मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष की संभावनाओं के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) की शक्तियों का उपयोग करते हुए घरेलू गैस आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति में आने वाली किसी भी बाधा का असर भारत के आम नागरिकों की रसोई और परिवहन व्यवस्था पर न पड़े। मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा वैश्विक स्थिति के कारण ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए तेल शोधन कंपनियों को एलपीजी (LPG) का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
आवश्यक वस्तु अधिनियम और आपूर्ति की प्राथमिकता
भारत सरकार ने पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और समान वितरण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को प्रभावी ढंग से लागू किया है। इस कानून के तहत केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर विनियमित करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के अनुसार, घरेलू पाइप नेचुरल गैस (PNG) और वाहनों के लिए उपयोग होने वाली सीएनजी (CNG) की 100% आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद खाद संयंत्रों के लिए लगभग 70% और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए लगभग 80% गैस आपूर्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि गैस की उपलब्धता में कोई कमी आती है, तो सबसे पहले घरेलू और परिवहन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा किया जाएगा।
घरेलू एलपीजी उत्पादन और वितरण के नए नियम
मंत्रालय ने तेल रिफाइनरियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे एलपीजी के उत्पादन में वृद्धि करें और इस अतिरिक्त उत्पादन को विशेष रूप से घरेलू उपयोग के लिए आरक्षित रखें। आपूर्ति श्रृंखला को पारदर्शी बनाने और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने 25 दिन का इंटर-बुकिंग नियम लागू किया है। इस नियम के तहत एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद अगले 25 दिनों तक दूसरी बुकिंग नहीं की जा सकेगी, जिससे कालाबाजारी पर अंकुश लगाया जा सके। इसके अतिरिक्त, आयातित एलपीजी को वर्तमान में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे महत्वपूर्ण गैर-घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है ताकि आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों।
वैश्विक संकट और आयात पर निर्भरता की स्थिति
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है और 8 मिलियन टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर हुआ। शेष मात्रा का आयात किया गया, जिसका लगभग 85-90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से आता है। यह आपूर्ति मुख्य रूप से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के माध्यम से होती है। हालिया तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंका बढ़ गई है। इराक, कुवैत और कतर जैसे देशों द्वारा अस्थायी रूप से ऊर्जा आपूर्ति के कुछ हिस्सों को बंद करने की खबरों ने भी भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं।
गैर-घरेलू क्षेत्र के लिए समीक्षा समिति का गठन
होटल, रेस्तरां और औद्योगिक इकाइयों जैसे गैर-घरेलू एलपीजी उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने एक विशेष समीक्षा समिति का गठन किया है। इस समिति में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के तीन कार्यकारी निदेशक (EDs) शामिल हैं और यह समिति रेस्तरां और होटल उद्योग की एलपीजी आपूर्ति से जुड़ी मांगों और चुनौतियों की निरंतर समीक्षा करेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू क्षेत्र को प्राथमिकता देने के साथ-साथ व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी न्यूनतम रखा जा सके। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन सभी कदमों का उद्देश्य वैश्विक संकट के बावजूद देश के भीतर ऊर्जा वितरण को संतुलित और सुचारू बनाए रखना है।