बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। यह वही समूह है जिसने बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ हुए तख्तापलट का नेतृत्व किया था। एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस आंदोलन को दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक साझा लड़ाई करार दिया है।
भारतीय युवाओं के प्रति एकजुटता का संदेश
एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए भारत के युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर जुटने का आह्वान किया था और इससे पहले दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में हजारों लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। नाहिद इस्लाम ने कहा कि भारत के युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, और उनकी यह मांग पूरी तरह से जायज है और उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनावी निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं के लिए पारदर्शी जवाब की जरूरत है, न कि बैरिकेड्स और सेंसरशिप की।
जुलाई 2024 की क्रांति और साझा संघर्ष
नाहिद इस्लाम ने अपने संदेश में बांग्लादेश की जुलाई 2024 की क्रांति का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे भर्ती कोटे के खिलाफ शुरू हुए छात्र आंदोलन ने 15 साल के शासन के खिलाफ एक देशव्यापी विद्रोह का रूप ले लिया था। उन्होंने उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, उस विद्रोह और उसे दबाने की कोशिशों के दौरान लगभग 1400 लोग मारे गए थे। नाहिद ने कहा कि वे उस समय भारतीय छात्रों, लेखकों और स्वतंत्र आवाजों द्वारा दिए गए समर्थन को गहराई से याद करते हैं। उन्होंने कहा कि ढाका से वे एक दोस्त के तौर पर भारतीय प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं क्योंकि दोनों देशों के संघर्ष आपस में जुड़े हुए हैं।
लोकतांत्रिक विरासत और महिलाओं का साहस
अपने संबोधन में नाहिद इस्लाम ने भारत की लोकतांत्रिक विरोध की परंपराओं की सराहना की। उन्होंने शाहीन बाग की महिलाओं का उदाहरण दिया जिन्होंने दिल्ली की कड़ाके की ठंड में समान नागरिकता के अधिकार की रक्षा की थी। इसके साथ ही उन्होंने जेएनयू और जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा जारी रखे गए संगठित विरोध को एक अमूल्य लोकतांत्रिक विरासत बताया। उन्होंने कहा कि आज वे एक बार फिर सड़कों पर युवा भारतीय महिलाओं का साहस देख रहे हैं, जो उन्हें बांग्लादेश की जुलाई क्रांति में महिलाओं की अग्रणी भूमिका की याद दिलाता है।
दक्षिण एशिया के भविष्य पर विचार
एनसीपी संयोजक ने स्पष्ट किया कि हिंदुत्ववादी बहुसंख्यकवाद, फासीवाद या किसी भी तरह की धार्मिक श्रेष्ठता को दक्षिण एशिया का भविष्य तय नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे भारत में भी तानाशाही, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक असहिष्णुता को उसी तरह खारिज करते हैं जैसे बांग्लादेश में करते हैं। उनके अनुसार, साझा भविष्य धर्म, जाति, लिंग या वर्ग से परे सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक न्याय पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार का सम्मान करें और हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करें।
क्षेत्रीय मुद्दे और सीजेपी की मांगें
नाहिद इस्लाम ने अपने बयान में सीमा पर होने वाली हत्याओं, पानी के बंटवारे, पर्यावरण की सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता जैसे अनसुलझे मुद्दों का भी जिक्र किया और उन्होंने कहा कि वे एक ऐसा दक्षिण एशिया चाहते हैं जहां देश एक-दूसरे को बराबरी का दर्जा दें। उन्होंने शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे युवा नेताओं का भी नाम लिया, जिन्हें बिना किसी मुकदमे के सालों से जेल में रखा गया है। दूसरी ओर, दिल्ली में सीजेपी का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर केंद्रित है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में अनियमितताएं बरती गई हैं। सीजेपी के आयोजकों ने रविवार 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक और सभा का आह्वान किया है।