भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में कार बीमा एक अनिवार्य कानूनी आवश्यकता है, लेकिन बीमा के प्रकार और उसके कवरेज को लेकर अक्सर वाहन स्वामियों में भ्रम की स्थिति रहती है। वर्तमान में 'जीरो डेप्रिसिएशन' (Zero Depreciation) बीमा, जिसे बोलचाल की भाषा में 'जीरो डेप' कहा जाता है, एक अत्यंत लोकप्रिय एड-ऑन कवर के रूप में उभरा है। बीमा विशेषज्ञों के अनुसार, यह कवर दुर्घटना की स्थिति में वाहन के पुर्जों के मूल्य में होने वाली कमी या घिसावट (डेप्रिसिएशन) को नजरअंदाज करते हुए पूर्ण क्लेम राशि प्रदान करने का वादा करता है। हालांकि, इस सुविधा के साथ कुछ वित्तीय बोझ और शर्तें भी जुड़ी होती हैं, जिनका विवरण समझना हर कार मालिक के लिए आवश्यक है।
जीरो डेप्रिसिएशन कवर की कार्यप्रणाली और परिभाषा
बीमा उद्योग के मानकों के अनुसार, एक सामान्य व्यापक (Comprehensive) बीमा पॉलिसी में कंपनी वाहन के पुर्जों की उम्र के हिसाब से उनकी कीमत घटाकर क्लेम का भुगतान करती है। उदाहरण के लिए, समय के साथ प्लास्टिक, रबर और फाइबर के पुर्जों की कीमत में 30% से 50% तक की गिरावट मानी जाती है। जीरो डेप्रिसिएशन कवर इसी कटौती को समाप्त कर देता है और यदि किसी दुर्घटना में कार का बंपर क्षतिग्रस्त होता है और उसकी नई कीमत ₹10,000 है, तो सामान्य बीमा में डेप्रिसिएशन काटकर केवल ₹5,000 से ₹6,000 मिल सकते हैं, जबकि जीरो डेप पॉलिसी में बीमा कंपनी पूरे ₹10,000 का भुगतान करती है। इसमें वाहन मालिक को केवल फाइलिंग चार्ज और अनिवार्य कटौती (Compulsory Deductible) का भुगतान करना होता है।
पॉलिसी के मुख्य लाभ और वित्तीय सुरक्षा
जीरो डेप्रिसिएशन कवर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह दुर्घटना के समय वाहन मालिक की जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को न्यूनतम कर देता है। महंगी और लग्जरी कारों के मामले में, जिनके पुर्जे अत्यंत महंगे होते हैं, यह कवर लाखों रुपये की बचत कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, यह पॉलिसी विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो नई कार खरीदते हैं, क्योंकि नई गाड़ी के पुर्जों की रिप्लेसमेंट लागत अधिक होती है। इसके अलावा, यह कवर रबर, नायलॉन, प्लास्टिक और फाइबरग्लास जैसे पुर्जों पर 100% कवरेज प्रदान करता है, जो सामान्य पॉलिसियों में बहुत कम कवर होते हैं।
प्रीमियम लागत और आयु सीमा संबंधी चुनौतियां
इस कवर की सुविधाओं के बदले बीमा कंपनियां अधिक प्रीमियम वसूलती हैं। आंकड़ों के अनुसार, जीरो डेप्रिसिएशन एड-ऑन जोड़ने से सामान्य बीमा प्रीमियम में लगभग 15% से 20% तक की वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, बीमा कंपनियों के नियमों के मुताबिक, यह कवर आमतौर पर केवल 5 साल तक की पुरानी कारों के लिए ही उपलब्ध होता है। कुछ चुनिंदा कंपनियां इसे 7 साल तक विस्तारित कर सकती हैं, लेकिन पुरानी कारों के लिए यह विकल्प उपलब्ध नहीं होता है। यदि कार की बाजार कीमत (IDV) काफी कम हो चुकी है, तो उच्च प्रीमियम देकर यह कवर लेना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं माना जाता है।
क्लेम की सीमाएं और महत्वपूर्ण अपवाद
जीरो डेप्रिसिएशन पॉलिसी का मतलब यह नहीं है कि हर प्रकार का नुकसान कवर होगा। बीमा कंपनियों के अनुसार, एक पॉलिसी वर्ष के दौरान क्लेम करने की संख्या सीमित हो सकती है। अधिकांश कंपनियां साल में केवल 2 बार ही जीरो डेप क्लेम की अनुमति देती हैं। इसके अलावा, कुछ विशिष्ट नुकसान इस कवर के दायरे से बाहर रहते हैं और उदाहरण के लिए, इंजन में पानी घुसने (Hydrostatic Lock) या तेल रिसाव के कारण होने वाली यांत्रिक खराबी इसमें शामिल नहीं होती है। सामान्य घिसावट (Wear and Tear), टायर और ट्यूब का नुकसान (जब तक कि वे दुर्घटना का हिस्सा न हों) और क्लच प्लेट जैसी उपभोग्य वस्तुओं (Consumables) के लिए अलग से एड-ऑन की आवश्यकता होती है।
किन वाहन स्वामियों के लिए यह विकल्प उपयुक्त है?
बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, जीरो डेप्रिसिएशन कवर उन लोगों के लिए अनिवार्य जैसा है जिन्होंने हाल ही में नई कार खरीदी है। पहली बार कार चलाने वाले लोग, जिनमें दुर्घटना की संभावना तुलनात्मक रूप से अधिक होती है, उनके लिए यह कवर वित्तीय सुरक्षा कवच का काम करता है। इसके अलावा, जो लोग घनी आबादी वाले क्षेत्रों या भारी ट्रैफिक में गाड़ी चलाते हैं, जहां छोटी-मोटी टक्करों का जोखिम बना रहता है, उन्हें इस कवर को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, यदि वाहन बहुत पुराना है या उसका उपयोग बहुत ही कम है, तो मानक व्यापक बीमा पॉलिसी पर्याप्त हो सकती है।