तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोआन लंबे समय से देश के सर्वोच्च और निर्विवाद नेता बनने की दिशा में अग्रसर दिखाई दे रहे हैं और अपनी इस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए एर्दोआन लगातार तुर्की के विपक्ष और स्वतंत्र मीडिया को कमजोर करने की रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। हाल ही में बुधवार को एर्दोआन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर विस्तार से बातचीत की, जिसके तुरंत बाद तुर्की में तीन बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इन फैसलों ने तुर्की की राजनीति में एर्दोआन की पकड़ को और भी ज्यादा मजबूत कर दिया है। साल 2013 से राष्ट्रपति पद पर काबिज एर्दोआन के बारे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे अंकारा के सर्वोच्च तानाशाह के रूप में खुद को स्थापित करना चाहते हैं और 2024 के बाद से उन्होंने इस दिशा में अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं।
विपक्ष को खत्म करने की सोची-समझी रणनीति
एर्दोआन की सत्ता को सुरक्षित करने की पहली और सबसे बड़ी कोशिश तुर्की से विपक्ष का नामो-निशान मिटाना है। इसी अभियान के तहत तुर्की के कई प्रभावशाली विपक्षी नेताओं को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। तुर्की टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को तुर्की की एक स्थानीय अदालत ने मुख्य विपक्षी दल सीएचपी के आम अधिवेशन को अवैध और गलत करार दिया। इस अदालती फैसले के परिणामस्वरूप वहां के प्रमुख विपक्षी नेता को उनके पद से हटाने का आदेश दिया गया, जिसके बाद ओजगुर ओजल को प्रमुख विपक्षी नेता के पद से बेदखल कर दिया गया है। यह कदम एर्दोआन के विरोधियों को राजनीतिक रूप से पंगु बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
लोकतंत्र पर मंडराता खतरा और जेल से उठती आवाजें
इस्तांबुल के पूर्व मेयर और वर्तमान में जेल में बंद नेता एकरेम इमामोग्लू ने इन घटनाक्रमों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इमामोग्लू का आरोप है कि राष्ट्रपति एर्दोआन न्यायपालिका का दुरुपयोग करके विपक्षी नेताओं को उनके पदों से हटा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है। उनका कहना है कि एर्दोआन की कोशिश किसी भी तरह से विपक्ष की मौजूदगी को शून्य करने की है, ताकि जनता के बीच उनके शासन और फैसलों का कोई निष्पक्ष मूल्यांकन न हो सके। गौरतलब है कि जेल जाने से पहले इमामोग्लू को राष्ट्रपति पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन एर्दोआन के प्रभाव में उन पर अचानक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए और उन्हें जेल भेज दिया गया। इमामोग्लू ने इस कठिन समय में सभी विपक्षी नेताओं से एकजुट रहने की अपील की है।
आर्थिक फैसले और शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई
राजनीतिक बदलावों के साथ-साथ एर्दोआन सरकार ने अर्थव्यवस्था को लेकर भी कड़े कदम उठाए हैं। तुर्की की सरकार ने महंगाई पर नियंत्रण पाने और बाजार में स्थिरता लाने के उद्देश्य से अमेरिकी ट्रेजरी के अपने सभी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है और गुरुवार को तुर्की सरकार ने 8 बिलियन डॉलर मूल्य के बॉन्ड बेच दिए। अंकारा के केंद्रीय बैंक ने यह कदम बाजारों में मची अफरा-तफरी को रोकने के लिए उठाया है, क्योंकि ईरान युद्ध के कारण तुर्की की अर्थव्यवस्था काफी दबाव में है। इसके अलावा, सरकार ने विल्गी यूनिवर्सिटी को भी बंद करने का आदेश जारी किया है। बताया जा रहा है कि इस यूनिवर्सिटी के माध्यम से एर्दोआन की नीतियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे थे, जिसे रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है।
डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत और अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ
गुरुवार को लिए गए इन तीन बड़े फैसलों का सीधा संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई फोन कॉल से जोड़ा जा रहा है। एर्दोआन के कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस बातचीत के दौरान सीरिया और ईरान के मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, जिस तेजी से ट्रंप के साथ बातचीत के बाद ये फैसले लागू किए गए, उससे यह संकेत मिलता है कि इसमें अमेरिका की भी मौन सहमति हो सकती है। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट में तुर्की प्रोग्राम की निदेशक गोनुल टोल का कहना है कि तुर्की में जो कुछ भी हो रहा है, अमेरिका उससे पूरी तरह वाकिफ है। इसके बावजूद अमेरिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इसके विपरीत, ट्रंप अक्सर एर्दोआन की प्रशंसा करते नजर आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप इसी तरह पाकिस्तान के आसिम मुनीर को भी बढ़ावा देते रहे हैं, जिसके कारण मुनीर पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली सैन्य प्रमुख बन गए हैं।