समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को बहुचर्चित दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों की जमानत मंजूर करते हुए उनकी सजा को निलंबित कर दिया है। हालांकि, न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने साफ कर दिया है कि इस मामले में दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाएगी। इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनी गईं और अदालत ने 15 अक्टूबर को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।
ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा किए जाने की मांग की थी। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल बेंच ने सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने याचिका के एक हिस्से यानी सजा निलंबन और जमानत की मांग को स्वीकार कर लिया, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान को 17 नवंबर 2025 के दिन सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी। सजा का ऐलान होते ही उसी दिन दोनों को हिरासत में ले लिया गया था और उन्हें रामपुर जिला जेल भेज दिया गया था। जेल में रहते हुए दोनों को करीब 11 महीने और 12 दिन यानी कुल 346 दिन बीत चुके हैं। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ दोनों ने सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन 20 अप्रैल 2026 के दिन सेशन कोर्ट ने उनकी अपील को खारिज कर दिया था और उनकी सजा को बरकरार रखा था। सेशन कोर्ट से राहत न मिलने के बाद दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था।
हाईकोर्ट से जमानत मिलने और सजा के निलंबित होने के बावजूद क्या आजम खान और अब्दुल्ला आजम जेल से बाहर आ सकेंगे, यह सवाल अभी भी बना हुआ है। कानूनी जानकारों और सामने आई जानकारी के अनुसार, दोनों की वास्तविक रिहाई अन्य लंबित मामलों की स्थिति पर पूरी तरह से निर्भर करेगी और सूत्रों के मुताबिक, दोनों के खिलाफ दो अन्य मामले भी अभी लंबित चल रहे हैं। यदि उन अन्य मामलों में पुलिस की ओर से बी-वारंट नहीं लिया गया है और रिहाई के रास्ते में कोई दूसरी कानूनी बाधा या अड़चन नहीं आती है, तभी दोनों जेल से बाहर आ सकेंगे।
यहाँ यह जानना भी प्रासंगिक है कि बी-वारंट क्या होता है। बी-वारंट अदालत द्वारा जारी किया जाने वाला एक ऐसा लिखित और आधिकारिक आदेश होता है, जो किसी ऐसे कैदी, मुलजिम या आरोपी को एक जेल से निकालकर दूसरी अदालत या जेल में पेश करने के लिए जारी किया जाता है, जो पहले से ही किसी अन्य मामले में किसी दूसरी जेल में बंद होता है। इस कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों की पेशी और मामलों का निस्तारण किया जाता है।
यह पूरा कानूनी विवाद मुख्य रूप से अब्दुल्ला आजम के पास दो पैन कार्ड होने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। मूल शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम के पास जो दो पैन कार्ड मौजूद हैं, उनमें अलग-अलग जन्मतिथियां दर्ज की गई थीं। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया था कि चुनावी नामांकन से जुड़े दस्तावेजों में दूसरे पैन कार्ड का आधिकारिक रूप से इस्तेमाल किया गया था। इस मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ यह लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ठीक एक दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ओर से जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियों को अटैच करने की बड़ी कार्रवाई की गई है। अटैच की गई इन तमाम संपत्तियों का कुल मूल्य 426 करोड़ रुपये और 46 पैसे आंका गया है, हालांकि मौजूदा दौर और बाजार की स्थिति के हिसाब से इनकी बाजार कीमत करीब 1170 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह पूरी सख्त कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ चल रही व्यापक जांच के एक हिस्से के रूप में की जा रही है। इन तमाम कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों के बीच हाईकोर्ट से मिली जमानत ने आजम खान परिवार को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन अन्य मामलों के लंबित रहने के कारण उनकी रिहाई पर संशय बरकरार है।