ITR फाइलिंग गाइड: रिफंड पाने के लिए इन 15 गलतियों से बचें, वरना आ सकता है नोटिस

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ITR फाइलिंग गाइड: रिफंड पाने के लिए इन 15 गलतियों से बचें, वरना आ सकता है नोटिस
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इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करना प्रत्येक करदाता के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, लेकिन इस प्रक्रिया में होने वाली छोटी सी चूक भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। यदि आप समय पर और सही तरीके से अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको आयकर विभाग से नोटिस, रिफंड मिलने में देरी, अतिरिक्त टैक्स का बोझ और भारी जुर्माने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई बार करदाता अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं जो बाद में उनके लिए कानूनी और वित्तीय मुश्किलें खड़ी कर देती हैं। आयकर विभाग अब तकनीक के मामले में बहुत उन्नत हो गया है, इसलिए हर जानकारी को सटीक रूप से भरना अनिवार्य है।

1. गलत कटौती (Deduction) या छूट (Exemption) का दावा करना

हाल के वर्षों में आयकर विभाग ने गलत कटौती या छूट के दावों के मामलों में नोटिस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके हर एक दावे की बारीकी से जांच करता है। गलत सेक्शन के तहत कटौती दिखाना, बिना किसी पुख्ता सबूत के छूट का दावा करना या रिटर्न में गलत जानकारी देना सीधे तौर पर विभाग के नोटिस को आमंत्रित करना है।

2. गलत ITR फॉर्म का चयन

रिटर्न भरते समय सही ITR फॉर्म का चुनाव करना अत्यंत आवश्यक है और उदाहरण के लिए, ITR-1 उन नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और जिन्हें कोई कैपिटल गेन नहीं हुआ है। वहीं, ITR-3 उन लोगों के लिए है जिनकी आय का स्रोत बिजनेस या प्रोफेशन है। यदि आप अपनी आय के स्रोत के अनुसार गलत फॉर्म चुनते हैं, तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को त्रुटिपूर्ण मानकर डिफेक्ट नोटिस भेज सकता है।

3. गलत असेसमेंट ईयर (AY) भरना

करदाताओं के बीच फाइनेंशियल ईयर (FY) और असेसमेंट ईयर (AY) को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सही असेसमेंट ईयर 2026-27 है। गलत असेसमेंट ईयर भरने से टैक्स संबंधी गणनाओं में परेशानी हो सकती है और विभाग आप पर जुर्माना भी लगा सकता है।

4. व्यक्तिगत जानकारी गलत भरना

रिटर्न भरते समय अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल, PAN और जन्मतिथि जैसी जानकारी PAN रिकॉर्ड के अनुसार ही भरें। यदि आप रिफंड प्राप्त करना चाहते हैं, तो बैंक खाता नंबर और IFSC कोड को बहुत सावधानी से दर्ज करें। इन जानकारियों में थोड़ी सी भी गलती होने पर आपका रिफंड बीच में ही अटक सकता है।

5. सभी आय के स्रोत न बताना

सिर्फ सैलरी की जानकारी देना ही काफी नहीं है, बल्कि आय के हर स्रोत का विवरण देना जरूरी है। इसमें सेविंग अकाउंट से मिलने वाला ब्याज, FD का ब्याज, किराए से होने वाली आय, डिविडेंड, कैपिटल गेन और अन्य कोई भी आय शामिल है। भले ही कोई आय टैक्स फ्री हो, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उसकी जानकारी देना अनिवार्य है।

6. जानकारी गलत फॉर्मेट में भरना

ITR फॉर्म में कुछ जानकारियां एक निश्चित फॉर्मेट में ही मांगी जाती हैं। उदाहरण के लिए, तारीख को हमेशा DD/MM/YYYY के फॉर्मेट में ही भरें। गलत फॉर्मेट में जानकारी भरने से रिटर्न प्रोसेसिंग के दौरान त्रुटि आ सकती है और आपका रिटर्न खारिज हो सकता है।

7. Form 26AS से मिलान नहीं करना

ITR भरने से पहले Form 26AS और Form 16 का मिलान जरूर करें। Form 26AS एक समेकित टैक्स स्टेटमेंट है जो आपके द्वारा चुकाए गए TDS की जानकारी देता है। अगर TDS की जानकारी 26AS में नहीं दिख रही है, तो आपको उसका टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा, जिससे आपकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है।

8. AIS और TIS की जांच न करना

एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में आपकी आय, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जानकारी होती है। ITR भरने से पहले इनका मिलान करना अब अनिवार्य हो गया है ताकि रिटर्न में कोई विसंगति न रहे।

9. दो कंपनियों से मिले Form 16 का सही इस्तेमाल न करना

अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है और आपको दो अलग-अलग कंपनियों से Form 16 मिला है, तो आपको दोनों कंपनियों से मिली सैलरी को जोड़कर ITR में दिखाना होगा। ऐसा न करने पर आय छिपाने का मामला बन सकता है।

10. HRA का दावा नहीं करना

अगर आपने अपनी कंपनी में किराए की रसीदें जमा नहीं की हैं, तब भी आप ITR भरते समय HRA छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए आपको मकान मालिक का PAN देना पड़ सकता है, विशेषकर तब जब किराए की राशि एक निश्चित सीमा से अधिक हो।

11. उपलब्ध टैक्स कटौतियों का फायदा नहीं उठाना

आयकर कानून के तहत कई तरह की टैक्स छूट और कटौतियां उपलब्ध हैं। सही जानकारी न होने के कारण कई लोग इनका लाभ नहीं ले पाते और अधिक टैक्स भर देते हैं। रिटर्न भरने से पहले सभी उपलब्ध कटौतियों का अध्ययन जरूर करें।

12. एडवांस टैक्स नहीं भरना

अगर आपकी टैक्स देनदारी एक निश्चित सीमा से अधिक है, तो आपको तय तारीखों पर एडवांस टैक्स जमा करना होता है और एडवांस टैक्स के भुगतान में देरी या कम भुगतान करने पर आपको 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज देना पड़ सकता है।

13. ITR का समय पर ई-वेरिफिकेशन नहीं करना

ITR दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। यह नेट बैंकिंग, आधार OTP या EVC के जरिए किया जा सकता है। यदि आप ई-वेरिफिकेशन नहीं करते हैं, तो आपका रिटर्न वैध नहीं माना जाएगा और ऐसी स्थिति में आपको ITR-V पर हस्ताक्षर करके उसे CPC भेजना होगा।

14. Schedule AL की जानकारी देना

यदि आपकी कुल आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है, तो आपके लिए Schedule AL भरना अनिवार्य है। इसमें आपको अपनी सभी संपत्तियों और उनसे जुड़ी देनदारियों का पूरा विवरण देना होता है।

15. विदेशी संपत्तियों की जानकारी छिपाना

यदि आप भारत के निवासी (Resident and Ordinarily Resident) हैं और आपके पास विदेश में कोई बैंक खाता, शेयर, म्यूचुअल फंड, ESOP या अन्य संपत्ति है, तो उसकी जानकारी Schedule FA में देना अनिवार्य है। चाहे उस संपत्ति पर भारत में टैक्स लगता हो या नहीं, उसका खुलासा करना कानूनी रूप से जरूरी है।

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