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तालिबान का दावा: पाकिस्तान ने कंधार में निजी एयरलाइन का ईंधन डिपो उड़ाया

तालिबान का दावा: पाकिस्तान ने कंधार में निजी एयरलाइन का ईंधन डिपो उड़ाया
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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमावर्ती तनाव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। तालिबान प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी वायुसेना ने कंधार हवाई अड्डे के पास स्थित एक निजी एयरलाइन के ईंधन डिपो को निशाना बनाया है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार, यह हमला 'काम एयर' (Kam Air) के बुनियादी ढांचे पर किया गया है। मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह डिपो न केवल घरेलू उड़ानों के लिए बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के विमानों के संचालन के लिए भी ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करता था।

कंधार हवाई अड्डे के पास ईंधन डिपो पर हमला

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के आधिकारिक बयान के अनुसार, पाकिस्तानी वायुसेना की इस कार्रवाई ने नागरिक उड्डयन के बुनियादी ढांचे को गंभीर क्षति पहुंचाई है। काम एयर अफगानिस्तान की एक प्रमुख निजी एयरलाइन है, जो अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर अपनी सेवाएं देती है। मुजाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पहले भी अफगान व्यापारियों की संपत्तियों को निशाना बनाया है, जिसमें राष्ट्रीय व्यापारी हाजी खान जदाह के ईंधन भंडार पर हुआ पिछला हमला शामिल है। इस हमले को अफगानिस्तान की आर्थिक और रसद व्यवस्था को बाधित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

खोस्त प्रांत में गोलाबारी और नागरिक हताहत

ईंधन डिपो पर हमले के साथ-साथ, डूरंड रेखा के पास स्थित खोस्त प्रांत के अलीशेर-तेरेजाई क्षेत्र में भारी गोलाबारी की खबरें आई हैं। स्थानीय रिपोर्टों और अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना द्वारा दागे गए तोपों के गोलों ने रिहायशी इलाकों को प्रभावित किया है और इस गोलाबारी में एक ही परिवार के 4 सदस्यों की मृत्यु हो गई है, जबकि 3 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। फरवरी के महीने से ही डूरंड रेखा के आसपास सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी गई है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के बीच भय का माहौल बना हुआ है।

पाकिस्तान का 'खुली जंग' का बयान और आरोप

सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने वर्तमान स्थिति को 'खुली जंग' करार दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का आरोप है कि तालिबान प्रशासन प्रतिबंधित आतंकी समूहों, विशेष रूप से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), को अफगान धरती पर सुरक्षित पनाहगाह प्रदान कर रहा है और पाकिस्तान का दावा है कि इन समूहों का उपयोग पाकिस्तान के भीतर उग्रवाद और अस्थिरता फैलाने के लिए किया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए सीमा पार कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

डूरंड रेखा पर सैन्य संघर्ष और हताहतों की संख्या

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए कहा है कि 26 फरवरी को डूरंड रेखा पर हुई झड़पों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 27 फरवरी को भी पाकिस्तान ने काबुल सहित अफगानिस्तान के कई प्रमुख शहरों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे। दोनों देशों के बीच 2,600 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा को लेकर पुराना विवाद है, जिसे तालिबान प्रशासन ने कभी भी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं दी है।

टीटीपी और क्षेत्रीय सुरक्षा का संकट

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का मुख्य केंद्र तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की गतिविधियां हैं। टीटीपी का गठन 2007 में हुआ था और यह संगठन पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करने के उद्देश्य से हिंसक गतिविधियों में संलिप्त रहा है। हाल के महीनों में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में आतंकी हमलों में भारी वृद्धि हुई है और पाकिस्तान का मानना है कि अफगान तालिबान और टीटीपी के बीच गहरे वैचारिक संबंध हैं, जिसके कारण अफगानिस्तान इन समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने में अनिच्छुक है। इसके साथ ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की बढ़ती सक्रियता ने भी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है।

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