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अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल, क्या शरद पवार फिर जोड़ेंगे कुनबा?

अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल, क्या शरद पवार फिर जोड़ेंगे कुनबा?
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के एक विमान दुर्घटना में आकस्मिक निधन ने न केवल पवार परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा को भी पूरी तरह बदल कर रख दिया है। इस दुखद घड़ी में जो सबसे बड़ा सवाल उभर कर सामने आ रहा है, वह यह है कि क्या शरद पवार अब अपनी बिखरी हुई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की कड़ियों को फिर से जोड़ पाएंगे?

पवार परिवार में बढ़ी भावनात्मक एकता

अजित पवार के निधन के बाद पूरा पवार परिवार एक बार फिर एक साथ खड़ा नजर आ रहा है। अंत्येष्टि के समय जो दृश्य देखने को मिले, उन्होंने महाराष्ट्र की जनता को भावुक कर दिया। सुप्रिया सुळे से लेकर शरद पवार तक, परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे को ढांढस बंधाते दिखे। राजनीतिक मतभेदों के कारण जो दूरियां पिछले साल आई थीं, वे इस व्यक्तिगत क्षति के सामने धुंधली पड़ती दिखाई दे रही हैं। कार्यकर्ताओं के बीच भी यह संदेश गया है कि संकट की इस घड़ी में परिवार और पार्टी का एक होना ही सबसे बड़ा विकल्प है।

एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की अटकलें

अजित पवार के जाने के बाद अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के विलय की चर्चाएं तेज हो गई हैं और राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि अजित पवार के नेतृत्व वाला गुट अब शरद पवार के मार्गदर्शन की ओर देख रहा है। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है और क्या वे शरद पवार के नेतृत्व को फिर से स्वीकार करेंगे? सूत्रों की मानें तो पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता चाहते हैं कि अब 'घड़ी' और 'तुतारी' का विवाद खत्म हो और एक मजबूत एनसीपी फिर से खड़ी हो।

जिला परिषद चुनाव और 'घड़ी' का सिंबल

दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार के निधन से पहले ही कुछ जिलों में दोनों गुटों के बीच तालमेल के संकेत मिलने लगे थे। जिला परिषद चुनाव, जो अब 7 फरवरी को होने वाले हैं, उसमें कई जगहों पर दोनों गुटों ने 'घड़ी' चुनाव चिन्ह का ही उपयोग करने का निर्णय लिया था। अब अजित पवार की अनुपस्थिति में चुनाव प्रचार की पूरी जिम्मेदारी शरद पवार और सुप्रिया सुळे के कंधों पर आ गई है। 9 फरवरी को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि जनता इस भावनात्मक बदलाव को किस तरह देख रही है।

नया उपमुख्यमंत्री कौन होगा?

महाराष्ट्र सरकार में अब उपमुख्यमंत्री का पद खाली है और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या अजित पवार की पत्नी और सांसद सुनेत्रा पवार को दिल्ली की राजनीति से वापस बुलाकर राज्य की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी? या फिर अजित पवार गुट के किसी अन्य कद्दावर नेता को यह पद मिलेगा? यदि दोनों गुटों का तुरंत विलय होता है, तो शरद पवार। की पसंद का कोई नया चेहरा भी सामने आ सकता है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट भी इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

शरद पवार के सामने 85 की उम्र में बड़ी चुनौती

85 वर्ष की आयु में शरद पवार एक बार फिर अपनी राजनीतिक पारी के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। एक तरफ भतीजे को खोने का व्यक्तिगत दुख है, तो दूसरी तरफ पार्टी के अस्तित्व को बचाने की चुनौती और 2023 में जो दरार पार्टी में आई थी, उसे भरने का यह सबसे संवेदनशील समय है। शरद पवार को न केवल अपने परिवार को संभालना है, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं को। भी दिशा देनी है जो अजित पवार के जाने से अनाथ महसूस कर रहे हैं। क्या 'चाणक्य' कहे जाने वाले शरद पवार एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी मास्टरस्ट्रोक खेलेंगे?

बीजेपी का रुख और भविष्य की राजनीति

अजित पवार महायुति गठबंधन का एक मजबूत हिस्सा थे। उनके जाने से गठबंधन के समीकरणों पर भी असर पड़ना तय है। दिल्ली में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस बात को लेकर सतर्क है कि एनसीपी का अगला कदम क्या होगा। यदि शरद पवार पूरी पार्टी को एकजुट कर लेते हैं, तो क्या वे महायुति के साथ बने रहेंगे या फिर महाविकास अघाड़ी को और मजबूत करेंगे? आने वाले कुछ दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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