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भारत-EU के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील्स': बदल जाएगी दुनिया की अर्थव्यवस्था!

भारत-EU के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील्स': बदल जाएगी दुनिया की अर्थव्यवस्था!
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने जा रहे मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दोनों पक्षों ने 'मदर ऑफ ऑल डील्स' यानी 'सभी समझौतों की जननी' करार दिया है। यह समझौता न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने वाला है। पिछले चार सालों में यह भारत का नौवां फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होगा, जो ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ हुए समझौतों की कड़ी में सबसे बड़ा और प्रभावशाली माना जा रहा है।

दो दशकों का इंतजार और ऐतिहासिक घोषणा

यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल दोनों ने इस डील को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा है और इस नाम के पीछे का मुख्य कारण लगभग दो दशकों तक चली लंबी और जटिल बातचीत है। 2007 में शुरू हुई यह चर्चा कई बार टैरिफ, बौद्धिक संपदा और कृषि जैसे मुद्दों पर अटक गई थी और अब, 27 जनवरी को इस ऐतिहासिक डील की घोषणा होने जा रही है, जो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के ठीक बाद होगी, जहां यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं।

भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का लोहा

भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। इस साल भारत जापान को पीछे छोड़ते हुए 4 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के आंकड़े को पार करने के करीब है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि भारत। के साथ यह साझेदारी लगभग दो अरब लोगों का एक साझा बाजार तैयार करेगी। यह बाजार दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा होगा, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

व्यापारिक आंकड़े और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट का गणित

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने यूरोपीय संघ को 76 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जबकि 61 अरब डॉलर का आयात किया है। हालांकि भारत वर्तमान में ट्रेड सरप्लस की स्थिति में है, लेकिन 2023 में GSP बेनिफिट्स हटने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ा था। इस नई डील के माध्यम से भारत उन रियायतों को वापस पाने की उम्मीद कर रहा। है, जिससे कपड़ा, दवाइयां, स्टील और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भारी उछाल आने की संभावना है।

टैरिफ में कटौती और भविष्य की राह

इस समझौते के तहत 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ को अगले 5 से 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। वर्तमान में भारत में यूरोपीय सामानों पर औसत टैरिफ 9. 3 प्रतिशत है, जबकि यूरोपीय संघ में भारतीय सामानों पर यह 3 और 8 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के लागू होने से भारत का निर्यात 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और यह विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने में एक बड़ा उत्प्रेरक साबित होगा।

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