विज्ञापन

FII की 5 लाख 50 हजार करोड़ की महा-बिकवाली में भी चमके ये 84 शेयर, निवेशकों को बनाया करोड़पति

FII की 5 लाख 50 हजार करोड़ की महा-बिकवाली में भी चमके ये 84 शेयर, निवेशकों को बनाया करोड़पति
विज्ञापन

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार से की गई 5 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की रिकॉर्ड तोड़ महा-बिकवाली ने दलाल स्ट्रीट को हिलाकर रख दिया। हर तरफ गिरते इंडेक्स और निवेशकों के डूबते पैसों का शोर था। लेकिन, इस भीषण वित्तीय तूफान के बीच भी भारतीय बाजार के भीतर एक ऐसी गुप्त समानांतर कहानी चल रही थी, जिसने सबको हैरान कर दिया है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार इस चौतरफा मंदी और रिकॉर्ड बिकवाली के शोर के पीछे 84 ऐसे छिपे रुस्तम मौजूद थे, जो न सिर्फ टिके रहे, बल्कि उन्होंने निवेशकों को छप्परफाड़ मल्टीबैगर रिटर्न देकर मालामाल कर दिया।

विदेशी निवेशकों की 5 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की बिकवाली

ग्लोबल लेवल पर ब्याज दरों में अनिश्चितता, जियो पॉलिटिकल टेंशन, ताइवान और साउथ कोरिया जैसे बाजारों की ओर फंड्स के डाइवर्ट होने के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs/FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से चौतरफा बिकवाली की। विदेशी निवेशकों द्वारा निकाली गई 5 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की यह राशि भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी बिकवालियों में से एक है। आम तौर पर इतनी बड़ी बिकवाली बाजार को पूरी तरह क्रैश कर देती है, लेकिन घरेलू निवेशकों और भारत के रिटेल निवेशकों के अटूट भरोसे ने निफ्टी और सेंसेक्स को एक मजबूत सुरक्षा कवच दिया। जानकारों का कहना है कि यह फंड के रोटेशन का संकेत है, न कि भारत से पूरी तरह बाहर निकलने का।

मंदी के तूफान को मात देने वाले 84 चैंपियन

जब FIIs दिग्गज और लार्ज-कैप शेयरों को बेचकर बाहर निकल रहे थे, तब डोमेस्टिक मनी फ्लो और मजबूत फंडामेंटल्स के दम पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट के 84 शेयरों ने इतिहास रच दिया। मार्केट एक्सपर्ट्स और डेटा एनालिसिस के अनुसार ये 84 शेयर ऐसे थे जिनकी अर्निंग ग्रोथ यानी कमाई की रफ्तार बेहद मजबूत थी और इनका बिजनेस मॉडल बाहरी या ग्लोबल झटकों से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुआ। जब बड़े संस्थागत निवेशक बिकवाली कर रहे थे, तब समझदार घरेलू फंड्स और रिटेल निवेशकों ने इन चुनिंदा वैल्यू स्टॉक्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू कर दी। इन 84 मल्टीबैगर विजेताओं में मुख्य रूप से डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर सेक्टर्स से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें सरकार के कैपेक्स और डोमेस्टिक कंजम्पशन यानी घरेलू खपत का सीधा फायदा मिल रहा है।

मार्केट क्रैश का इनसाइड गेम: FII बिकवाली बनाम छुपा खजाना

बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो FII की महा-बिकवाली का असर मुख्य रूप से बैंकिंग, आईटी और ग्लोबल कमोडिटीज जैसे सेक्टर्स पर पड़ा जहां उनकी हिस्सेदारी ज्यादा थी। इन सेक्टर्स के कई हैवीवेट शेयरों में 15 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इसके विपरीत, घरेलू फंड्स (DIIs) के निवेश से उन 84 शेयरों में लिक्विडिटी बनी रही जिन्होंने मुश्किल दौर में भी 100 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक का बंपर रिटर्न दिया। यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय बाजार अब केवल विदेशी पूंजी पर निर्भर नहीं है। डिफेंस, रेलवे, सेमीकंडक्टर, स्पेशलिटी केमिकल्स और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों ने इस दौरान सबसे शानदार प्रदर्शन किया है।

रिटेल निवेशकों के लिए बड़ा सबक

ईटी की रिपोर्ट में बाजार के जानकारों के हवाले से कहा गया कि यह डेटा साबित करता है कि विदेशी निवेशकों का बिकवाली करना हमेशा बाजार के खत्म होने का संकेत नहीं होता। जानकारों के अनुसार जब हेडलाइंस चिल्ला रही हों कि बाजार डूब रहा है, तब वास्तविक अवसर शांत पड़े क्वालिटी मिड और स्मॉल कैप शेयरों में बन रहे होते हैं। वहीं जिन कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत है और जिन पर कर्ज का बोझ कम है, उनके शेयर किसी भी ग्लोबल बिकवाली के बावजूद अपना रास्ता खुद बना लेते हैं। जानकार निवेशकों को भविष्य में मुनाफे के लिए ऐसे मजबूत शेयर जमा करने की सलाह दे रहे हैं।

भारतीय शेयर बाजार से 5 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की पूंजी का बाहर जाना निश्चित रूप से एक बड़ा मैक्रो-इकोनॉमिक झटका रहा, लेकिन बाजार के इस अंधेरे दौर ने ही 84 नए मल्टीबैगर सितारों को जन्म दिया। यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि भारतीय इकॉनमी का डोमेस्टिक ग्रोथ इंजन अब इतना आत्मनिर्भर हो चुका है कि वह ग्लोबल दिग्गजों की बिकवाली के दबाव को आसानी से पचाकर नए विनर तैयार कर सकता है।

विज्ञापन