मन्दिर स्थापति हिमानी 'अज्ञानी' ने गणपति की इन प्रतिमाओ का निर्माण  है। 7 नवंबर को आयोजित एसटेक 2019 (Acetech 2019) शो के आयोजन में बहुमूल्य रत्नों से निर्मित गणपति के पांच विभिन्न रूपो का प्रदर्शन किया गया। 22 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुई, 7 गुणा 7 फीट की ये अद्भुत कलाकृति पूरी तरह से शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार तैयार की गई है। इस कलाकृति को हिमानी 'अज्ञानी' के दिशा-निर्देश में तैयार किया गया। प्रतिमा का निर्माण ज्वेलक्राफ्ट्ज के द्वारा किया गया, इसमे धातु का काम ब्रिटिश डिज़ाइनर साइमन औऱ थॉमस ब्लैकमोर के द्वारा किया गया है। 

प्रतिमा में गणपति को कुंडलिनी शक्ति के जागरण के प्रतीक रूप में दर्शाया गया है। गणपति स्फटिक से बने शक्ति स्तंभ पर विराजित है। स्फटिक को नकारात्मक शक्ति दूर करने वाला माना जाता है, ऐसे में यह शक्ति स्तंभ कुंडलनी शक्ति को दर्शाता है जो चतुष्पद कमलदल में बंद तथा छिपी हुई रहती है। स्फटिक जहां एक ओर दैवीय शक्तियों को जागृत करता है वहीं यह शरीर के चक्रों को संतुलित कर व्यक्ति की आध्यात्मिक, मानसिक व शारीरिक मजबूती को बढ़ा कर सुखी, स्वस्थ जीवन जीने की राह बनाता है। 

चमकीला गहरा हरा जेड (Green Jade) स्टोन प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर व्यक्ति की भावनाओं का संतुलन स्थापित कर उसे भावनात्मक मजबूती भी देता है।

गणेश सिंधु

ज्वेल्क्राफ्टज के साथ मिलकर हिमानी 'अज्ञानी' ने गणेश के 108 अनूठे स्वरूपों की स्थापना का निर्णय लिया है। पूरे विश्व में यह अपनी तरह का पहला अनूठा प्रयास होगा। शो में इसी श्रृंखला की पांच गणपति प्रतिमाओं को दर्शाया जाएगा। मध्य में चतुर्भुज भक्ति विघ्नेश्वर है जिनके हाथों में शंकु, दांत, पाश तथा मिश्री हैं। इसके साथ ही वीर विघ्नेश, महागणपति, हेराम्बगणपति तथा भुवनेश गणपति की प्रतिमाओं को भी दर्शाया गया है।