क्या सोने के दाम में आएगा बड़ा क्रैश? भारतीयों ने 90 दिनों में बेचा 50000 किलो पुराना सोना

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क्या सोने के दाम में आएगा बड़ा क्रैश? भारतीयों ने 90 दिनों में बेचा 50000 किलो पुराना सोना
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भारतीय परिवार इस समय सोने की ऊंची कीमतों का भरपूर फायदा उठा रहे हैं और इसी वजह से देश के सर्राफा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछली तिमाही के दौरान भारतीय परिवारों ने लगभग 50 टन यानी 50000 किलोग्राम पुराने गहने बेचे हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 43 फीसदी ज्यादा है। इस भारी बिकवाली के पीछे सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में संभावित गिरावट का डर है। ग्राहकों को लग रहा है कि सोने की कीमत 1 लाख 40 हजार रुपये से घटकर 1 लाख 20 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम हो सकती है। इसी डर के कारण लोग अब पुराने सोने के बदले नए गहने बनवाने के बजाय सीधे नकद राशि लेना पसंद कर रहे हैं।

नए गहनों के बजाय कैश की मांग

भारतीय परिवारों के लिए सोना सिर्फ एक आभूषण नहीं बल्कि मुसीबत के समय काम आने वाला सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है। लेकिन इस समय देश के सर्राफा बाजारों में एक बिल्कुल उलटा और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिल रहा है। ज्वेलरी इंडस्ट्री के जानकारों और बड़े सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक आमतौर पर भारतीय बाजार का यह नियम रहा है कि लोग शादी-ब्याह या त्योहारों के सीजन में अपनी पुरानी ज्वेलरी लेकर आते हैं और उसे बदलकर नया गहना बनवाते हैं। लेकिन इस बार यह ट्रेंड पूरी तरह बदल चुका है। दुकानों पर आने वाले 10 में से 7 ग्राहक सोने के बदले नई ज्वेलरी नहीं मांग रहे हैं बल्कि वे सोने की शुद्धता चेक करवाकर सीधे नकदी या बैंक ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले पुराना सोना बेचकर कैश कराने के मामलों में 43 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मार्केट क्रैश का डर और वैश्विक कारण

आम जनता और निवेशकों के मन में यह डर अचानक नहीं बैठा है। इसके पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सोना अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर 1 लाख 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम को छूने के बाद अब ऊपरी स्तरों पर टिकने के लिए संघर्ष कर रहा है। मौजूदा समय में सोने के दाम 1 लाख 40 हजार रुपये के आसपास हैं। डर इस बात का है कि कीमतें जल्द ही 1 लाख 20 हजार रुपये पर आ सकती हैं। मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव के कारण एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि सोने में किसी भी वक्त एक बड़ा डाउनवर्ड करेक्शन यानी गिरावट आ सकती है। इसी वजह से आम लोगों को लग रहा है कि सोना बेचने और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए यह मौजूदा भाव सबसे उत्तम है क्योंकि यदि कीमतें एक बार गिरना शुरू हुईं तो हाथ आया मुनाफा भी चला जाएगा।

ज्वेलरी बिजनेस और रीसाइक्लिंग पर असर

ग्राहकों द्वारा पुराना सोना बाजार में वापस लाने से ज्वेलर्स के पास लिक्विडिटी तो बढ़ रही है लेकिन नए सोने की मांग में भारी सुस्ती देखी जा रही है। शादी-ब्याह के सीजन के बावजूद लोग भारी-भरकम ज्वेलरी खरीदने से बच रहे हैं। अगर पुराना सोना इसी रफ्तार से बाजार में आता रहा तो घरेलू स्तर पर सोने की सप्लाई बढ़ जाएगी जिससे आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है। मुथूट एक्सिम के सीईओ केयूर शाह ने बताया कि ग्राहक अब संगठित और पारदर्शी माध्यमों से बेकार पड़े सोने को बेचकर पैसे बनाने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं। इससे न केवल उन्हें सोने की सही कीमत मिलती है बल्कि कीमती धातु को दोबारा इस्तेमाल में लाकर घरेलू गोल्ड इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलती है।

आयात पर निर्भरता में कमी

मुथूट एक्सिम जैसी कंपनियां सीधे ग्राहकों से पुराना और इस्तेमाल न किया गया सोना खरीदती हैं और उसे रिफाइन करके 24 कैरेट शुद्ध सोना बनाती हैं। इसके बाद इसे ज्वेलरी और सिक्का बनाने वालों को सप्लाई किया जाता है। इस प्रक्रिया से नई माइनिंग पर निर्भरता कम होती है और देश में इस कीमती धातु की उपलब्धता बढ़ती है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अभी भी आयातित सोने पर काफी हद तक निर्भर है और देश ने वित्त वर्ष 2026 में लगभग 72 बिलियन और 40 करोड़ डॉलर का सोना आयात किया। वहीं 2025 में रीसायकल किए गए सोने की मात्रा अनुमानित 125 से 150 टन थी। इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो 2026 में रीसाइकल किए जाने वाले सोने की मात्रा बढ़कर 200 से 250 टन हो सकती है।

घरेलू भंडार और भविष्य की संभावनाएं

भारतीय घरों में लगभग 30000 टन सोना होने का अनुमान है। इसलिए इंडस्ट्री से जुड़े लोग संगठित रीसाइक्लिंग को रिसोर्स की क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के एक बड़े मौके के तौर पर देखते हैं। ऑगमॉन्ट ने अपने गोल्ड फॉर ऑल नेटवर्क का विस्तार करते हुए कई राज्यों में 114 सेंटर खोले हैं जिससे ग्राहक संगठित चैनलों के जरिए अपने सोने का मूल्यांकन और रीसाइक्लिंग करवा सकते हैं। ऑगमॉन्ट के डायरेक्टर केतन कोठारी ने कहा कि दुनिया भर में घरों में सोने का सबसे बड़ा स्टॉक भारत में है फिर भी इसका एक बड़ा हिस्सा बेकार पड़ा रहता है। संगठित माध्यमों से इस सोने को वापस अर्थव्यवस्था में लाना देश के लिए फायदेमंद साबित होगा।

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