आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की भारी किल्लत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुए संकट के कारण भारत में एलपीजी की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो देश में बड़े पैमाने पर आर्थिक और सामाजिक संकट पैदा हो सकता है। केजरीवाल के अनुसार, इस आपूर्ति बाधा के कारण देश भर में होटल, रेस्तरां और औद्योगिक इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं, जिससे लगभग 1 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और आयात पर निर्भरता
अरविंद केजरीवाल ने देश की एलपीजी खपत और आयात के आंकड़ों का हवाला देते हुए वर्तमान संकट की गंभीरता को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इस आयातित गैस का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के समुद्री मार्ग से होकर भारत पहुंचता है। केजरीवाल के अनुसार, वर्तमान में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह मार्ग भारत के लिए लगभग बंद हो गया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने केवल अपने मित्र देशों, जैसे रूस और चीन के जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति दी है। इस स्थिति के परिणामस्वरूप, भारत में एलपीजी की कुल आपूर्ति में 50-55 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
होटल और रेस्तरां क्षेत्र पर गहराता संकट
केजरीवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने आपूर्ति की कमी को देखते हुए रेस्तरां और होटलों को एलपीजी की व्यावसायिक आपूर्ति सीमित या बंद कर दी है। सुरक्षा नियमों के कारण इन प्रतिष्ठानों को भारी मात्रा में गैस स्टॉक करने की अनुमति नहीं होती है, जिससे वे दैनिक आपूर्ति पर निर्भर रहते हैं। केजरीवाल ने आंकड़ों के साथ बताया कि मुंबई में लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्तरां पहले ही बंद हो चुके हैं और अगले 48 घंटों में यह संख्या 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। तमिलनाडु में लगभग 10,000 होटल बंद होने की कगार पर हैं। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों से भी इसी तरह की खबरें आ रही हैं, जहां ईंधन की कमी के कारण रसोई का संचालन करना असंभव होता जा रहा है।
औद्योगिक इकाइयों और मोरबी टाइल उद्योग की स्थिति
गैस संकट का असर केवल सेवा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि विनिर्माण क्षेत्र भी इसकी चपेट में है। केजरीवाल ने गुजरात के मोरबी का उदाहरण दिया, जिसे देश की टाइल इंडस्ट्री की राजधानी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि मोरबी में स्थित 600 से अधिक औद्योगिक इकाइयों में से 170 इकाइयां गैस की कमी के कारण बंद हो चुकी हैं। इस तालाबंदी के कारण अकेले मोरबी में ही लगभग 1 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं। केजरीवाल ने आशंका जताई कि यदि यह स्थिति पूरे देश में जारी रही, तो विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले लगभग 1 करोड़ लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ सकता है। छत्तीसगढ़, हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल के औद्योगिक क्षेत्रों में भी उत्पादन ठप होने की खबरें मिल रही हैं।
शादियों के सीजन और घरेलू आपूर्ति पर प्रभाव
वर्तमान में देश में शादियों का सीजन चल रहा है, और केजरीवाल ने इस ओर भी ध्यान आकर्षित किया कि एलपीजी की कमी के कारण हजारों शादियां टलने की नौबत आ सकती है। उन्होंने कहा कि कैटरिंग सेवाओं के लिए गैस उपलब्ध न होने के कारण परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, बाजार में एलपीजी की कालाबाजारी की खबरें भी सामने आ रही हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि आपूर्ति में कमी का फायदा उठाकर कुछ तत्व ऊंचे दामों पर सिलेंडर बेच रहे हैं। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही है, लेकिन केजरीवाल का दावा है कि व्यावसायिक आपूर्ति में कटौती ने पूरी अर्थव्यवस्था की श्रृंखला को प्रभावित कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव और कूटनीतिक चुनौतियां
केजरीवाल ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने इस रणनीतिक जलमार्ग को युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है। केजरीवाल के अनुसार, भारत के लिए इस मार्ग का बंद होना एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस मामले में तुरंत सक्रिय हो और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों या कूटनीतिक समाधानों के माध्यम से एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल ईंधन की कमी का मामला नहीं है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और करोड़ों लोगों के रोजगार से जुड़ा एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा है।