Heavy Rain In Dehradun: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बीते कुछ घंटों से भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। बादल फटने की घटना के बाद तमसा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिसके कारण प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गया। इस प्राकृतिक आपदा ने कई मकानों और दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे भारी नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं।
टपकेश्वर मंदिर पर संकट
टपकेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी आचार्य बिपिन जोशी ने बताया कि सुबह 5:00 बजे से ही तमसा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हुआ। देखते ही देखते मंदिर परिसर पानी से भर गया। उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति लंबे समय से नहीं देखी गई थी। मंदिर का गर्भगृह सुरक्षित है, लेकिन परिसर में पानी भरने से श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कठिनाई हो रही है।" उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस समय नदियों और नालों के पास जाने से बचें, क्योंकि स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, देहरादून, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और नैनीताल जिलों में आज भारी से अति भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और तीव्र बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। अन्य जिलों जैसे चमोली और उधम सिंह नगर में भी रुक-रुककर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने देहरादून के लिए विशेष रूप से जानकारी दी है कि आज आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। शहर का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
नुकसान और राहत कार्य
भारी बारिश के कारण कई इलाकों में मकान और दुकानें बह गई हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।
सावधानी की जरूरत
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। नदियों, नालों और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। साथ ही, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं से बचने के लिए सतर्क रहने को कहा गया है।
उत्तराखंड में बारिश का यह कहर कब तक जारी रहेगा, इस बारे में मौसम विभाग ने अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। लेकिन स्थानीय लोग और प्रशासन इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।