भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देने और उन्हें फिर से पटरी पर लाने के प्रयासों के तहत, लोगों के बीच आपसी मेल-जोल को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। इस नई प्रक्रिया में अब दोनों देशों की मीडिया और पत्रकारों को संवाद की एक मजबूत कड़ी के रूप में शामिल करने की कोशिश की जा रही है और इसी कड़ी में, ढाका में स्थित भारतीय उच्चायोग ने बांग्लादेशी पत्रकारों के लिए भारत में एक विशेष क्षमता-निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने का आधिकारिक ऐलान किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब 2024 के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों को कई चुनौतीपूर्ण और मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा है।
ITEC योजना और प्रशिक्षण का विवरण
यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार की प्रसिद्ध ITEC योजना के तहत आयोजित किया जा रहा है। इस कोर्स का मुख्य विषय पत्रकारिता और जनसंपर्क रखा गया है। यह कार्यक्रम तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक संचालित किया जाएगा। इस प्रोग्राम का प्राथमिक केंद्र उन बांग्लादेशी पत्रकारों को प्रशिक्षित करना है जो अपने पेशेवर करियर में अर्थव्यवस्था, वित्त, व्यापार और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की रिपोर्टिंग और कवरेज करते हैं और इस पहल का उद्देश्य केवल पत्रकारिता के पारंपरिक कौशल सिखाना नहीं है, बल्कि पत्रकारों को आधुनिक संचार के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना भी है।
आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप्स से परिचय
इस कार्यक्रम की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पत्रकारों को मीडिया संबंध, रणनीतिक संचार और मास मीडिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका जैसे समकालीन विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, प्रशिक्षण के दौरान पत्रकारों को हैदराबाद की प्रसिद्ध HITEC सिटी का दौरा करने का अवसर भी मिलेगा। वहां वे भारतीय स्टार्टअप्स और उभरते हुए उद्यमियों के साथ सीधे तौर पर बातचीत कर सकेंगे। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेशी पत्रकारों को भारत के उन्नत टेक्नोलॉजी, बिजनेस और इनोवेशन इकोसिस्टम से रूबरू कराना है, ताकि वे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की सक्रिय भूमिका
यह पहल भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी के विजन का हिस्सा मानी जा रही है। दिनेश त्रिवेदी को अप्रैल 2026 में बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था और उन्होंने जून में ढाका में अपना कार्यभार संभाला था। पद संभालने के बाद से ही त्रिवेदी लगातार इस बात की वकालत कर रहे हैं कि भारत और बांग्लादेश के संबंध दोनों देशों की जनता के बीच के आपसी रिश्तों पर टिके हुए हैं। 1 सितंबर को अपने एक संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा था कि दोनों देशों को अतीत की कड़वाहटों में उलझे रहने के बजाय अपने लोगों की भलाई और साझा विकास के लिए मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।
संसदीय और कूटनीतिक स्तर पर प्रयास
रिश्तों को सुधारने की यह कोशिश केवल मीडिया तक सीमित नहीं है। 2 सितंबर को बांग्लादेश की संसद के स्पीकर के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश-भारत संसदीय मैत्री समूह बनाने का एक औपचारिक प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों के सांसदों के बीच नियमित बातचीत और विचारों का आदान-प्रदान होना चाहिए ताकि विधायी स्तर पर भी संबंधों को मजबूती मिल सके। इससे पहले, अगस्त के महीने में त्रिवेदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से भी मुलाकात की थी। उस बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया था कि दोनों देशों के बीच जो भी मतभेद हैं, उन्हें केवल निरंतर बातचीत और रचनात्मक जुड़ाव के जरिए ही सुलझाया जा सकता है।
संवाद के तीन स्तर: कूटनीति, संसद और मीडिया
कुल मिलाकर देखा जाए तो ये हालिया घटनाक्रम भारत की उस रणनीति को दर्शाते हैं जिसमें तीन अलग-अलग स्तरों पर बातचीत को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है और पहला स्तर कूटनीतिक बातचीत का है, दूसरा संसदीय संबंधों का और अब तीसरा स्तर मीडिया के माध्यम से पेशेवर जुड़ाव का है। हालांकि, भारतीय उच्चायोग ने इस ITEC कार्यक्रम को केवल एक क्षमता-निर्माण कोर्स के रूप में पेश किया है, लेकिन इसके समय और संदर्भ को देखते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की एक व्यापक कूटनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। यह कार्यक्रम सरकारी स्तर से आगे बढ़कर पेशेवर और व्यक्तिगत स्तर पर संबंधों को नई ऊंचाई देने का एक प्रयास है।