ग्लोबल इकोनॉमी में गूंजेगा भारत का डंका, कोरियाई अर्थशास्त्री ने दिया हैरान करने वाला बड़ा बयान!

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ग्लोबल इकोनॉमी में गूंजेगा भारत का डंका, कोरियाई अर्थशास्त्री ने दिया हैरान करने वाला बड़ा बयान!
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ग्लोबल इकोनॉमी के पटल पर एक बार फिर भारत का डंका बजने जा रहा है और दक्षिण कोरियाई अर्थशास्त्री क्युंगहून किम के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था सात प्रतिशत से अधिक की लगातार वृद्धि के अपने सबसे लंबे दौर की ओर बढ़ सकती है। कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (KIEP) में दक्षिण एशिया के प्रमुख क्युंगहून किम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला के माध्यम से भारत की इस शानदार आर्थिक ग्रोथ पर एक विस्तृत बयान जारी किया है। उनके इस विश्लेषण ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे कोविड-19 महामारी के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूत ग्रोथ रेट को लगातार बनाए रखा है।

दो दशकों का पुराना रिकॉर्ड टूटने की कगार पर

क्युंगहून किम के साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 में महामारी के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में पांच दशमलव आठ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन वर्ष 2021 में इसमें नौ दशमलव सात प्रतिशत की बेहद जोरदार वापसी हुई। इसके बाद के चार वर्षों में हर साल देश की अर्थव्यवस्था में सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है और किम ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि इस तरह लगातार पांच वर्षों तक सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है जो वर्ष 2003 से 2007 के उस स्वर्णिम दौर के बिल्कुल बराबर है। उस समय ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था और उन्होंने आगे यह भी कहा कि अगर मौजूदा अनुमान बिल्कुल सही साबित होते हैं, तो भारत इस पुराने सिलसिले को भी पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित कर देगा।

पांच साल की औसत वृद्धि दर और ऐतिहासिक आंकड़े

किम द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के दौरान भारत की औसत वार्षिक जीडीपी वृद्धि सात दशमलव आठ तीन प्रतिशत रही है। वहीं दूसरी ओर वर्ष 2003 से 2007 के पिछले शानदार दौर के दौरान यह औसत सात दशमलव आठ नौ प्रतिशत था। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 1960 से लेकर अब तक के ऐतिहासिक सफर में यह हालिया पांच साल की अवधि दूसरी सबसे मजबूत और शक्तिशाली अवधि बन चुकी है। किम ने इस बात पर जोर दिया कि कई वर्षों तक इस तरह की तेज गति को लगातार बनाए रखना वाकई बेहद सराहनीय और ध्यान देने योग्य है। ये तमाम आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि भारत का हालिया आर्थिक विस्तार केवल महामारी के तुरंत बाद होने वाली शुरुआती रिकवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उससे कहीं आगे तक जा चुका है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने बढ़ाए भारत के विकास अनुमान

दक्षिण कोरियाई अर्थशास्त्री ने अपने इस थ्रेड में इस बात का भी विशेष जिक्र किया है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसी प्रमुख वैश्विक संस्थाएं भारत के आर्थिक प्रदर्शन को लेकर पहले से कहीं अधिक सकारात्मक रुख अपना रही हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को छह दशमलव चार प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे सात प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा अक्टूबर महीने की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार उन्हें वित्त वर्ष 2027-28 में भी सात प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज होने की पूरी उम्मीद है। किम ने लिखा है कि कई अन्य अर्थशास्त्रियों की तरह, जैसे-जैसे तिमाही जीडीपी के नए आंकड़े सामने आते गए, उन्होंने अपने पूर्वानुमानों को बार-बार ऊपर की ओर संशोधित किया है। उनके द्वारा साझा किए गए चार्ट यह साफ तौर पर दिखाते हैं कि विश्व बैंक, आईएमएफ और एडीबी ने भारत के लिए अपने अनुमानों में लगातार इजाफा किया है और ताजा अनुमान सात प्रतिशत के आसपास या उससे भी ऊपर बने हुए हैं। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों, तमाम भू-राजनीतिक तनावों और दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में चल रही मंदी की चिंताओं के बीच भारत के लिए इन सुधारों का आना बहुत बड़े मायने रखता है।

आज के सात प्रतिशत का पैमाना इतिहास से है काफी बड़ा

क्युंगहून किम ने इस बात को बहुत ही गहराई से समझाया है कि पिछले उच्च विकास दौर के मुकाबले अब भारत की अर्थव्यवस्था आकार में कितनी अधिक विशाल हो चुकी है। उनके साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2007 में भारत की जीडीपी एक ट्रिलियन डॉलर से थोड़ी ही अधिक थी, जबकि आज के समय में यह चार ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच रही है। इस बड़े बदलाव का सीधा सा मतलब यह है कि आज के समय में सात प्रतिशत की विकास दर का मतलब आर्थिक उत्पादन में कहीं अधिक बड़े पैमाने की वृद्धि है, जबकि लगभग दो दशक पहले इसी प्रतिशत का दायरा इतना बड़ा नहीं हुआ करता था। किम ने बहुत ही सरल शब्दों में समझाया कि सात प्रतिशत की वही समान विकास दर अब देश में बहुत बड़े आर्थिक विस्तार को दर्शाती है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि वर्ष 2030 के आसपास भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव हासिल कर लेगा, हालांकि इस प्रकार की रैंकिंग पूरी तरह से विनिमय दरों, मुद्रास्फीति और दुनिया के अन्य देशों के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।

चुनौतियों के बावजूद भारत की उपलब्धि का होना चाहिए जश्न

लगभग एक अरब चालीस करोड़ की विशाल आबादी वाले देश के लिए सात प्रतिशत से अधिक की लगातार विकास दर अपने आप में एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ी उपलब्धि होगी और इसके बावजूद किम ने यह भी स्वीकार किया कि जीडीपी की मुख्य विकास दर का मतलब अपने आप में यह बिल्कुल नहीं होता है कि देश के हर परिवार की आय, रोजगार के नए अवसरों या फिर उनके जीवन स्तर में भी बिल्कुल समान रूप से सुधार हुआ है। नए रोजगार के अवसर पैदा करने की रफ्तार, देश के भीतर निजी निवेश का स्तर और आम जनता की आय में होने वाली वृद्धि ऐसे बेहद महत्वपूर्ण पैमाने बने रहेंगे जिनसे यह पता चलेगा कि इस आर्थिक विकास का वास्तविक लाभ भारतीय परिवारों तक किस हद तक पहुंच पा रहा है और इन तमाम जमीनी चुनौतियों को खुले तौर पर स्वीकार करने के बावजूद उनका कड़ा तर्क था कि भारत के इस शानदार प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक बड़ी मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने अपने लेख के अंत में लिखा कि भले ही कई चुनौतियां अभी भी हमारे सामने मौजूद हैं, लेकिन एक अरब चार करोड़ लोगों वाले इस महान देश के इस अद्भुत आर्थिक प्रदर्शन का खुलकर जश्न मनाया जाना चाहिए। उन्होंने अपनी बात को एक बेहद सकारात्मक नोट के साथ समाप्त किया और इस बात की प्रबल उम्मीद जताई कि भविष्य में आने वाले तिमाही जीडीपी के नए आंकड़े दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों को अपने पूर्वानुमानों को और अधिक ऊपर की ओर संशोधित करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करेंगे।

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