शेयर बाजार में 23 सितंबर को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में जबरदस्त हलचल देखी गई। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा रेटिंग अपग्रेड किए जाने के बाद इस बैंकिंग शेयर ने शानदार प्रदर्शन किया। इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान बैंक का शेयर 5 प्रतिशत की उछाल के साथ 89 रुपये 58 पैसे के स्तर पर पहुंच गया, जो इस शेयर का नया 52-हफ्ते का सबसे ऊंचा स्तर है। ब्रोकरेज ने इस स्टॉक पर अपनी रेटिंग को न्यूट्रल से बदलकर बाय यानी खरीदने की सलाह में तब्दील कर दिया है, जिससे निवेशकों में उत्साह का माहौल है।
ब्रोकरेज का अनुमान और नया टारगेट
मोतीलाल ओसवाल ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के लिए 105 रुपये का नया टारगेट प्राइस तय किया है। यदि इसकी तुलना पिछले क्लोजिंग प्राइस 85 रुपये से की जाए, तो इसमें आने वाले समय में 23 प्रतिशत की शानदार तेजी आने की संभावना जताई गई है। रेटिंग में इस सुधार के पीछे बैंक की डिपॉजिट फ्रेंचाइजी का मजबूत होना, लोन बांटने की रफ्तार में बढ़ोतरी और ऑपरेटिंग लेवरेज में सुधार जैसे महत्वपूर्ण कारण बताए गए हैं। इसके अलावा, बैंक का क्रेडिट कॉस्ट भी अब पूरी तरह से नियंत्रण में नजर आ रहा है, जो भविष्य के मुनाफे के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
निवेशकों को मिला बंपर रिटर्न
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों ने पिछले कुछ समय में अपने निवेशकों को मालामाल किया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में यह शेयर 58 रुपये 8 पैसे के अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर था। उस निचले स्तर से अब तक शेयर ने 54 प्रतिशत से ज्यादा की छलांग लगाई है। पिछले एक हफ्ते के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इसने 4 दशमलव 5 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। वहीं, तीन महीने में 13 प्रतिशत, छह महीने में 47 प्रतिशत और पिछले एक साल में निवेशकों को लगभग 26 प्रतिशत का शानदार रिटर्न मिला है। लगातार मिल रहे इन अच्छे रिटर्न्स ने बाजार में बैंक की साख को और मजबूत किया है।
बैंक की विकास रणनीति और लोन बुक
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक का लोन बुक वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच लगभग 21 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर यानी सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि साल 2027 तक बैंक का कुल लोन बुक 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है। रिटेल सेक्टर में बैंक का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। व्हीकल फाइनेंस और कंज्यूमर लोन के साथ-साथ गोल्ड लोन सेगमेंट में भी भारी तेजी देखी गई है और गोल्ड लोन का हिस्सा तो लगभग 103 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जो बैंक की आक्रामक विस्तार रणनीति को दर्शाता है।
डिपॉजिट और लायबिलिटी में सुधार
बैंक की लायबिलिटी फ्रेंचाइजी में भी क्रांतिकारी बदलाव आए हैं और वर्तमान में रिटेल डिपॉजिट, कुल कस्टमर डिपॉजिट का 80 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है, जबकि विलय के समय यह आंकड़ा केवल 27 प्रतिशत था। बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रवासी यानी एफसीएनआर-बी डिपॉजिट के माध्यम से भी 3 बिलियन 57 करोड़ डॉलर, जो लगभग 30,000 करोड़ रुपये के बराबर है, की एक बड़ी राशि जुटाई है। यह राशि बैंक के कुल डिपॉजिट का 11 प्रतिशत है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि इस बड़े फंड बेस से बैंक की कमाई में इजाफा होगा और खर्चों में कटौती का सीधा लाभ बैंक की बैलेंस शीट पर दिखाई देगा।
एसेट क्वालिटी और विशेषज्ञों की राय
बैंक की एसेट क्वालिटी में भी निरंतर सुधार हो रहा है। मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि साल 2028 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए घटकर 1 दशमलव 4 प्रतिशत पर आ जाएगा। बैंक अपनी रणनीति के तहत एमएफआई यानी माइक्रोफाइनेंस एक्सपोजर को लगातार कम कर रहा है। वित्त वर्ष 2024 के दौरान बैंक का एमएफआई बुक 13,340 करोड़ रुपये से घटकर 6,700 करोड़ रुपये रह गया है। बाजार के विशेषज्ञों का रुख भी इस शेयर को लेकर काफी सकारात्मक है। इस स्टॉक को ट्रैक करने वाले 31 बड़े एनालिस्ट में से 22 ने इसे खरीदने की सलाह दी है, जबकि 7 ने इसे होल्ड करने और केवल 2 ने बेचने की राय दी है।