बांग्लादेश की राजधानी ढाका की सड़कों पर शुक्रवार को उस समय भारी तनाव और विरोध का माहौल देखा गया जब हजारों की संख्या में हिंदू समुदाय के लोग भगवान राम के कथित अपमान के विरोध में सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने ढाका में एक विशाल मशाल जुलूस निकाला और इस दौरान "जय श्री राम" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। यह विरोध प्रदर्शन उन कट्टरपंथी इस्लामवादियों के खिलाफ था जिन्होंने कथित तौर पर भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया और उनकी एक विशाल मूर्ति बनाने का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि भगवान राम का अपमान करने वालों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
अपमान की घटना और 72 घंटे का अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हाल ही में एक हिंसक भीड़ ने भगवान राम की तस्वीर पर जूता रखकर उसे अपवित्र किया, जिसे हिंदू धर्म का घोर अपमान और बेइज्जती माना जा रहा है। इस घटना से आहत हिंदू समुदाय ने प्रशासन को 72 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस अपमानजनक कृत्य के पीछे के दोषियों को निर्धारित समय के भीतर गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे रविवार को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपेंगे। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के साथ बैठक करने और देश के अलग-अलग हिस्सों में रैलियां और कार्यक्रम आयोजित करने की भी घोषणा की है।
गैबांधा में 81 फुट ऊंची मूर्ति का विवाद
हिंदुओं का यह व्यापक प्रदर्शन उत्तरी गैबांधा जिले के पलाशबाड़ी में भगवान राम की 81 फुट ऊंची मूर्ति के निर्माण पर रोक लगाए जाने के कुछ दिनों बाद शुरू हुआ है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रही श्री श्री राधा गोविंदा मंदिर कमेटी ने दावा किया है कि स्थानीय अधिकारियों को इस्लामी समूहों से लगातार धमकियां मिल रही थीं, जिसके कारण निर्माण कार्य को रोकना पड़ा। इस घटना ने मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। मंदिर कमेटी का कहना है कि धार्मिक प्रतीकों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
शाहबाग चौराहे से नेशनल प्रेस क्लब तक प्रदर्शन
शुक्रवार शाम 5 बजे से ही राजधानी ढाका के प्रसिद्ध शाहबाग चौराहे पर हिंदू समुदाय के विभिन्न संगठनों के लोग जुटना शुरू हो गए थे। इस प्रदर्शन में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्र भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। मशाल जुलूस शाहबाग चौराहे से शुरू होकर मोटेश्वर भवन से होते हुए नेशनल प्रेस क्लब तक गया और जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी एकजुटता दिखाई और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इससे पहले शुक्रवार सुबह भी ढाका में दो अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। हिंदू महाजोत नाम के संगठन के दो गुटों ने अलग-अलग आयोजन किए, जिसमें एक नेशनल प्रेस क्लब के सामने मानव श्रृंखला के रूप में था और दूसरा ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी बात रखी गई।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भविष्य की रणनीति
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए एक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रविवार को मंत्रालय को ज्ञापन सौंपने के बाद, समुदाय के नेता आगे की रणनीति तय करेंगे। उनकी मुख्य मांगों में दोषियों की गिरफ्तारी, 81 फुट ऊंची मूर्ति के निर्माण को फिर से शुरू करना और हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। इस घटनाक्रम ने ढाका और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।