सीएम योगी को एक और चुनौती, अखिलेश के बाद अब चंद्रशेखर ने बिजनौर से दी ताल

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सीएम योगी को एक और चुनौती, अखिलेश के बाद अब चंद्रशेखर ने बिजनौर से दी ताल
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उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी का दौर बेहद तेज हो चुका है और राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग लगातार अपने चरम पर पहुंचती जा रही है और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ठीक बाद अब आजाद समाज पार्टी कांशीराम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनावी मैदान में उतरने की बड़ी चुनौती दे डाली है। चंद्रशेखर आजाद के इस ताजा और आक्रामक राजनीतिक पैंतरे से राज्य का सियासी पारा एक बार फिर से सातवें आसमान पर पहुंच गया है और सभी राजनीतिक दलों की निगाहें इस तीखे बयानबाजी पर टिक गई हैं।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने पहुंचे आजाद समाज पार्टी कांशीराम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने एक साथ तीन बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सीधे तौर पर राज्य सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा निशाना साधा। उनके इस दौरे और भाषण के दौरान कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने अपने संबोधन के जरिए अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और विरोधियों को खुली चुनौती देने के अंदाज को एक बार फिर से स्पष्ट कर दिया है।

बिजनौर की किसी भी सीट पर लड़ लें चुनाव

अमरोहा के हसनपुर की जनसभा को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधे और स्पष्ट शब्दों में चुनावी चुनौती देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री में वाकई दम है, तो वह बिजनौर जिले की कुल आठ विधानसभा सीटों में से किसी भी एक सीट पर उनके सामने चुनाव लड़कर मैदान में उतरकर दिखाएं और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बेहद आत्मविश्वास के साथ यह तक ऐलान कर दिया कि अगर वह इस मुकाबले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनाव हराकर वापस नहीं भेज पाए, तो वह हमेशा के लिए राजनीति करना पूरी तरह से छोड़ देंगे। उनका यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बहुत बड़ा सियासी भूचाल लेकर आया है और इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

अपने इस आक्रामक संबोधन के दौरान आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने जनता को याद दिलाते हुए कहा कि वह पहले भी पीछे हटने वालों में से नहीं रहे हैं और वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में पहुंचे थे। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री की अपनी विधानसभा सीट पर जाकर उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का साहस दिखाया था। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें उस विशेष चुनाव में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने चुनावी मैदान में डटकर खड़े होने का साहस दिखाया था और इस बार भी वह अपनी इस चुनौती पर पूरी तरह से कायम हैं।

चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर कड़े सवाल

केवल चुनावी चुनौती तक ही सीमित न रहते हुए, चंद्रशेखर आजाद ने देश की निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरा विपक्ष एकजुट होकर चुनाव आयोग के विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरा हुआ है और लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने देश के सामने एक बड़ा सवाल उठाया कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होने के बावजूद अब तक मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया है और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया है।

चंद्रशेखर आजाद ने अपनी जनसभा में यह भी दावा किया कि देश और प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा कराने का पूरा दम भी इस नीले पटके वाले में यानी कि उनमें और उनके समर्थकों में मौजूद है। उन्होंने इस बात का दावा करते हुए वहां मौजूद भारी भीड़ और आम जनता से अपील की कि वे इस लड़ाई में उनका साथ दें ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्षता को पूरी तरह से सुरक्षित बचाया जा सके। उनका यह बयान चुनाव आयोग और केंद्र तथा राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

रैलियों में भीड़ जुटाने को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप

अपने भाषण के अंतिम चरण में सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सत्ताधारी दल और बड़े नेताओं की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ के सच पर से पर्दा उठाने का प्रयास किया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन बड़े नेताओं और मुख्यमंत्रियों तथा प्रधानमंत्रियों की जनसभाओं और रैलियों में जो भारी भीड़ जुटाई जाती है, वह पूरी तरह से प्रायोजित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भीड़ को जुटाने के लिए या तो आम लोगों को पैसे बांटे जाते हैं और पैसे देकर उन्हें लाया जाता है, या फिर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए सरकारी कर्मचारियों पर भारी दबाव बनाया जाता है।

चंद्रशेखर आजाद ने विस्तार से बताते हुए दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी भोली-भाली महिलाओं को भी इन राजनीतिक जनसभाओं और रैलियों में जबरन पहुंचने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर ये महिलाएं या कर्मचारी इन रैलियों में नहीं पहुंचती हैं, तो उन पर अधिकारियों द्वारा कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। इस प्रकार चंद्रशेखर आजाद ने अमरोहा की इस जनसभा के माध्यम से एक साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनावी चुनौती देकर, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर और रैलियों की भीड़ पर गंभीर आरोप लगाकर सियासी गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति और अधिक गरमाने के पूरे आसार बन चुके हैं।

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