Adani Group: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अडानी ग्रुप के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। मार्केट रेगुलेटर ने गौतम अडानी और उनकी कंपनियों को इस मामले में पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी है। सेबी के 350 पन्नों के विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, या समूह की अन्य कंपनियों द्वारा धोखाधड़ी, बाजार में हेरफेर, या अंदरूनी व्यापार का कोई सबूत नहीं मिला। आदेश में कहा गया कि जांच किए गए सभी लेन-देन उस समय लागू कानूनों के अनुरूप थे और उन्हें धोखाधड़ी या अनुचित व्यापार व्यवहार निषेध नियमों के उल्लंघन के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद शुक्रवार, 19 सितंबर 2025 को अडानी समूह के शेयरों में तगड़ी तेजी देखी गई।
हिंडनबर्ग के आरोप आधारहीन: गौतम अडानी
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने सेबी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए सारे आरोप पूरी तरह से आधारहीन थे। विस्तृत जांच के बाद सेबी ने हमारी बात की पुष्टि की है कि ये दावे निराधार थे। ट्रांसपैरेंसी और ईमानदारी हमेशा से अडानी ग्रुप की पहचान रही है।" उन्होंने निवेशकों के नुकसान पर दुख जताते हुए कहा, "हम उन निवेशकों का दर्द गहराई से महसूस करते हैं जिन्होंने इस गलत इरादे वाली और धोखाधड़ीपूर्ण रिपोर्ट के कारण अपने पैसे गंवाए।"
महुआ मोइत्रा का तंज और सीएफओ का जवाब
सेबी के इस फैसले पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए पोस्ट किया, "वाउ! सेबी इंडिया ने अडानी ग्रुप को क्लीन चिट दे दी है। विश्वास नहीं हो रहा है। इसकी उम्मीद कभी नहीं थी। क्या यह वास्तव में हो गया है?" उनकी इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। जवाब में अडानी ग्रुप के सीएफओ जुगेशिंदर रॉबी सिंह ने मजाकिया अंदाज में रिप्लाई किया, "माननीय सांसद महोदया को पूजा फेस्टिवल की हार्दिक शुभकामनाएं।" सीएफओ की यह पोस्ट भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, और इस नोकझोंक ने चर्चा को और हवा दे दी।
बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया
सेबी के फैसले के बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय उछाल देखा गया। निवेशकों ने इस फैसले को सकारात्मक रूप से लिया, जिससे अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को भारी तेजी दर्ज की गई। यह फैसला न केवल अडानी समूह के लिए, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह नियामक की निष्पक्षता और पारदर्शिता को दर्शाता है।