मोदी राज में तिरंगा लहराना पाप है: सौरव और रांका को जेल भेजने पर भड़के दिपके

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मोदी राज में तिरंगा लहराना पाप है: सौरव और रांका को जेल भेजने पर भड़के दिपके
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो प्रमुख नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इन दोनों नेताओं को अब तिहाड़ जेल में अपनी सजा काटनी होगी। वहीं, उनके साथी अजिंक्य शिंदे को कोर्ट ने पर्सनल बॉन्ड पर रिहा करने का फैसला सुनाया है। यह पूरी कार्रवाई मंगलवार को जंतर-मंतर पर हुए हंगामे और कानून के उल्लंघन के बाद की गई है।

जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?

मंगलवार की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे अपने समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे। उस समय वहां बीएनएसएस की धारा 163 लागू थी, जो किसी भी प्रकार के अनधिकृत जमावड़े पर रोक लगाती है। पुलिस की भारी बैरिकेडिंग के बावजूद ये कार्यकर्ता जबरदस्ती इलाके में घुस गए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन सभी को हिरासत में ले लिया और जाफरपुर कलां स्थित डिटेंशन सेंटर ले गई। देर रात सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे की हिरासत को प्रीवेंटिव अरेस्ट में बदल दिया गया और उन्हें मंदिर मार्ग थाने लाया गया।

कोर्ट में पुलिस की दलीलें

बुधवार सुबह इन तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने दलील दी कि महज 4 दिन पहले भी आशुतोष और सौरव दास को प्रीवेंटिव अरेस्ट किया गया था। उस समय उन्हें बेल बॉन्ड पर इस शर्त के साथ जमानत दी गई थी कि वे भविष्य में शांति भंग नहीं करेंगे। पुलिस ने कहा कि इन नेताओं ने एक बार फिर कानून तोड़ा है और भविष्य में भी ऐसा कर सकते हैं। पुलिस की इन दलीलों को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया।

अभिजीत दिपके का तीखा हमला

सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने इस सजा पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "अगर आपको इमरजेंसी लगानी है तो घोषित करें। जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने पर 5 दिन की जेल क्यों? क्या तिरंगा फहराना गलत है और ये लोग पुलिस के पीछे छिप रहे हैं। हमारे साथियों का क्या गुनाह था और " दिपके का यह बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।

रत्ना सिंह के गंभीर आरोप

सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "दिल्ली पुलिस ने आज जंतर-मंतर मामले में सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार किया है। उन पर बिना इजाजत घुसने, बॉन्ड का उल्लंघन करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोप हैं। उन्हें सुबह 3 बजे एक प्राइवेट वैन में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन लाया गया और देर रात तक उन्हें अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया।

एसआईआर (SIR) और प्रदर्शन का बैकग्राउंड

यह पूरा विवाद वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ था। सीजेपी और अन्य संगठन इसके खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। इसी बीच, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को विरोध प्रदर्शन के लिए तय किया गया और जंतर-मंतर को इस सूची से हटा दिया गया। सीजेपी ने इस फैसले की आलोचना की थी और कहा था कि प्रदर्शन की जगह बदलने से जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। मंगलवार को हुई गिरफ्तारी इसी पाबंदी वाले आदेश के उल्लंघन का परिणाम थी।

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