वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारतीय वायदा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल का भाव ₹10,888 प्रति बैरल के लाइफटाइम हाई पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों ने कीमतों को इस अभूतपूर्व स्तर पर धकेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी $116 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
भारतीय वायदा बाजार में कीमतों का विवरण
83% की भारी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह ₹10,888 प्रति बैरल के अपने अब तक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया। 82% की वृद्धि के साथ ₹9,485 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर देखी गई। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सुबह के सत्र में कारोबार ₹10,722 पर खुला था, लेकिन वैश्विक संकेतों के कारण इसमें निरंतर तेजी बनी रही। दोपहर के सत्र में कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन यह अपने उच्च स्तर के करीब ही बना रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की स्थिति
विदेशी बाजारों में भी कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है। 55 प्रति बैरल पर पहुंच गया। 40 प्रति बैरल दर्ज की गई। बाजार में यह एक दुर्लभ स्थिति है जहां अमेरिकी तेल (WTI) की कीमत खाड़ी देशों के ब्रेंट तेल के मुकाबले लगभग $4 प्रति बैरल अधिक बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताएं बनी रहेंगी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह दबाव जारी रह सकता है।
आपूर्ति बाधाएं और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल का एक मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी अनिश्चितता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल प्रवाह के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी एनालिस्ट कावेरी मोरे के अनुसार, ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों की धमकियों और तेहरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की चेतावनियों ने आपूर्ति में रुकावट के डर को बढ़ा दिया है। इस महत्वपूर्ण मार्ग से जुड़ी किसी भी घटना के प्रति बाजार अत्यधिक संवेदनशील हो गया है, जिससे कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
भू-राजनीतिक तनाव और कूटनीतिक प्रभाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका द्वारा ईरान को दी गई समय सीमा ने बाजार में तनाव को और गहरा कर दिया है। इंडसइंड सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक जिगर त्रिवेदी के अनुसार, WTI क्रूड जून 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। इजराइल द्वारा ईरान के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की खबरों और अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाने की चेतावनियों ने ऊर्जा उत्पादन में बड़ी रुकावट की आशंका पैदा कर दी है और इन घटनाक्रमों के कारण कूटनीतिक प्रयास फिलहाल प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं और निवेशक सुरक्षात्मक रुख अपना रहे हैं।
मुद्रा विनिमय और व्यापक आर्थिक कारक
भारत में कच्चे तेल की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का एक अन्य प्रमुख कारण डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना भी है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के 100 के स्तर से ऊपर मजबूत होने के कारण आयात महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर घरेलू तेल कीमतों पर पड़ रहा है। बढ़ती मुद्रास्फीति की उम्मीदों और वैश्विक आर्थिक चिंताओं ने ऊर्जा बाजार को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक जोखिम कम नहीं होते, तब तक ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रहेगा।