टोक्यो: टोक्यो में खेल जा रहे ओलंपिक खेलों का आज आखिरी दिन है। इन खेलों के खत्म होने से एक दिन पहले करोड़ों भारतीय फैन्स को खुश होने का मौका मिल गया, क्योंकि शनिवार को भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक इवेंट में गोल्ड पर निशाना साधकर 100 साल से ज्यादा समय का इंतजार खत्म कर दिया। खुश होने वालों में देश के पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल थे। अच्छी बात यह है कि यह खुशी क्रिकेट प्रेमियों के चेहरों पर भी देखने को मिली। शनिवार को जैसे ही नीरज ने गोल्ड कंफर्म किया, वैसे ही भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट के दौरान कमेंट्री कर रहे पूर्व भारतीय क्रिकेटर आशीष नेहरा और सुनील गावस्कर खुशी से उछलने लग गए।
इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को सोनी नेटवर्क ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें गावस्कर और आशीष नेहरा अपने साथियों संग नीरज के मैच का लुत्फ उठा रहे हैं। नीरज के गोल्ड जीतने के बाद गावस्कर 'मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती' गाना भी गाते नजर आते हैं। बता दें कि फाइनल के छठे राउंड में जैसे ही चेक गणराज्य के जाकुब वाडलेच ने अपना आखिरी थ्रो पूरा किया, नीरज जान गए थे कि उन्होंने गोल्ड मेडल जीत लिया है। वे सभी 12 प्रतिस्पर्धियों में पहले तीन प्रयासों में सर्वश्रेष्ठ थे, जिससे वे अगले तीन प्रयासों में थ्रो करने के लिए सबसे आखिर में आए।
We all are Sunil Gavaskar at the moment 🇮🇳🙌🏽
— Sony Sports (@SonySportsIndia) August 7, 2021
How did you react to India's golden moment? 😍#HumHongeKamyab #Tokyo2020 #SirfSonyPeDikhega pic.twitter.com/vg8FmQ2fG9
इस गोल्ड के साथ नीरज अब भारत की तरफ से व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाले मात्र दूसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीता था। भारत ने ओलंपिक में पहली बार भाग लेने के बाद से लेकर रियो ओलंपिक 2016 तक कभी भी एथलेटिक्स में पदक नहीं जीता था। दिग्गज मिल्खा सिंह और पीटी ऊषा क्रमश 1960 और 1984 में मामूली अंतर से चूक गए थे। इंटरनेशनल ओलंपिक समिति (आईओसी) अब भी नार्मन प्रिचार्ड के पेरिस ओलंपिक 1900 में 200 मीटर और 200 मीटर बाधा दौड़ में जीते गए पदकों को भारत के नाम पर दर्ज करता है, लेकिन विभिन्न शोध और इंटरनेशनल एथलेटिक्स महासंघ (अब विश्व एथलेटिक्स) के अनुसार उन्होंने तब ग्रेट ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व किया था।