भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है और पार्टी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी की ओर से जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने दतिया उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी के नाम पर अपनी स्वीकृति दे दी है। इस घोषणा के साथ ही क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और तिवारी जल्द ही अपना नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। यह उपचुनाव राज्य की राजनीति में सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सीट राज्य के बड़े नेताओं के प्रभाव वाली रही है।
आशुतोष तिवारी का परिचय और राजनीतिक पृष्ठभूमि
आशुतोष तिवारी भारतीय जनता पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उनकी जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में काफी गहरी हैं। वह पूर्व में आरएसएस के संभागीय संगठन मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, जिससे उनकी सांगठनिक क्षमता और वैचारिक प्रतिबद्धता का पता चलता है। संगठन के कार्यों के साथ-साथ तिवारी को सरकारी कामकाज का भी अनुभव है, क्योंकि वह मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। लंबे समय से पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ के कारण ही बीजेपी नेतृत्व ने उन्हें इस महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए चुना है।
चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम और समय सीमा
भारत निर्वाचन आयोग ने दतिया विधानसभा की रिक्त सीट को भरने के लिए 6 जुलाई को आधिकारिक अधिसूचना जारी की थी। चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार, उम्मीदवारों के पास नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए 13 जुलाई तक का समय है। इसके बाद, नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और जो प्रत्याशी अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, वे 16 जुलाई तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे। दतिया में मतदान की तारीख 30 जुलाई निर्धारित की गई है। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक चलेगा, जिससे मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इस पूरी चुनावी प्रक्रिया का परिणाम 3 अगस्त को मतगणना के बाद घोषित किया जाएगा।
कांग्रेस की संभावित रणनीति और उम्मीदवार
बीजेपी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा किए जाने के बाद अब सबकी नजरें कांग्रेस पार्टी पर टिकी हैं। कांग्रेस ने अभी तक अपने आधिकारिक प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में अर्जुन भारती का नाम सबसे आगे चल रहा है। अर्जुन भारती, अयोग्य घोषित किए गए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के पुत्र हैं। यह उपचुनाव सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच एक बड़ी प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इस सीट को अपने पास बरकरार रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, जबकि बीजेपी इसे वापस जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
सीट खाली होने का कारण और कानूनी घटनाक्रम
दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद खाली हुई है। राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी पाए जाने के बाद राज्य विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी करके अवैध तरीके से ब्याज का भुगतान प्राप्त किया था। गौरतलब है कि 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने इसी सीट से मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री और कद्दावर बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था। इस बार के उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा को बीजेपी की ओर से सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पार्टी ने रणनीति बदलते हुए युवा चेहरे आशुतोष तिवारी पर अपना भरोसा जताया है।
इसी बीच, कानूनी मोर्चे पर भी राजेंद्र भारती को राहत नहीं मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। भारती ने 1998 से 2011 के दौरान बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में अपनी सजा पर रोक की मांग की थी ताकि उनकी अयोग्यता खत्म हो सके। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब राजेंद्र भारती के लिए चुनावी रास्ते बंद हो गए हैं, जिसके कारण कांग्रेस अब उनके बेटे अर्जुन भारती को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। अब 30 जुलाई को होने वाला मतदान ही यह तय करेगा कि दतिया की जनता किस पर अपना विश्वास जताती है।