भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल: गोल्ड रिजर्व की चमक से बढ़ा फॉरेक्स रिजर्व

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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल: गोल्ड रिजर्व की चमक से बढ़ा फॉरेक्स रिजर्व
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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर से बड़ी बढ़त देखने को मिली है जिससे देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 19 जून को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 963 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 672 बिलियन और 587 मिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पिछले सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 9 बिलियन और 985 मिलियन डॉलर की भारी गिरावट दर्ज की गई थी जिसके बाद यह 671 बिलियन और 625 मिलियन डॉलर पर आ गया था। अब नए आंकड़ों ने एक बार फिर सकारात्मक संकेत दिए हैं और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गिरावट का विवरण

विदेशी मुद्रा भंडार के विभिन्न घटकों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में कमी आई है। विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली फॉरेन करेंसी असेट्स इस समीक्षाधीन सप्ताह में 3 बिलियन और 72 मिलियन डॉलर घटकर 541 बिलियन और 217 मिलियन डॉलर रह गई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस गिरावट के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की गणना डॉलर में की जाती है लेकिन इसमें यूरो पाउंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार चढ़ाव का भी गहरा प्रभाव पड़ता है और इसका अर्थ यह है कि इन परिसंपत्तियों में होने वाला बदलाव केवल डॉलर की खरीद या बिक्री पर निर्भर नहीं करता बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य मुद्राओं की कीमत बढ़ने या घटने से भी प्रभावित होता है। यही कारण है कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में इस सप्ताह कमी देखी गई है।

सोने के भंडार में आई जबरदस्त तेजी

इस सप्ताह कुल विदेशी मुद्रा भंडार में हुई बढ़ोतरी का सबसे मुख्य और बड़ा कारण सोने के भंडार की कीमत में आया उछाल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक देश के गोल्ड रिजर्व की कीमत में 4 बिलियन और 110 मिलियन डॉलर की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस उछाल के बाद भारत के पास मौजूद सोने के भंडार का कुल मूल्य बढ़कर 107 बिलियन और 930 मिलियन डॉलर हो गया है। सोने के भंडार में हुई इसी भारी बढ़ोतरी ने विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में हुई कमी की भरपाई कर दी और अंततः कुल रिजर्व को सकारात्मक दायरे में पहुंचा दिया। यही बढ़ोतरी कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का सबसे बड़ा कारण रही है जो देश की आर्थिक सुरक्षा को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

एसडीआर और आईएमएफ आरक्षित कोष की स्थिति

अन्य घटकों की बात करें तो विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर में भी इस दौरान कमी देखी गई है। आरबीआई के अनुसार विशेष आहरण अधिकार 52 मिलियन डॉलर यानी 5 करोड़ और 20 लाख डॉलर घटकर 18 बिलियन और 647 मिलियन डॉलर रह गया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत के आरक्षित कोष की स्थिति में भी बदलाव आया है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के मुताबिक आईएमएफ में भारत का आरक्षित कोष 2 करोड़ और 20 लाख डॉलर की गिरावट के साथ 4 अरब और 79 करोड़ डॉलर के स्तर पर आ गया है। इन सभी आंकड़ों को मिलाकर भारत की अंतरराष्ट्रीय तरलता की स्थिति स्पष्ट होती है जो वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच देश की मजबूती को दर्शाती है।

आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण

आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों से स्पष्ट है कि विदेशी मुद्रा भंडार में उतार चढ़ाव एक निरंतर प्रक्रिया है। जहां पिछले सप्ताह इसमें 9 बिलियन और 985 मिलियन डॉलर की बड़ी गिरावट आई थी वहीं इस सप्ताह 963 मिलियन डॉलर की बढ़त ने इसे फिर से 672 बिलियन और 587 मिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचा दिया है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 3 बिलियन और 72 मिलियन डॉलर की कमी के बावजूद सोने के भंडार में 4 बिलियन और 110 मिलियन डॉलर की वृद्धि ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया। एसडीआर में 52 मिलियन डॉलर की कमी और आईएमएफ आरक्षित कोष में 2 करोड़ और 20 लाख डॉलर की गिरावट के बावजूद कुल भंडार में वृद्धि दर्ज की गई है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सुखद संकेत है।

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