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IND vs SA: घर पर ढहता 'अभेद्य किला': भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट प्रदर्शन में गिरावट

IND vs SA: घर पर ढहता 'अभेद्य किला': भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट प्रदर्शन में गिरावट
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भारतीय क्रिकेट टीम को एक बार फिर अपने घरेलू मैदान पर टेस्ट मैच में हार का सामना करना पड़ा है, जो टीम के लिए चिंता का विषय बन गया है। एक समय था जब भारत में टेस्ट मैच जीतना किसी भी विरोधी टीम के लिए लगभग असंभव माना जाता था, और भारतीय टीम अपने घर पर एक अभेद्य किले की तरह थी। लेकिन अब यह स्थिति बदलती हुई दिख रही है, और यह किला धीरे-धीरे ढहता हुआ प्रतीत हो रहा है और साउथ अफ्रीका के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज में अभी एक और मैच बाकी है, लेकिन टीम इंडिया अब इस सीरीज को जीत नहीं पाएगी, भले ही वह आखिरी मैच जीत भी ले। यह लगातार दूसरा मौका है जब भारतीय टीम को अपने घर में टेस्ट सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है, जो भारतीय क्रिकेट के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है।

पिछले दो सालों का निराशाजनक प्रदर्शन

पिछले करीब दो सालों में भारतीय टेस्ट टीम का जो प्रदर्शन रहा है, वह चौंकाने वाला है। आंकड़ों के अनुसार, टीम ने इन दो सालों में उतने ही टेस्ट मैच अपने घर पर गंवाए हैं, जितने उसने पिछले 12 सालों (2011 से 2023 तक) में हारे थे और यह एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि एक दशक से भी अधिक समय तक भारतीय टीम अपने घरेलू मैदान पर हावी रही थी। उस दौर में, भारतीय टीम की कमान एमएस धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों। के हाथों में थी, जिन्होंने घरेलू परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठाया और टीम को लगातार जीत दिलाई। लेकिन अब परिस्थितियां काफी बदल गई हैं, और टीम को। अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है।

न्यूजीलैंड के खिलाफ भी हुआ था सूपड़ा साफ

यह कोई पहली बार नहीं है जब भारतीय टीम को अपने। घर में इस तरह की हार का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले, पिछले साल लगभग इसी समय, भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने। घर में खेली गई तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में करारी हार मिली थी। उस सीरीज में टीम इंडिया तीनों के तीनों मैच हार गई। थी, जिससे घरेलू मैदान पर उसकी बादशाहत पर सवाल उठने लगे थे। हालांकि, जब हाल ही में वेस्टइंडीज की टीम भारत के दौरे पर आई थी, तो भारतीय टीम ने दो मैच जीतकर सीरीज अपने नाम की थी, जिससे कुछ हद तक आत्मविश्वास लौटा था। लेकिन साउथ अफ्रीका जैसी मजबूत टीम से पाला पड़ते ही, टीम की कमजोरियां एक बार फिर खुलकर सामने आ गई हैं, और यह साबित हो गया है कि अभी भी कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

आंकड़ों की जुबानी: घरेलू मैदान पर टेस्ट रिकॉर्ड

आंकड़े भारतीय टीम के घरेलू प्रदर्शन में आए बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। साल 2011 से लेकर 2023 तक, भारतीय टीम ने अपने घर पर कुल 41 टेस्ट मैच जीते थे और उसे केवल 5 मैचों में ही हार का सामना करना पड़ा था। इस दौरान 9 मैच ड्रॉ रहे थे, जो भारतीय टीम के घरेलू मैदान पर दबदबे को दर्शाता है। लेकिन साल 2024 से लेकर अब तक, यानी पिछले लगभग दो सालों में, भारत ने अपने घर पर 8 टेस्ट मैच जीते हैं और चौंकाने वाली बात यह है कि उसे 5 मैचों में हार मिली है। यह आंकड़ा बताता है कि जितने टेस्ट भारत ने 2011 से 2023 तक 12 सालों में हारे थे, उतने ही टेस्ट वह दो साल खत्म होने से पहले ही हार चुकी है और इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि टीम इंडिया अब हारते हुए मैचों को ड्रॉ कराने की स्थिति में भी नहीं आ पा रही है, जो पहले उसकी एक बड़ी ताकत हुआ करती थी। इस साल का आखिरी टेस्ट टीम इंडिया साउथ अफ्रीका के खिलाफ ही खेलती हुई नजर। आएगी, और यह देखना होगा कि टीम इस निराशाजनक सिलसिले को तोड़ पाती है या नहीं।

घरेलू मैदान पर लगातार मिल रही इन हारों की एक प्रमुख वजह भारतीय बल्लेबाजों का स्पिन गेंदबाजी को ठीक से न खेल पाना बताया जा रहा है और भारत में जब भी टीम इंडिया खेलती है, तो पारंपरिक रूप से स्पिन-फ्रेंडली पिचें तैयार की जाती हैं, जो भारतीय स्पिनरों को फायदा पहुंचाती हैं और विरोधी टीमों के लिए मुश्किलें खड़ी करती हैं। हालांकि, जो नए और युवा खिलाड़ी टीम में आए हैं, वे इन स्पिन पिचों पर संघर्ष। करते हुए दिख रहे हैं और स्पिन गेंदबाजी को प्रभावी ढंग से खेल नहीं पा रहे हैं। यानी जो स्पिन गेंदबाजी कभी हमारी सबसे बड़ी दोस्त और जीत की कुंजी हुआ करती थी, वही अब भारतीय बल्लेबाजों के लिए एक दुश्मन बन गई है। यह एक विरोधाभासी स्थिति है, जहां घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाने की बजाय, टीम अपनी ही बनाई पिचों पर संघर्ष कर रही है।

आगे की राह और संभावित समाधान

इस हार के सिलसिले को तोड़ने के लिए टीम इंडिया को गंभीर कदम उठाने होंगे और इसके दो मुख्य समाधान सुझाए जा रहे हैं: या तो टीम प्रबंधन को बल्लेबाजी के अनुकूल (बैटिंग विकेट) पिचें तैयार करनी होंगी, जिससे बल्लेबाजों को स्पिन के खिलाफ कम संघर्ष करना पड़े और वे खुलकर खेल सकें; या फिर भारतीय खिलाड़ियों को स्पिन गेंदबाजी को बेहतर तरीके से खेलना सीखना होगा। यह एक दीर्घकालिक समाधान होगा जिसके लिए खिलाड़ियों को अपनी तकनीक और मानसिक दृढ़ता पर काम करना होगा। अब दूसरे मैच में गुवाहाटी में कैसी पिच होगी, यह देखना दिलचस्प होगा, साथ ही टीम इंडिया की बल्लेबाजी कैसी रहती है, इस पर भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी और टीम को अपनी रणनीति में बदलाव लाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि घरेलू मैदान पर उसका 'अभेद्य किला' फिर से मजबूत हो सके।

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