झारखंड की राजधानी रांची से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन खत्म करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। देवेंद्र नाथ महतो पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें रांची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अनशन खत्म करने की घोषणा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही वह अपनी भूख हड़ताल वापस ले रहे हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि हम पूरी तरह संतुष्ट हैं, क्योंकि व्यवस्था में सुधार की लड़ाई अभी लंबी है।
सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बातचीत
अपना अनशन तोड़ने से पहले देवेंद्र नाथ महतो ने मशहूर शिक्षा सुधारक और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल के माध्यम से विस्तार से बात की। इस बातचीत के दौरान देवेंद्र ने कहा, आपसे प्रेरणा और मार्गदर्शन पाकर ही हमने यह लड़ाई लड़ी है। उन्होंने वांगचुक को जानकारी दी कि आज उनकी भूख हड़ताल का 16वां दिन है और इस पूरे आंदोलन का 23वां दिन है। उन्होंने बताया कि सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया है।
JSSC-CGL और TDPL परीक्षाओं पर बड़ा फैसला
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा और टीडीपीएल (TDPL) द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी परीक्षाओं को रद्द करने के ऐलान के बाद देवेंद्र महतो ने यह कदम उठाया है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र ने कहा कि सिस्टम में फैली गड़बड़ियों और गलत कामों के खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये वही मुद्दे थे जिनके खिलाफ छात्र समुदाय लड़ रहा था और इस आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी जान तक जोखिम में डाल दी थी। उन्होंने मांगों पर ध्यान देने के लिए सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
भविष्य की रणनीति और आभार प्रदर्शन
देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी पक्षों का शुक्रिया अदा किया और उन्होंने मीडिया, पुलिस, प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल सुधार के लिए हमारा संघर्ष थमेगा नहीं। भविष्य की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस मामले पर सभी साथियों के साथ गहन बातचीत और विचार-विमर्श करने के बाद ही आगे के कदमों की घोषणा की जाएगी।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का बयान
झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि कैबिनेट स्तर की बैठक में इस कार्य के लिए गठित समिति ने छात्रों के सभी मुद्दों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ विचार किया था। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों पर सहमति बन गई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में छात्रों के हित में यह बड़ा फैसला लिया गया। मंत्री ने कहा कि छात्र झारखंड का भविष्य हैं और उनके परिवारों की उम्मीदें उनसे जुड़ी हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अब आंदोलन का रास्ता छोड़कर अपने घर लौट जाएं और अपने भविष्य के निर्माण में जुटें।