चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े सामने आ गए हैं जो भारत की आर्थिक सेहत के लिए बेहद उत्साहजनक हैं। कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स यानी सीजीए की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से जून के बीच सरकार के खजाने में टैक्स के जरिए भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस मजबूत कमाई के दम पर सरकार ने देश के विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे पर अपना खर्च भी काफी बढ़ा दिया है। हालांकि इस दौरान सरकार का राजकोषीय घाटा 3 लाख 10 हजार करोड़ रुपये रहा है लेकिन शानदार टैक्स कलेक्शन और नियंत्रित खर्च के कारण स्थिति पूरी तरह से काबू में है और अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
राजकोषीय घाटा और बजटीय लक्ष्य की स्थिति
वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच सरकार का राजकोषीय घाटा 3 लाख 10 हजार करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। राजकोषीय घाटे का अर्थ यह है कि सरकार ने अपनी कुल कमाई के मुकाबले विकास कार्यों पर कितना अधिक निवेश किया है। पिछले साल इसी अवधि में यह घाटा 2 लाख 80 हजार करोड़ रुपये था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह 3 लाख 10 हजार करोड़ रुपये का घाटा सरकार द्वारा पूरे साल के लिए तय किए गए बजट लक्ष्य का मात्र 18 और 2 प्रतिशत है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल के बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4 और 3 प्रतिशत तय किया था जो लगभग 16 लाख 96 हजार करोड़ रुपये के बराबर है। वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि सरकार का हिसाब-किताब पूरी तरह से योजना के मुताबिक चल रहा है।
टैक्स और गैर-टैक्स राजस्व में भारी उछाल
सरकार की कमाई के मोर्चे पर बहुत ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। अप्रैल से जून की अवधि में शुद्ध टैक्स कलेक्शन बढ़कर 6 लाख 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अगर पिछले साल की इसी अवधि से तुलना करें तो तब यह आंकड़ा 5 लाख 40 हजार करोड़ रुपये था। टैक्स कलेक्शन में यह बड़ी बढ़ोतरी देश में बढ़ती व्यापारिक गतिविधियों और मजबूत आर्थिक आधार का प्रमाण है। इसके अलावा सरकार की बिना टैक्स वाली कमाई में भी इजाफा हुआ है और इसमें आरबीआई से मिलने वाला लाभांश और अन्य सरकारी शुल्क शामिल हैं। यह गैर-टैक्स राजस्व पिछले साल के 3 लाख 70 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल 3 लाख 80 हजार करोड़ रुपये हो गया है।
बुनियादी ढांचे और रोजगार पर बड़ा निवेश
सरकार अपनी इस मजबूत कमाई का बड़ा हिस्सा देश के भविष्य के निर्माण यानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रही है। पहली तिमाही में सरकार का कुल खर्च 13 लाख 60 हजार करोड़ रुपये रहा है जबकि पिछले साल यह 12 लाख 20 हजार करोड़ रुपये था। इस कुल खर्च में सबसे अहम हिस्सा पूंजीगत व्यय यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर का है। सरकार ने 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपये सीधे तौर पर नई सड़कों, रेलवे लाइनों, पुलों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए हैं। पिछले साल यह निवेश 2 लाख 75 हजार करोड़ रुपये था। इस भारी निवेश का सीधा उद्देश्य देश के ढांचे को मजबूत करना और बाजार में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। नई सड़कों और पुलों के निर्माण से न केवल आवाजाही सुगम होगी बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को काम भी मिलेगा।
आर्थिक स्थिरता और भविष्य की राह
कुल मिलाकर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ सही रास्ते पर है। मजबूत टैक्स वसूली और बुनियादी ढांचे पर सरकार का स्पष्ट फोकस विकास की गति को बनाए रखने में मदद कर रहा है। वित्त मंत्री द्वारा तय किए गए 4 और 3 प्रतिशत के घाटे के लक्ष्य के भीतर रहते हुए विकास पर जमकर खर्च करना एक कुशल आर्थिक प्रबंधन का संकेत है। सरकार की यह रणनीति न केवल वर्तमान आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत नींव तैयार कर रही है। सीजीए की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि सरकार का वित्तीय लेखा-जोखा पूरी तरह से नियंत्रण में है और विकास की रफ्तार थमने वाली नहीं है।