विज्ञापन

आयकर बचत: 31 मार्च से पहले धारा 80C के तहत निवेश विकल्प।

आयकर बचत: 31 मार्च से पहले धारा 80C के तहत निवेश विकल्प।
विज्ञापन

वित्त वर्ष 2024-25 की समाप्ति में अब कुछ ही सप्ताह शेष हैं। आयकर नियमों के अनुसार, पुराने टैक्स रिजीम का चयन करने वाले करदाताओं के लिए 31 मार्च की समयसीमा अत्यंत महत्वपूर्ण है। 5 लाख तक के निवेश पर कर कटौती का दावा किया जा सकता है। यदि किसी करदाता ने अब तक अपनी निवेश सीमा का पूर्ण उपयोग नहीं किया है, तो उनके पास इस समयसीमा से पहले विभिन्न योजनाओं में पूंजी लगाने का विकल्प उपलब्ध है और अधिकारियों के अनुसार, इन निवेशों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पूरा किया जा सकता है, बशर्ते लेनदेन की तिथि 31 मार्च या उससे पहले की हो।

कर बचत के लिए उपलब्ध विकल्पों में तरलता, जोखिम और परिपक्वता अवधि के आधार पर विविधता देखी जाती है। जहां कुछ विकल्प बाजार के जोखिमों से जुड़े हैं, वहीं कुछ सरकारी गारंटी के साथ सुरक्षित रिटर्न प्रदान करते हैं। डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ, अब इनमें से अधिकांश निवेश तत्काल प्रभाव से किए जा सकते हैं, जिससे अंतिम समय में कर नियोजन करने वाले व्यक्तियों को सुविधा होती है।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) म्यूचुअल फंड

इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम, जिसे आमतौर पर ईएलएसएस (ELSS) कहा जाता है, धारा 80C के तहत एक प्रमुख निवेश विकल्प है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका लॉक-इन पीरियड है, जो केवल 3 वर्ष का होता है। यह धारा 80C के अंतर्गत आने वाले सभी निवेश विकल्पों में सबसे कम है। ईएलएसएस में निवेश की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी बाजार में लगाया जाता है और करदाता नेट बैंकिंग या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से इसमें तत्काल निवेश कर सकते हैं। 5 लाख तक के कुल निवेश पर ही प्राप्त होती है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सरकारी सुरक्षा

पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ एक दीर्घकालिक और सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है और यह योजना भारत सरकार द्वारा समर्थित है और इसकी परिपक्वता अवधि 15 वर्ष निर्धारित की गई है। पीपीएफ में जमा की गई राशि, उस पर मिलने वाला ब्याज और परिपक्वता पर प्राप्त होने वाली कुल राशि, तीनों ही आयकर से मुक्त होते हैं, जिसे 'EEE' श्रेणी कहा जाता है। 5 लाख तक जमा किए जा सकते हैं। अधिकांश बैंक और डाकघर अब ऑनलाइन पीपीएफ हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे 31 मार्च से पहले अंशदान जमा करना सुलभ हो गया है।

टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)

बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट उन व्यक्तियों के लिए एक विकल्प है जो निश्चित रिटर्न और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। इस योजना के तहत निवेश करने पर 5 वर्ष का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होता है, जिसका अर्थ है कि इस अवधि से पहले राशि की निकासी नहीं की जा सकती। 5 लाख तक की कटौती का दावा किया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इन एफडी पर अर्जित ब्याज कर योग्य होता है और यह करदाता की आय स्लैब के अनुसार कर के दायरे में आता है। अधिकांश अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से तत्काल टैक्स-सेविंग एफडी खोलने की सुविधा देते हैं।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और अतिरिक्त लाभ

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) विशेष रूप से सेवानिवृत्ति नियोजन के लिए तैयार किया गया एक स्वैच्छिक निवेश उपकरण है। 5 लाख की सीमा के भीतर निवेश किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, आयकर अधिनियम की धारा 80CCD(1B) के तहत करदाताओं को ₹50,000 की अतिरिक्त कर कटौती का लाभ मिलता है। इस प्रकार, एनपीएस के माध्यम से कुल ₹2 लाख तक की कर योग्य आय को कम किया जा सकता है। एनपीएस खाते को ई-एनपीएस पोर्टल के माध्यम से कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन सक्रिय किया जा सकता है और अंशदान जमा किया जा सकता है।

जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान

जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए भुगतान किया गया प्रीमियम भी धारा 80C के तहत कर लाभ के लिए पात्र है। इसमें टर्म इंश्योरेंस, एंडोमेंट प्लान और यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) शामिल हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास पहले से ही जीवन बीमा पॉलिसी है, तो वे 31 मार्च से पहले अपने लंबित प्रीमियम का भुगतान कर कर छूट प्राप्त कर सकते हैं। नई पॉलिसी खरीदने की स्थिति में भी, यदि प्रीमियम का भुगतान वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले किया जाता है, तो वह कटौती के लिए मान्य होता है। बीमा कंपनियों के डिजिटल पोर्टल के माध्यम से प्रीमियम का भुगतान तत्काल किया जा सकता है, जिससे करदाता को तुरंत भुगतान रसीद प्राप्त हो जाती है।

विज्ञापन