भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मौसम के मिजाज में बड़े बदलाव की घोषणा की है। मौसम विभाग के आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित 10 से अधिक राज्यों में 31 मार्च तक बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस मौसमी बदलाव से पिछले कुछ दिनों से बढ़ रही गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इस अवधि के दौरान न केवल मैदानी इलाकों में बारिश होगी, बल्कि हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना बनी हुई है।
उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-NCR में गुरुवार दोपहर से ही बादलों की आवाजाही शुरू हो गई है। पूर्वानुमान के मुताबिक, 31 मार्च तक दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में गरज, बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि यह मौसमी गतिविधि मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रही है, जो अरब सागर से नमी लेकर उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव के कारण दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे स्थानीय निवासियों को भीषण गर्मी से अस्थायी राहत मिलेगी।
हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और ओलावृष्टि का पूर्वानुमान
पहाड़ी राज्यों में मौसम की स्थिति अधिक गंभीर रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 27 मार्च से 31 मार्च के बीच व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। विशेष रूप से उत्तराखंड के पांच सीमांत जिलों—उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़—में हल्की से मध्यम बर्फबारी का अलर्ट जारी किया गया है और इन क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव सबसे अधिक रहने की उम्मीद है, जिससे ऊंचाई वाले इलाकों में सड़क यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है।
पूर्वोत्तर भारत में मौसम की बदलती स्थिति
उत्तर भारत के साथ-साथ पूर्वोत्तर के राज्यों में भी मौसम तेजी से करवट ले रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 27 से 29 मार्च के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा, 28 मार्च को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में गरज के साथ भारी वर्षा हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 26 और 27 मार्च को बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में नमी के उच्च स्तर और वायुमंडलीय अस्थिरता के कारण अचानक आने वाली आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।
दक्षिण भारत और तटीय क्षेत्रों में उमस का प्रभाव
एक ओर जहां उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का अलर्ट है, वहीं दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मौसम का अलग रूप देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, कोंकण, गोवा और केरल के कुछ इलाकों में 26 और 27 मार्च के दौरान मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। हालांकि, केरल के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है, लेकिन मुख्य रूप से तटीय क्षेत्रों में आर्द्रता का स्तर अधिक रहेगा, जिससे लोगों को असुविधा हो सकती है।
पश्चिमी विक्षोभ और वायुमंडलीय प्रणालियों का प्रभाव
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मार्च के अंत में होने वाला यह परिवर्तन कई क्रमिक पश्चिमी विक्षोभों (Western Disturbances) का परिणाम है। ये प्रणालियां भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न होती हैं और भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम हिस्से में प्रवेश करती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पिछले कुछ हफ्तों से उत्तर भारत के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की घटनाएं देखी गई हैं, जो इस मौसम में वायुमंडलीय अस्थिरता को दर्शाती हैं और आने वाले दिनों में पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में मौसम के अस्थिर रहने की संभावना है, जिससे कृषि और परिवहन क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ सकता है।