पीएम मोदी की फ्री ट्रेड पॉलिसी से चमकेगी भारत की किस्मत, देश को होगा 13 लाख करोड़ का फायदा

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पीएम मोदी की फ्री ट्रेड पॉलिसी से चमकेगी भारत की किस्मत, देश को होगा 13 लाख करोड़ का फायदा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्री ट्रेड यानी मुक्त व्यापार नीति भारत की आर्थिक नियति को बदलने के लिए तैयार है। एक ऐसे समय में जब अमेरिका अधिक संरक्षणवादी रुख अपना रहा है, भारत के लिए निर्यात बाजारों में विविधता लाने और निवेश आकर्षित करने के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। नई दिल्ली अपनी व्यापारिक रणनीतियों का विस्तार कर रही है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर 13 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 140 अरब डॉलर बरसने की उम्मीद है। ब्लूमबर्ग की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इन मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से भारत को 2035 तक 140 अरब डॉलर का सीधा लाभ हो सकता है।

वैश्विक व्यापार मानचित्र का बदलता स्वरूप

जनवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद से अमेरिकी टैरिफ में हुई बढ़ोतरी वैश्विक व्यापार संबंधों को नए सिरे से परिभाषित कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 19 महीनों के उतार-चढ़ाव के बाद, अगस्त में औसत अमेरिकी टैरिफ दर 10 दशमलव 7 प्रतिशत थी, जो 2024 में केवल 2 दशमलव 3 प्रतिशत थी। यह वृद्धि विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से कारों और धातुओं पर टैरिफ को दर्शाती है। इसके अलावा, 'सेक्शन 301' के तहत जबरन मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई के रूप में 10 प्रतिशत से 12 दशमलव 5 प्रतिशत तक की लेवी लगाई गई है। इस दर पर टैरिफ से अमेरिका में सामान का आयात लगभग 15 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

दुनिया के अन्य देश व्यापार संबंधों में विविधता लाकर इसका जवाब दे रहे हैं। यूरोपीय संघ ने मर्कोसुर और मैक्सिको के साथ समझौतों को अपडेट किया है और इंडोनेशिया, भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ बातचीत पूरी की है। अक्टूबर 2025 में आसियान और चीन ने एक अपग्रेडेड फ्री-ट्रेड समझौते पर हस्ताक्षर किए। कनाडा ने भी 2025-26 के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारत की सक्रिय एफटीए रणनीति

भारत भी इस वैश्विक बदलाव में पीछे नहीं है। 2025-26 के दौरान, यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए), यूके और ओमान के साथ समझौते लागू हुए। ये समझौते 2022 में ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ हुए समझौतों के अतिरिक्त थे। भारत ने न्यूजीलैंड के साथ भी एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत पूरी कर ली है। इसके अलावा, नई दिल्ली यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के साथ भी बातचीत कर रही है।

अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 2025 की दूसरी छमाही में, भारत को अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में सबसे अधिक अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ा था, क्योंकि वाशिंगटन ने 25 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क और रूसी तेल की खरीद से जुड़ा 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया था। हालांकि, बाद में तनाव कम हुआ और अमेरिका ने रूस से जुड़े 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया और फरवरी में भारत पर पारस्परिक दरों को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। सेक्शन 301 के तहत भारत के लिए 10 प्रतिशत की दर तय की गई है, जो अन्य साझेदारों पर लगाए गए 12 दशमलव 5 प्रतिशत से कम है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का विश्लेषण

ब्लूमबर्ग ने 'कंप्यूटेबल जनरल इक्विलिब्रियम मॉडल' का उपयोग करके अनुमान लगाया है कि ये समझौते अगले दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे बदलेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को बेचे जाने वाले भारतीय सामान पर औसत टैरिफ 2024 के 2 दशमलव 4 प्रतिशत से बढ़कर 11 दशमलव 6 प्रतिशत हो गया है। अनुमान है कि 2035 तक अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में लगभग पांचवें हिस्से की कमी आएगी, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित होगा क्योंकि कुल उत्पादन का 2 प्रतिशत से भी कम हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है।

ब्लूमबर्ग ने एफटीए का मॉडल तीन तरीकों से बनाया है: द्विपक्षीय टैरिफ में बदलाव, गैर-टैरिफ उपायों (एनटीएम) में कमी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से उत्पादकता में वृद्धि। ईएफटीए के लिए 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया गया है, जिसमें से 35 अरब डॉलर अतिरिक्त होने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड के लिए यह आंकड़ा 20 अरब डॉलर है। विश्लेषण से पता चलता है कि वर्तमान एफटीए से 2035 तक भारत की जीडीपी बेसलाइन के मुकाबले 1 दशमलव 2 प्रतिशत बढ़नी चाहिए। यदि यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ समझौते 2027 से लागू होते हैं, तो यह लाभ बढ़कर 1 दशमलव 7 प्रतिशत यानी लगभग 140 अरब डॉलर हो जाएगा। अमेरिका के साथ डील से इसमें 0 दशमलव 2 प्रतिशत पॉइंट और जुड़ सकते हैं। यदि ईएईयू, जीसीसी और इजराइल के साथ बातचीत पूरी होती है, तो जीडीपी लाभ 2 दशमलव 1 प्रतिशत यानी लगभग 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

घरेलू सुधार और भविष्य की संभावनाएं

एफटीए का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को अपने घरेलू सुधारों की गति बनाए रखनी होगी। ब्लूमबर्ग के विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत उत्पादन लागत में 2 प्रतिशत की कमी करता है, तो इससे 2035 तक निर्यात में 1 प्रतिशत पॉइंट और जीडीपी में 0 दशमलव 5 प्रतिशत पॉइंट की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, भारत की कृषि कार्यबल की क्षमता का सही इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है। वर्तमान में 40 प्रतिशत से अधिक भारतीय श्रमिक खेती से जुड़े हैं, जहां उत्पादकता कम है। वियतनाम में यह हिस्सा 40 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत हो गया है और वहां प्रति श्रमिक कृषि उत्पादन भारत के मुकाबले 60 प्रतिशत अधिक है। यदि भारत भी ऐसी ही उत्पादकता हासिल करता है और श्रमिकों को मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की ओर ले जाता है, तो इससे जीडीपी लाभ में लगभग 2 प्रतिशत पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है।

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