दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव 2026 के परिणामों की घोषणा हो गई है, जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एक बड़ी और प्रभावशाली जीत दर्ज की है। भारतीय राजनीति की नर्सरी कहे जाने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस चुनाव में एबीवीपी ने केंद्रीय पैनल के चार मुख्य पदों में से तीन पर अपना परचम लहराया है। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल की है। हालांकि, इस चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला, जहां एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया।
एबीवीपी का तीन पदों पर कब्जा
चुनाव परिणामों के अनुसार, अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार यश डबास ने शानदार जीत हासिल की है। यश डबास को कुल 22434 वोट मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और एनएसयूआई के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा को हराया, जिन्हें 21390 वोट प्राप्त हुए। अध्यक्ष पद की यह लड़ाई काफी रोमांचक रही और अंत तक दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला।
निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन का जलवा
उपाध्यक्ष पद के नतीजों ने सभी राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया। इस पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने भारी मतों से जीत दर्ज की। 19वें राउंड की गिनती के बाद दीपांशु शौकीन को 28873 वोट मिले। उनके मुकाबले एबीवीपी के इशू मौर्या को 15346 वोट और एनएसयूआई के वीर चतरथ को केवल 4010 वोट ही मिल सके। दीपांशु शौकीन की यह जीत दर्शाती है कि छात्रों ने पारंपरिक छात्र संगठनों से हटकर एक स्वतंत्र चेहरे पर भरोसा जताया है।
सचिव और संयुक्त सचिव पदों का विवरण
सचिव पद पर भी एबीवीपी का दबदबा कायम रहा और एबीवीपी की रिया छाबरी ने 19846 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने एनएसयूआई की नम्रता चौधरी को मात दी, जिन्हें 13963 वोट मिले। वहीं, संयुक्त सचिव पद पर मुकाबला बेहद कड़ा और त्रिकोणीय रहा। इस पद पर एबीवीपी के लक्ष्यराज चौधरी (लक्ष्यराज सिंह) ने 14965 वोट पाकर जीत हासिल की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के छात्र संगठन (एससीएस) के विशेष यादव को हराया, जिन्हें 14836 वोट मिले थे। इसी पद पर एनएसयूआई के गोपाल चौधरी को 14482 वोट प्राप्त हुए।
चुनाव का माहौल और महत्वपूर्ण मुद्दे
मालूम हो कि डूसू चुनाव के लिए मतदान शुक्रवार को हुआ था, जिसमें कुल 40 दशमलव 46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला आरएसएस समर्थित एबीवीपी और कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के बीच था, लेकिन निर्दलीय और अन्य संगठनों ने भी अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराई। यह चुनाव कई मायनों में खास रहा, क्योंकि यह जंतर-मंतर पर हुए "कॉकरोच जनता पार्टी" के प्रदर्शन के बाद आयोजित हुआ था, जिसे जेन-जी (Gen-Z) के बदलते मिजाज से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके अलावा, चुनाव के दौरान सत्य निकेतन में हुई पीजी दुर्घटना का मामला भी काफी चर्चा में रहा, जिसमें कई छात्रों की दुखद मृत्यु हो गई थी। इन सभी मुद्दों ने छात्रों के मतदान व्यवहार को प्रभावित किया और अंततः एबीवीपी तीन प्रमुख पदों पर विजयी होकर उभरी।