फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी: दुनिया की सबसे महंगी ट्रॉफी का 52 साल पुराना इतिहास

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फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी: दुनिया की सबसे महंगी ट्रॉफी का 52 साल पुराना इतिहास
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दुनिया के सबसे बड़े सिंगल स्पोर्टिंग इवेंट यानी फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत होने वाली है। इस बार का आयोजन बेहद खास होने वाला है क्योंकि इसमें अब तक की सबसे ज्यादा 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। यह महाकुंभ 12 जून से अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में शुरू होगा। खेल प्रेमियों की नजरें न केवल मैदान पर होने वाले मुकाबलों पर हैं, बल्कि उस प्रतिष्ठित ट्रॉफी पर भी हैं जिसे दुनिया की सबसे महंगी स्पोर्ट्स ट्रॉफी माना जाता है। फीफा वर्ल्ड कप की यह ट्रॉफी अपने आप में इतिहास और बेशुमार दौलत का संगम है।

ट्रॉफी की बनावट और सोने का वजन

फीफा वर्ल्ड कप की यह ट्रॉफी अपनी खूबसूरती और बनावट के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। आपको बता दें कि यह ट्रॉफी 18 कैरेट सोने से तैयार की गई है। इसमें कुल 6 किलो 175 ग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया है। ट्रॉफी के डिजाइन में दो मानव आकृतियों को दुनिया को ऊपर उठाए हुए दिखाया गया है। इसके निचले हिस्से यानी बेस को और भी खास बनाने के लिए हरे रंग के मैलाकाइट पत्थरों की दो परतों का उपयोग किया गया है। यह पत्थर इसकी चमक और भव्यता को और भी बढ़ा देते हैं।

करोड़ों में है इस ट्रॉफी की कीमत

अगर इस ट्रॉफी की कीमत की बात करें तो इसके आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं। इसमें इस्तेमाल हुए सोने और मैलाकाइट पत्थर की वास्तविक कीमत लगभग 6,16,300 डॉलर है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 5 करोड़ 10 लाख रुपये के बराबर बैठती है। हालांकि, इसकी ऐतिहासिक अहमियत और वैश्विक पहचान के कारण इसकी मौजूदा मार्केट वैल्यू कहीं ज्यादा है और वर्तमान में इस ट्रॉफी की बाजार कीमत लगभग 2 करोड़ डॉलर यानी करीब 192 करोड़ रुपये आंकी गई है। यही वजह है कि यह दुनिया के किसी भी खेल की सबसे महंगी ट्रॉफी कहलाती है।

विजेता टीम को क्यों नहीं मिलती असली ट्रॉफी?

इतनी महंगी और कीमती होने के कारण इस ट्रॉफी की सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। नियम के मुताबिक, वर्ल्ड कप फाइनल जीतने वाली टीम को जश्न के दौरान असली ट्रॉफी दी तो जाती है, लेकिन समारोह खत्म होने के बाद इसे वापस ले लिया जाता है। असली ट्रॉफी को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में स्थित फीफा के मुख्यालय में सुरक्षित रखा जाता है। विजेता टीम को अपने साथ ले जाने के लिए असली ट्रॉफी जैसी ही दिखने वाली एक रेप्लिका यानी नकल ट्रॉफी दी जाती है, जिसे वे अपने देश ले जा सकते हैं और अपने पास रख सकते हैं।

52 साल पुराना गौरवशाली इतिहास

इस वर्तमान ट्रॉफी का सफर 1970 के दशक में शुरू हुआ था। इसे इटली के मशहूर मूर्तिकार सिल्वियो गाजानिया ने डिजाइन किया था और इस नई ट्रॉफी को सबसे पहले 1974 के वर्ल्ड कप में पेश किया गया था, जिसे वेस्ट जर्मनी की टीम ने जीतकर अपने नाम किया था। तब से लेकर पिछले 52 साल से यह ट्रॉफी फुटबॉल जगत का सबसे बड़ा सम्मान बनी हुई है। अब 2026 में एक बार फिर 48 टीमें इस 192 करोड़ रुपये की ट्रॉफी को उठाने के लिए अपना पूरा जोर लगाएंगी।

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