अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आग एक बार फिर से भड़क गई है, जिसने पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। तुर्किए की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर समझौता अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि अब अमेरिका ईरान के साथ किसी भी नए समझौते की इच्छा नहीं रखता है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म करना है और इस बयान से पहले अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए थे। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बेहद संवेदनशील मार्ग है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
इस हालिया तनाव और युद्ध की आहट की वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं, डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी लगभग 5 दशमलव 8 प्रतिशत की तेजी के साथ 74 डॉलर 47 सेंट प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता नजर आया। अमेरिका और ईरान के बीच इस ताजा संघर्ष की वजह से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का डर सता रहा है, जिससे आने वाले समय में तेल की कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं।
भारत की तैयारी और तेल भंडार की स्थिति
इस वैश्विक संकट के बीच यह सवाल उठना लाजमी है कि अगर तेल की सप्लाई रुकती है तो भारत के पास कितने दिनों का बैकअप है। कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म केपलर (Kpler) की ओर से 3 जुलाई 2026 को जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कच्चे तेल का भंडार लगभग एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण जून महीने में भारत द्वारा की गई रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल की खरीदारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जून के अंत तक भारत के रणनीतिक भंडार, कमर्शियल स्टोरेज और रिफाइनरियों में मौजूद कुल कच्चे तेल का स्टॉक बढ़कर 10 करोड़ 40 लाख बैरल हो गया था। वर्तमान में भारत के पास भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) की कुल क्षमता 53 लाख 30 हजार मीट्रिक टन है। यह लगभग 3 करोड़ 90 लाख बैरल कच्चे तेल के बराबर है, जो भारत की केवल 8 दिनों की तेल जरूरत को पूरा कर सकता है। चूंकि भारत हर दिन करीब 50 लाख बैरल तेल की खपत करता है, इसलिए कुल 10 करोड़ 40 लाख बैरल के स्टॉक से देश की करीब 21 दिन की जरूरत पूरी हो सकती है।
रणनीतिक और कमर्शियल स्टॉक का विवरण
भारत की तेल सुरक्षा को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। एंजेल वन की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड (ISPRL) के तहत विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में बनी भूमिगत गुफाओं में 5 दशमलव 33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल सुरक्षित रखा गया है। यह भंडार आपात स्थिति में 9 दशमलव 5 से 12 दिनों की जरूरत पूरी करने में सक्षम है। इसके अलावा, देश की विभिन्न तेल रिफाइनरियों और डिपो में पेट्रोल, डीजल और एटीएफ जैसे पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग 50 से 60 दिनों का व्यावसायिक स्टॉक हमेशा रोलिंग मोड में रहता है। इसका मतलब है कि रणनीतिक और व्यावसायिक भंडार को मिलाकर भारत के पास एक सुरक्षित अवधि का बैकअप मौजूद है।
दुनिया के अन्य बड़े देशों के पास कितना है तेल?
वैश्विक स्तर पर तेल भंडार के मामले में चीन सबसे आगे है। अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा रणनीतिक तेल भंडार है। हालांकि चीन अपने आधिकारिक आंकड़े साझा नहीं करता, लेकिन ऊर्जा विश्लेषण कंपनी वॉर्टेक्सा (Vortexa) के अनुसार 2025 के अंत तक चीन का ऑनशोर कच्चे तेल का भंडार करीब 1 अरब 13 करोड़ बैरल तक पहुंच गया था। वहीं, अमेरिका के पास 41 करोड़ 50 लाख बैरल का सरकारी रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है। जापान इस मामले में काफी सुरक्षित स्थिति में है, जिसके पास करीब 47 करोड़ बैरल का आपातकालीन तेल भंडार है, जो उसकी 254 दिनों की घरेलू जरूरत को पूरा कर सकता है। ब्रिटेन की बात करें तो उसके पास करीब 3 करोड़ 80 लाख बैरल कच्चे तेल और 3 करोड़ बैरल रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का रणनीतिक भंडार है, जो लगभग 90 दिनों तक देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।