भारत सरकार ने डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वाले 50 ओवर-द-टॉप (OTT) ऐप्स को प्रतिबंधित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ एल मुरूगन ने लोकसभा में दी। सदन में एक लिखित जवाब पेश करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही सामग्री की निरंतर निगरानी कर रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
कानूनी प्रावधान और उल्लंघन का विवरण
इन 50 OTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ यह कड़ी कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 के प्रावधानों के तहत की गई है। सरकार की जांच में यह तथ्य सामने आया कि इन ऐप्स पर उपलब्ध सामग्री भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 और महिलाओं के अशोभनीय प्रतिनिधित्व (प्रतिषेध) अधिनियम की धारा 4 का खुला उल्लंघन कर रही थी। ये कानूनी धाराएं सार्वजनिक स्थानों या माध्यमों पर अश्लीलता फैलाने और महिलाओं के अपमानजनक चित्रण को पूरी तरह से प्रतिबंधित करती हैं।
कार्रवाई का पिछला इतिहास
अश्लील कंटेंट के खिलाफ सरकार का यह अभियान नया नहीं है, बल्कि यह पिछले कुछ समय से चल रही निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है। पिछले साल भी सरकार ने इसी तरह की शिकायतों और जांच के बाद 25 ऐप्स को बैन किया था। इन प्रतिबंधित ऐप्स में एएलटी (ALT), उल्लू (Ullu) और देसीफ्लिक्स (Desiflix) जैसे नाम शामिल थे। इसके अतिरिक्त, इसी साल फरवरी के महीने में भी 5 अन्य ऐप्स को अश्लील सामग्री दिखाने के कारण प्रतिबंधित किया गया था। अब एक साथ 50 ऐप्स पर ताला लगाकर सरकार ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल स्पेस में अनैतिकता के लिए कोई जगह नहीं है।
प्रसारण रोकने के लिए जारी निर्देश
सरकार ने इन प्रतिबंधित ऐप्स की पहुंच को जनता तक पहुंचने से रोकने के लिए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही, गूगल के प्ले स्टोर और एप्पल के ऐप स्टोर जैसे वैश्विक मार्केटप्लेस को भी इन ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने के लिए कहा गया है। सरकार के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म अश्लील फिल्मों और शोज का सहारा लेकर भारी ट्रैफिक जुटा रहे थे और सब्सक्रिप्शन के माध्यम से अवैध रूप से कमाई कर रहे थे।
आईटी नियमों में हाल ही में किए गए संशोधनों का हवाला देते हुए सरकार ने बताया कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य मध्यवर्तियों के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है। नए नियमों के मुताबिक, कोर्ट के आदेश या सरकार और उसकी अधिकृत एजेंसियों से सूचना मिलने के मात्र 3 घंटे के भीतर किसी भी गैरकानूनी कंटेंट को हटाना और उसकी पहुंच को रोकना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में भी ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी नजर रखेगी जो भारतीय कानूनों और सामाजिक नैतिकता का उल्लंघन करेंगे।