बिहार पुलिस मुख्यालय ने सिवान जिले में हुई पुलिस फायरिंग की घटना को लेकर एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, 25 जुलाई को हुए प्रदर्शन और उसके बाद हुई हिंसक घटनाओं के मद्देनजर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। पुलिस मुख्यालय ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और फायरिंग की घटना में शामिल पुलिसकर्मी पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का पूरा विवरण साझा किया है ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति पर पारदर्शिता बनी रहे।
बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां और कानूनी प्रक्रिया
राज्यभर में हुए प्रदर्शनों और हिंसा के बाद, बिहार पुलिस ने जानकारी दी है कि कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी निर्दोष को सजा न मिले। पुलिस के अनुसार, इन 694 लोगों में से 339 लोग नाबालिग और छात्र पाए गए। सत्यापन के बाद इन 339 नाबालिगों और छात्रों को छोड़ दिया गया है। वहीं, हिंसक घटनाओं में सीधे तौर पर शामिल पाए गए 355 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है। यह कार्रवाई छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की गई है।
जेपी चौक पर फायरिंग की घटना का विवरण
सिवान के जेपी चौक पर हुई फायरिंग की घटना पर पुलिस ने स्थिति स्पष्ट की है। बिहार पुलिस ने बताया कि 25 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिला आसूचना इकाई (DIU) के एक सिपाही अभिषेक कुमार ने अपनी एके-47 राइफल से 4 राउंड हवाई फायरिंग की थी। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल को गोली न चलाने के सख्त निर्देश दिए गए थे और निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में सिपाही अभिषेक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन के साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है ताकि प्रोटोकॉल के उल्लंघन की जांच की जा सके।
घायलों की स्थिति और दर्ज प्राथमिकी
फायरिंग की घटना में घायलों को लेकर पुलिस ने दावा किया है कि मौके पर कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ था। हालांकि, बाद में 3 लोग अलग-अलग स्थानों पर गोली लगने से घायल पाए गए। पुलिस ने बताया कि इन 3 घायलों की स्थिति अब खतरे से बाहर है। इन तीनों घायलों के बयानों के आधार पर सिवान नगर थाने में अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन लोगों को गोली किन परिस्थितियों में लगी और क्या इसका सीधा संबंध जेपी चौक की घटना से है या प्रदर्शन के दौरान हुई अन्य घटनाओं से।
पुलिसकर्मियों को चोट और सरकारी संपत्ति का नुकसान
इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने में जुटे पुलिस बल को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है और बिहार पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, कुल 91 पुलिस अधिकारी और जवान इस हिंसा में घायल हुए हैं। घायलों में कई प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं जिनकी स्थिति गंभीर बताई गई है और इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को भी निशाना बनाया, जिसमें 14 सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हिंसा के दौरान 1 वाहन को आग के हवाले भी कर दिया गया था। पुलिस ने कहा है कि इन सभी मामलों में कानून के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है ताकि हिंसा और संपत्ति के नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिल सके।
सिवान एसपी का आधिकारिक बयान
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिवान के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पूरन कुमार झा ने अतिरिक्त जानकारी साझा की है। उन्होंने पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और घटना की आंतरिक जांच के बाद जिला आसूचना इकाई (DIU) के संबंधित आरक्षी को निलंबित कर दिया गया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस बल को स्पष्ट निर्देश थे कि वे बल प्रयोग के दौरान गोलीबारी न करें और उन्होंने कहा कि सिपाही के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है ताकि अनुशासनहीनता के कारणों का पता लगाया जा सके। एसपी ने यह भी दोहराया कि 3 घायल नागरिकों के मामले की जांच अलग से दर्ज एफआईआर के माध्यम से की जा रही है ताकि निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।