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ऋतिक रोशन ने एक्टिंग गुरु एमएम बेग के निधन पर जताया शोक

ऋतिक रोशन ने एक्टिंग गुरु एमएम बेग के निधन पर जताया शोक
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बॉलीवुड सुपरस्टार ऋतिक रोशन ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से दिग्गज फिल्म निर्माता एमएम बेग के निधन पर शोक व्यक्त किया है। ऋतिक ने एमएम बेग को अपना पहला 'एक्टिंग गुरु' बताते हुए एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने फिल्म उद्योग में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे बेग ने उनके व्यक्तित्व और अभिनय कौशल को तराशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एमएम बेग का हाल ही में निधन हो गया था और उनकी मृत्यु की खबर तब सामने आई जब उनके पड़ोसियों ने उनके घर से दुर्गंध आने की शिकायत की और पुलिस को उनका शव उनके आवास पर अकेले मिला, जो कई दिनों पुराना बताया जा रहा है।

ऋतिक रोशन का अपने गुरु के प्रति भावुक संदेश

ऋतिक रोशन ने एमएम बेग को श्रद्धांजलि देते हुए उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। अभिनेता ने लिखा कि वह हमेशा बेग जी के शुक्रगुजार रहेंगे क्योंकि उन्होंने उन्हें तब अपना छात्र बनाया था जब वह महज 18 वर्ष के थे। ऋतिक के अनुसार, उस समय वह अपने करियर के शुरुआती पड़ाव पर थे और काफी झिझक महसूस करते थे। बेग ने उन्हें न केवल अभिनय के गुर सिखाए, बल्कि उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी मदद की और ऋतिक ने उल्लेख किया कि उनके बोलने के तरीके और प्रस्तुति में जो स्पष्टता आई है, उसका श्रेय काफी हद तक एमएम बेग की शिक्षाओं को जाता है। उन्होंने कहा कि वह आज भी उन तकनीकों का अभ्यास करते हैं जो उन्हें दशकों पहले सिखाई गई थीं।

अभिनय और संवाद अदायगी में एमएम बेग का योगदान

एमएम बेग को फिल्म उद्योग में उनके तकनीकी ज्ञान और संवाद अदायगी (Dialogue Delivery) में महारत के लिए जाना जाता था। ऋतिक रोशन की पहली फिल्म 'कहो ना... प्यार है' की रिलीज से बहुत पहले ही बेग ने उनके उच्चारण और वॉयस मॉड्यूलेशन पर काम करना शुरू कर दिया था। फिल्म उद्योग के सूत्रों के अनुसार, बेग ने ऋतिक को अपनी आवाज के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और कैमरे के सामने सहज रहने के लिए प्रशिक्षित किया था। ऋतिक ने स्वीकार किया कि वह अपने शुरुआती दिनों में काफी खोए हुए महसूस करते थे, लेकिन बेग ने उन्हें सही दिशा दिखाई और उनके भीतर के अभिनेता को आकार दिया।

एमएम बेग का फिल्मी सफर और निर्देशन

एक स्वतंत्र निर्देशक के रूप में एमएम बेग ने भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाने का प्रयास किया था। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह अभिनीत फिल्म 'मासूम गवाह' (1990) का निर्देशन किया था, हालांकि यह फिल्म किन्हीं कारणों से रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद 1994 में उन्होंने 'छोटी बहू' का निर्देशन किया, जिसमें शिल्पा शिरोडकर मुख्य भूमिका में थीं। एमएम बेग के संबंध फिल्म निर्माता राकेश रोशन के साथ भी काफी मधुर थे। उन्होंने राकेश रोशन की कई परियोजनाओं में पर्दे के पीछे रहकर सहयोग किया था। उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से भाषा के शुद्ध उच्चारण और पात्रों के भावनात्मक चित्रण में थी, जिसके कारण कई युवा कलाकार उनसे सलाह लेते थे।

बेग परिवार और बेबी गुड्डू की विरासत

एमएम बेग का परिवार भी फिल्म जगत से गहराई से जुड़ा रहा है। उनकी बेटी शाहिंदा बेग, जिन्हें दुनिया 'बेबी गुड्डू' के नाम से जानती है, 1980 के दशक की सबसे लोकप्रिय बाल कलाकारों में से एक थीं। ', 'नगीना', 'प्यार किया है प्यार करेंगे' और 'औलाद' जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया था। उन्होंने उस दौर के दिग्गज अभिनेताओं जैसे राजेश खन्ना, श्रीदेवी, अनिल कपूर और जीतेंद्र के साथ स्क्रीन साझा की थी। एमएम बेग ने अपनी बेटी के करियर को संवारने के साथ-साथ कई अन्य कलाकारों को भी फिल्म उद्योग की बारीकियों से अवगत कराया था।

निधन की दुखद परिस्थितियां और पुलिस कार्रवाई

एमएम बेग के निधन की परिस्थितियां काफी दुखद रहीं। रिपोर्टों के अनुसार, वह अपने घर में अकेले रह रहे थे। जब उनके पड़ोसियों को उनके घर से तेज दुर्गंध आने लगी, तो उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को सूचित किया और पुलिस ने जब घर का दरवाजा तोड़ा, तो बेग का शव बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच के अनुसार, उनकी मृत्यु कुछ दिन पहले ही हो गई थी। इस घटना ने फिल्म जगत को स्तब्ध कर दिया है। ऋतिक रोशन ने बेग परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उनके शांतिपूर्ण विश्राम की प्रार्थना की है। उद्योग के कई अन्य सदस्यों ने भी बेग के निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया है।

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