अल्ताफ हुसैन की हत्या की साजिश: लंदन में एमक्यूएम संस्थापक के घर घुसे नकाबपोश हमलावर

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अल्ताफ हुसैन की हत्या की साजिश: लंदन में एमक्यूएम संस्थापक के घर घुसे नकाबपोश हमलावर
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लंदन से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है जहां मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) ने दावा किया है कि उसके संस्थापक अल्ताफ हुसैन के आवास पर हमले की कोशिश की गई है। संगठन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दो नकाबपोश व्यक्तियों ने अल्ताफ हुसैन के लंदन स्थित घर में जबरन घुसने का प्रयास किया और इस घटना को पार्टी ने एक सोची-समझी हत्या की साजिश करार दिया है। करीब तीन दशकों से लंदन में निर्वासित जीवन व्यतीत करने के बावजूद, अल्ताफ हुसैन का कराची की राजनीति पर आज भी गहरा प्रभाव माना जाता है और उनके समर्थक उन्हें मोहाजिर समुदाय का सबसे बड़ा नेता मानते हैं।

हमले की कोशिश और सीसीटीवी फुटेज का दावा

MQM की ओर से इस घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया गया है और इस फुटेज में कथित तौर पर दो नकाबपोश लोग घर की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद MQM नेता मुस्तफा अजीजाबादी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पूरे मामले की जानकारी साझा की। उन्होंने दावा किया कि ये हमलावर पूरी तरह से प्रशिक्षित लग रहे थे और यह अल्ताफ हुसैन की हत्या करने का एक गंभीर प्रयास हो सकता है। अजीजाबादी ने ब्रिटिश सरकार से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अल्ताफ हुसैन की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब अनिवार्य हो गया है और ब्रिटेन सरकार को उन्हें उचित सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए। पार्टी का कहना है कि इस घटना के दौरान अल्ताफ हुसैन को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।

अल्ताफ हुसैन का शुरुआती जीवन और शिक्षा

अल्ताफ हुसैन का जन्म और पालन-पोषण कराची के अजीजाबाद इलाके में हुआ था। उनके माता-पिता भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय भारत से विस्थापित होकर पाकिस्तान चले गए थे। अल्ताफ हुसैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद कराची यूनिवर्सिटी से फार्मेसी की पढ़ाई की। उन्होंने 1979 में बैचलर ऑफ फार्मेसी की डिग्री प्राप्त की थी। राजनीति के क्षेत्र में कदम रखने से पहले उन्होंने स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भी काम किया था, जहां उन्होंने अस्पतालों और दवा कंपनियों में अपनी सेवाएं दी थीं।

राजनीतिक संगठन की नींव और MQM का उदय

अल्ताफ हुसैन की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 11 जून 1978 को हुई थी, जब उन्होंने कराची यूनिवर्सिटी में ऑल पाकिस्तान मोहाजिर स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (APMSO) की स्थापना की। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य मोहाजिर छात्रों के राजनीतिक और शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा करना था और यही संगठन आगे चलकर MQM के गठन का आधार बना। इसके बाद 1984 में APMSO से मोहाजिर कौमी मूवमेंट (MQM) का उदय हुआ और अल्ताफ हुसैन इसके निर्विवाद नेता बनकर उभरे। पार्टी ने बहुत कम समय में कराची और हैदराबाद जैसे शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। 1988 के आम चुनावों में MQM शहरी सिंध की एक बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में सामने आई और बाद में उसने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार के साथ गठबंधन भी किया।

कराची की राजनीति और सैन्य अभियान

1980 और 1990 के दशक के दौरान कराची की राजनीति पर MQM का जबरदस्त नियंत्रण रहा। हालांकि, यह दौर शहर में जातीय और राजनीतिक हिंसा के लिए भी जाना जाता है। इस दौरान कई सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष की घटनाएं हुईं। MQM के शुरुआती दौर में पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया तंत्र के साथ उसके संबंधों को लेकर भी कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में सैन्य प्रतिष्ठान ने MQM को सिंध की अन्य राजनीतिक ताकतों को संतुलित करने के लिए एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया था, हालांकि MQM ने हमेशा इन दावों का खंडन किया है।

लंदन में निर्वासन और विवादित विरासत

दिसंबर 1991 में अपनी हत्या की एक कथित कोशिश के बाद अल्ताफ हुसैन पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन चले गए और वहां राजनीतिक शरण ले ली। उनके जाने के कुछ समय बाद ही, 19 जून 1992 को पाकिस्तान सरकार ने कराची में MQM के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। यह ऑपरेशन कराची के इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विवादास्पद घटना मानी जाती है। अल्ताफ हुसैन तब से लंदन में ही रह रहे हैं, लेकिन वे वहां से फोन और अन्य संचार माध्यमों के जरिए पाकिस्तान में अपनी पार्टी की गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं। उनके विरोधियों और पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन पर और उनकी पार्टी पर टारगेट किलिंग, जबरन वसूली और हिंसा फैलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। अल्ताफ हुसैन ने इन सभी आरोपों को हमेशा राजनीति से प्रेरित बताया है। अब लंदन में उनके घर पर हुई इस घुसपैठ की कोशिश ने एक बार फिर उनकी सुरक्षा और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।

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