धनतेरस से ठीक पहले देश के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में एक बार फिर से तेजी देखने को मिली है। राजधानी दिल्ली के बाजार में 24 कैरेट वाला सोना 4 हजार 800 रुपये बढ़कर 1 लाख 46 हजार 600 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए स्तर पर पहुंच चुका है। हालांकि, एक तरफ जहां भौतिक सोने की कीमतों में उछाल आया है, वहीं दूसरी ओर गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ में गिरावट का सिलसिला जारी है। पिछले एक महीने के भीतर गोल्ड ईटीएफ में करीब 4% तक की भारी टूट देखने को मिली है। इस विरोधाभास के चलते निवेशकों के मन में यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या धनतेरस के इस पावन अवसर पर सोने या गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने का यह बिल्कुल सही मौका है या फिर निवेशकों को अभी थोड़ा और इंतजार करना चाहिए।
सोने की कीमतों पर क्यों बना हुआ है दबाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में लगातार बने हुए तनाव, वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और दुनिया भर में ऊंची ब्याज दरों के कारण सोने की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है और सोना अपने अब तक के रिकॉर्ड उच्च स्तर यानी करीब 1 लाख 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम से अभी भी 18 से 20% से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा है। यही वजह है कि गोल्ड ईटीएफ में हाल ही में आई 4% तक की गिरावट को सीधे तौर पर इन्हीं वैश्विक आर्थिक कारणों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके बावजूद कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार सोने की भारी खरीदारी जारी है। भविष्य में भी गोल्ड ईटीएफ में निवेश का यह सिलसिला जारी रहने की पूरी उम्मीद है, जिससे आने वाले समय में सोने की कीमतों को मजबूत सहारा मिल सकता है। सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इस हालिया गिरावट के बावजूद पिछले धनतेरस से लेकर अब तक सोने ने निवेशकों को करीब 8% का शानदार रिटर्न दिया है, जो कि कई मामलों में निफ्टी 50 के रिटर्न से भी बेहतर माना जा रहा है। ऐसे में जो निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से बाजार में उतरना चाहते हैं, उनके लिए यह समय एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकता है।
गिरावट के बावजूद गोल्ड ईटीएफ में लगातार बढ़ रहा है निवेश
द मिंट की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव और हालिया गिरावट के बावजूद आम निवेशकों की दिलचस्पी गोल्ड ईटीएफ के प्रति लगातार बनी हुई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 के दौरान दुनियाभर के गोल्ड ईटीएफ में लगभग 89 अरब डॉलर का बंपर निवेश आया था, जबकि इसके मुकाबले साल 2024 में यह आंकड़ा मात्र 3 अरब 40 करोड़ डॉलर पर सिमट गया था। यह मजबूत रुख साल 2026 में भी लगातार जारी है। इस साल सितंबर महीने तक ही गोल्ड ईटीएफ में करीब 39 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश आ चुका था। भारत के घरेलू बाजार में भी निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में अपनी हिस्सेदारी काफी हद तक बढ़ाई है। अनुमान के मुताबिक, केवल अक्टूबर महीने के दौरान ही इन फंड्स में लगभग 3 हजार 300 करोड़ रुपये का ताजा निवेश आने की पूरी उम्मीद है।
क्या गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना जोखिम भरा है?
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो लंबी अवधि के लिहाज से गोल्ड ईटीएफ ने निवेशकों को हमेशा से ही अच्छा और स्थिर रिटर्न दिया है, लेकिन पिछले कुछ दिनों की हालिया गिरावट का असर इनके शॉर्ट-टर्म प्रदर्शन पर भी साफ तौर पर दिखाई दिया है। 22% का सकारात्मक रिटर्न दिया है। 58% के सबसे बेहतरीन रिटर्न के साथ टॉप पर प्रदर्शन किया है। 39% का मजबूत रिटर्न निवेशकों को दिया है। 15% का शानदार रिटर्न डिलीवर किया है। हालांकि, पिछले एक महीने का प्रदर्शन थोड़ा कमजोर जरूर रहा है। 4 नवंबर तक के उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, धन ऐप पर लिस्टेड सभी 25 गोल्ड ईटीएफ स्कीम्स ने पिछले एक महीने में निगेटिव रिटर्न ही दर्ज किया है।
मौजूदा हालात में क्या निवेशकों के लिए खरीदारी करना फायदेमंद होगा?
বাজার के तमाम जानकारों का यह स्पष्ट रूप से कहना है कि गोल्ड ईटीएफ में आई इस मौजूदा गिरावट की मुख्य वजह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में आई कमजोरी ही है और ये सभी फंड्स सीधे तौर पर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों के उतार-चढ़ाव को ट्रैक करते हैं। बीते सितंबर महीने में सोने में काफी तेज गिरावट दर्ज की गई थी और उसके बाद से ही कीमतों पर लगातार ऊपरी दबाव बना हुआ है। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स (MCX) पर सोने के वायदा भाव के लिए 1 लाख 36 हजार 500 रुपये का स्तर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि, इस मामूली गिरावट और मंदी के दौर के बीच भी गोल्ड ईटीएफ में निवेशकों का रुझान और निवेश लगातार बढ़ा है। केवल सितंबर महीने के दौरान ही इनमें 4 हजार 451 करोड़ रुपये का भारी निवेश आया, जो कि पिछले सात महीनों का सबसे बड़ा और सर्वाधिक आंकड़ा साबित हुआ है। इसके अलावा अक्टूबर महीने के शुरुआती 15 दिनों में भी बाजार में करीब 1 हजार 722 करोड़ रुपये का निवेश आ चुका था। अगर साल 2026 की शुरुआत यानी जनवरी से लेकर सितंबर तक की कुल अवधि की बात की जाए, तो इस दौरान कुल निवेश का आंकड़ा लगभग 45 हजार 925 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो कि पूरे साल 2025 के कुल निवेश से भी कहीं ज्यादा अधिक है। इन सभी आंकड़ों और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यही कहा जा सकता है कि बाजार की यह मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोने में खरीदारी करने का एक बहुत ही सुनहरा मौका साबित हो सकती है।