भारत के लिए बजट 2026 से ठीक पहले एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) एक बार फिर से मजबूती की राह पर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी 2026 को। समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 8 अरब डॉलर बढ़कर 709. 41 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया की नजरें भारत के आगामी केंद्रीय बजट पर टिकी हुई हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की वजह
विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस तेजी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई भारी तेजी है। आरबीआई के पास मौजूद स्वर्ण भंडार की वैल्यू में इस हफ्ते 5 और 6 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जिससे कुल गोल्ड रिजर्व 123 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। दूसरा प्रमुख कारण आरबीआई द्वारा किए गए फॉरेक्स स्वैप (Forex Swap) हैं, जिनका उद्देश्य बाजार में रुपये की लिक्विडिटी को संतुलित करना था।
रुपये की स्थिरता के लिए आरबीआई के कदम
पिछले कुछ समय से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। रुपये की इस गिरावट को रोकने और बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार सक्रिय है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है और जब भी जरूरत होती है, आरबीआई डॉलर की बिक्री करके बाजार में हस्तक्षेप करता है ताकि रुपये की साख बनी रहे। हालांकि, इस बार डॉलर की बिक्री के बावजूद भंडार में कमी नहीं। आई, क्योंकि सोने की बढ़ती कीमतों ने उस कमी को पूरा कर दिया।
स्वर्ण भंडार की बढ़ती ताकत
भारत अपनी आर्थिक सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए लगातार अपने स्वर्ण भंडार को मजबूत कर रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड रिजर्व की कीमत में 4. 62 अरब डॉलर की बढ़त के साथ यह 117. 45 अरब डॉलर (संशोधित आंकड़ों के अनुसार) के स्तर को छू गया है। सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत ढाल का काम करता है। आरबीआई की यह रणनीति जोखिम प्रबंधन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बजट 2026 और आर्थिक स्थिरता
1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट से पहले विदेशी मुद्रा भंडार का यह स्तर सरकार के लिए एक बड़ी राहत है। एक मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार न केवल देश की आयात क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि विदेशी निवेशकों के बीच भारत की आर्थिक साख को भी मजबूत करता है। इससे सरकार को अपनी राजकोषीय नीतियों को लागू करने में अधिक लचीलापन मिलता है। हालांकि, एसडीआर (SDR) और आईएमएफ के साथ रिजर्व पोजीशन में मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन कुल मिलाकर भारत की स्थिति काफी मजबूत बनी हुई है।
भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं
आने वाले समय में वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियां और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार पर असर डाल सकते हैं। लेकिन आरबीआई के पास मौजूद 700 अरब डॉलर से अधिक का यह सुरक्षा कवच भारत को किसी भी बाहरी आर्थिक झटके से बचाने के लिए पर्याप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और भारत का निर्यात बेहतर रहा, तो आने वाले महीनों में हम इस भंडार को और भी ऊंचे स्तरों पर देख सकते हैं।