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अजरबैजान ने ईरान से भारतीयों को निकालने में की मदद, भारत ने जताया आभार

अजरबैजान ने ईरान से भारतीयों को निकालने में की मदद, भारत ने जताया आभार
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मध्य पूर्व में जारी युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत और अजरबैजान के संबंधों में एक नया मोड़ देखने को मिला है। अजरबैजान ने ईरान में फंसे 215 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अपना रास्ता प्रदान किया है। इस निकासी अभियान के सफल समापन के बाद भारत सरकार ने अजरबैजान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को 30 दिन से अधिक का समय हो चुका है और क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।

निकासी अभियान और कूटनीतिक आभार

बाकू में भारत के नवनियुक्त राजदूत अभय कुमार और अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बैरामोव के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान भारत ने आधिकारिक तौर पर अजरबैजान का धन्यवाद किया। बाकू स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अजरबैजान के अधिकारियों ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। राजदूत अभय कुमार ने व्यक्तिगत रूप से उन भारतीयों से मुलाकात की जो ईरान से अजरबैजान पहुंचे थे और उन्हें दूतावास की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

रूस और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी संख्या

आंकड़ों के अनुसार, ईरान से अपने नागरिकों को निकालने वाले देशों की सूची में अजरबैजान के रास्ते निकासी के मामले में भारत तीसरे स्थान पर रहा है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अब तक 215 भारतीयों को उनके क्षेत्र के माध्यम से सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस सूची में रूसी और चीनी नागरिकों की संख्या सबसे अधिक रही है और भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर कुमार ने भी इस अभियान में अजरबैजान सरकार के सहयोग की सराहना की है, जिसे युद्धग्रस्त क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मानवीय गलियारा माना जा रहा है।

ऐतिहासिक संदर्भ और ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव

भारत और अजरबैजान के बीच यह सहयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अतीत में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था, जिसके कारण भारत में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। उस समय भारतीय नागरिकों ने सोशल मीडिया पर अजरबैजान के बहिष्कार की मुहिम चलाई थी। अजरबैजान के पाकिस्तान समर्थक रुख के कारण दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में काफी समय तक ठंडापन बना रहा था, लेकिन वर्तमान निकासी अभियान ने व्यावहारिक सहयोग के नए द्वार खोले हैं।

पर्यटन और आर्थिक संबंधों पर असर

पिछले कुछ वर्षों में अजरबैजान भारतीय पर्यटकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरा था, लेकिन कूटनीतिक विवादों के बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों और यात्रा प्रतिबंधों के कारण अजरबैजान जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 56% की कमी दर्ज की गई थी। कई ट्रैवल पोर्टल्स ने बुकिंग रद्द होने और नई उड़ानों की मांग में कमी की पुष्टि की थी। हालांकि, वर्तमान मानवीय सहयोग के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक परामर्श का तंत्र असहमति के मुद्दों को सुलझाने में सहायक सिद्ध होगा।

मध्य पूर्व संकट पर साझा चिंता

अजरबैजान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि भारत और अजरबैजान के बीच हुई वार्ता में मध्य पूर्व के मौजूदा तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। दोनों पक्षों ने माना कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निरंतर संवाद आवश्यक है। अजरबैजान ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्रालयों के बीच राजनीतिक परामर्श का यह तंत्र न केवल सहयोग के क्षेत्रों को मजबूत करेगा, बल्कि उन मुद्दों पर भी चर्चा करने का मंच प्रदान करेगा जहां दोनों देशों के बीच मतभेद रहे हैं।

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